अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार इस समय शांति की उम्मीदों और युद्ध के बढ़ते खतरों के बीच फंसा हुआ है। प्रमुख संघर्ष क्षेत्रों में कूटनीतिक समझौतों की सुगबुगाहट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट देखी गई है, लेकिन रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिरता बेहद नाजुक है। सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे, ईरान वार्ता और यूक्रेन संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों ने अल्पकालिक राहत जरूर दी है, पर सुरक्षा समीकरणों में आ रहे बदलाव कभी भी ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल ला सकते हैं।
कूटनीतिक समझौतों से कीमतों पर बना दबाव
बाजार में हालिया नरमी की मुख्य वजह कई मोर्चों पर तनाव कम होने की आशा है। सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को कम क्षमता पर दोबारा शुरू किए जाने की तैयारी है, जिससे तेल आपूर्ति की कुछ चिंताएं दूर हुई हैं। इसके साथ ही चीन ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों का रास्ता न रोकने को लेकर हूतियों को चेतावनी दी है, जिससे समुद्री परिवहन गलियारों में सुरक्षा बहाल होने की संभावना बढ़ी है।
कूटनीतिक स्तर पर न्यूयॉर्क में डोनाल्ड ट्रंप के वार्ताकारों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच तीन घंटे तक चली बैठक को काफी सकारात्मक बताया गया है। इसके अलावा, ईरान ने यह प्रस्ताव रखा है कि यदि अमेरिका अपनी नाकेबंदी समाप्त करता है तो वह सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए तैयार है। दूसरी तरफ, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने स्पष्ट किया है कि कीव और वाशिंगटन दोनों ही इस युद्ध को सर्दी से पहले खत्म करना चाहते हैं और वे ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम के लिए पूरी तरह सहमत हैं।
गहराता सैन्य तनाव और हमलों का अंदेशा
शांति की इन कोशिशों के समानांतर युद्ध का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है। ईरान ने संघर्ष समाप्त करने को लेकर अपनी शर्तों को काफी कड़ा कर दिया है, जिसके जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उसे पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने उन अरब देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की है, जिनके इस तरह के हालात बनने पर तेहरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
रूस में भी तनाव के स्पष्ट संकेत देखने को मिल रहे हैं, जहां हाल ही में उसकी दो और तेल रिफाइनरियों पर हमले हुए हैं। इसके साथ ही मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में स्थित बम शेल्टरों का खामोशी से आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जो किसी बड़े संभावित टकराव की ओर इशारा करता है। राबोबैंक के रणनीतिकार माइकल एवरी के अनुसार, यदि बाजार के इन प्रवाहों या देशों पर सीधे हमले होते हैं, तो ऊर्जा कीमतें अचानक बदल सकती हैं। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंकर्स के रुख में भी अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिलेगा, और जो लोग केवल केंद्रीय बैंकों के बयानों को सुन रहे हैं, वे भू-राजनीतिक व भू-आर्थिक बदलावों की गति से काफी पीछे रह जाएंगे।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मुद्रा बाजारों का हाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख का भी व्यापक असर पड़ रहा है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) पर बिकवाली का दबाव देखा गया और यह 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के ताजा पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई, जबकि सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने धीमी गति से विस्तार हुआ है। डॉलर इंडेक्स में बढ़त और गुरुवार को वाशिंगटन में होने वाली ट्रंप-शी जिनपिंग बैठक से पहले कारोबारी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर के करीब मंडरा रहा है, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्च स्तर के निकट है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक कदम है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती बरकरार है, जिससे येन पर दबाव बना हुआ है, भले ही येन में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं डॉलर की आगे की बढ़त को सीमित कर रही हैं।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी पर प्रभाव
सोने की कीमतों में पिछले कारोबारी सत्र में 4,300 डॉलर के निचले स्तर से आई तेजी टिक नहीं पाई और बुधवार को एशियाई सत्र में इसमें दोबारा बिकवाली देखने को मिली। फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के कारण अमेरिकी डॉलर 30 जुलाई के बाद के अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसने गैर-उपज वाले सर्राफा की चमक को फीका कर दिया है।
इसके विपरीत, डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में मजबूती दर्ज की गई है। कार्डानो (ADA) इस सप्ताह 14% से अधिक की तेजी दर्ज करने के बाद 0.262 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। वायदा बाजार में ओपन इंटरेस्ट (OI) में वृद्धि, सकारात्मक फंडिंग दरें और व्हेल निवेशकों द्वारा की जा रही खरीदारी इस तेजी को समर्थन दे रही है। कार्डानो के डेरिवेटिव मेट्रिक्स बाजार में मजबूत स्थितियों का संकेत दे रहे हैं।
ट्रंप और शी जिनपिंग की अहम बैठक पर नजरें
बाजार के प्रतिभागी अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को वाशिंगटन में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कई महीनों तक व्यापारिक तनाव में आई नरमी के बाद, यह शिखर सम्मेलन यह तय करेगा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने संघर्ष विराम को आगे बढ़ाएंगी या फिर वैश्विक बाजार अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।



















