अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की वरिष्ठ नीति नियंता कुक ने मुद्रास्फीति के दबाव पर गंभीर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया है कि महंगाई का मौजूदा स्तर बहुत लंबे समय से बना हुआ है। नॉर्थ कैरोलिना में आयोजित एक आर्थिक सम्मेलन के दौरान अपने विचार रखते हुए कुक ने यह टिप्पणी की। उल्लेखनीय है कि उनकी यह प्रतिक्रिया अगस्त महीने के लिए जारी हुए हेडलाइन और कोर पीसीई आंकड़ों के ठीक बाद सामने आई है, जिनमें पिछले महीने की तुलना में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया था और वे अपरिवर्तित रहे थे। अमेरिका में महंगाई की गति धीमी न पड़ने के इन संकेतों ने विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कारोबारियों की रणनीतियों पर तत्काल असर डाला है।
विदेशी मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर का प्रदर्शन और प्रमुख मुद्राओं पर दबाव
अमेरिकी डॉलर ने आज प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया है, हालांकि अलग-अलग कारोबारी सत्रों में इसका मिला-जुला असर देखा गया। वैश्विक विनिमय दरों के समग्र विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि अमेरिकी डॉलर ने आज ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूती हासिल की। विदेशी मुद्रा विनिमय तालिका में प्रमुख मुद्राओं के आपसी प्रतिशत बदलाव को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि जहां अमेरिकी डॉलर आधार मुद्रा के रूप में कई प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ा, वहीं जापानी येन और यूरोपीय संघ की मुद्रा यूरो के मुकाबले अलग-अलग आर्थिक संकेतकों के आधार पर उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। आधार मुद्रा और कोट मुद्रा के इस गणित में डॉलर की समग्र दिशा मजबूत बनी रही।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली का गहराता दबाव
बुधवार के कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर में आई देर से तेजी ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को भारी दबाव में ला दिया। इसके चलते AUD/USD की जोड़ी में बिकवाली की गति काफी तेज हो गई और यह विनिमय दर जुलाई के आखिरी दिनों के बाद पहली बार फिसलकर 0.6900 के मध्य स्तर तक पहुंच गई। ऑस्ट्रेलिया में जारी हुए मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़ों ने वित्तीय बाजारों को कोई सकारात्मक या चौंकाने वाला संकेत नहीं दिया, जिससे इस मुद्रा जोड़ी के लिए कमजोरी का जोखिम और अधिक बढ़ गया। अब घरेलू आर्थिक कैलेंडर के लिहाज से सारा ध्यान गुरुवार को जारी होने वाले अगस्त महीने के व्यापार संतुलन परिणामों पर टिका हुआ है, जिससे आगे के रुझान स्पष्ट होंगे।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति का प्रभाव
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान बुधवार को USD/JPY की जोड़ी में गिरावट का रुख बना रहा और यह 157.00 के स्तर से नीचे टिकी रही। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त मौद्रिक नीति को लेकर बनी उम्मीदों और संभावित आधिकारिक बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों ने जापानी येन को मजबूत सहारा प्रदान किया है। इस नीतिगत समर्थन ने जापान के निराशाजनक घरेलू फैक्ट्री आउटपुट और खुदरा बिक्री के कमजोर आंकड़ों के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित कर दिया। इसी के साथ वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में आई व्यापक नरमी ने भी इस मुद्रा जोड़ी को नीचे की ओर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
सोने के भाव में आई अचानक गिरावट और ट्रेजरी यील्ड का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिला, जहां कीमती धातु ने बुधवार को यू-टर्न लेते हुए प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के दायरे की ओर वापसी की। इससे पहले के कारोबारी घंटों में सोने ने 4,200 डॉलर के प्रमुख और मनोवैज्ञानिक बेंचमार्क को पार करने का प्रयास किया था, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए मिले-जुले रुख और अमेरिकी डॉलर द्वारा अपनी दैनिक गिरावट के एक हिस्से की भरपाई करने के कारण सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे सर्राफा बाजार में सतर्कता का माहौल बन गया।
यूरोपीय मुद्रा यूरो पर गहराता संकट और महंगाई का संभावित सहारा
यूरोपीय संघ की साझी मुद्रा यूरो के लिए भी परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुई हैं। EUR/USD की विनिमय दर गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। बुधवार के कारोबार के दौरान यह जोड़ी फिसलकर 1.1312 के स्तर तक चली गई, जो जनवरी में दर्ज किए गए 1.2082 के उच्चतम शिखर की तुलना में बहुत नीचे है। इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूत स्थिति, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को लेकर यूरोप की संवेदनशील स्थिति से जुड़ी नई चिंताएं प्रमुख कारण रही हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति से जुड़ा कोई नया झटका यूरो को अप्रत्याशित रूप से सहारा देने का काम कर सकता है।



















