अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की अधिकारी कॉलिन्स ने महंगाई पर काबू पाने के लिए कड़े मौद्रिक रुख का खुला समर्थन किया है। उनका मानना है कि फेडरल फंड्स रेट को थोड़ा और कड़ा रखने से महंगाई को टिकाऊ तरीके से तय लक्ष्य तक लाने में काफी मदद मिलेगी। पिछले हफ्ते ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी को सही ठहराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे हालात बनने की आशंका बढ़ गई है, जहां महंगाई दर दो प्रतिशत के तय लक्ष्य से काफी ऊपर बनी रह सकती है। साढ़े पांच साल तक लगातार असामान्य रूप से ऊंची महंगाई झेलने के बाद अब मौद्रिक नीति का पूरा ध्यान कीमतों में स्थिरता लाने पर केंद्रित होना जरूरी हो गया है।
मजबूत लेबर मार्केट ने नीति निर्माताओं को दी राहत
आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण करते हुए कॉलिन्स ने रेखांकित किया कि महंगाई को लेकर ऊपर की ओर जोखिम बढ़े हैं, लेकिन साथ ही रोजगार बाजार की स्थिति पहले से बेहतर और मजबूत दिखाई दे रही है। जब लेबर मार्केट एक ठोस आधार पर टिका हो, तो केंद्रीय बैंक के पास आर्थिक विकास की गति को बड़ा नुकसान पहुंचाए बिना कीमतों पर नियंत्रण पाने के सख्त उपाय लागू करने का लचीलापन मिल जाता है। रोजगार के मजबूत आंकड़े नीति निर्माताओं को यह भरोसा देते हैं कि अर्थव्यवस्था अतिरिक्त मौद्रिक दबाव को सहन कर सकती है, जिससे लंबे समय से खिंची आ रही महंगाई को काबू में लाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर का दबदबा
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त तेवरों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है। आज के कारोबार में प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर का प्रदर्शन शानदार रहा और यह कनाडाई डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में देखा गया। डॉलर की इस तेजी ने अन्य वैश्विक मुद्राओं पर दोहरा दबाव बनाया है, जिसमें सुरक्षित निवेश की मांग और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का आकर्षण दोनों शामिल हैं।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की चाल पर वैश्विक घटनाओं का असर
एशियाई कारोबारी सत्र में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7100 के स्तर से ऊपर पहुंचकर मजबूत हुआ। इस उछाल को रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलक के कड़े बयानों से सहारा मिला। हालांकि, मध्य पूर्व में जारी तनाव और फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा है, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त सीमित होने का जोखिम बना हुआ है। इसके अलावा, इस हफ्ते के अंत में होने वाली ट्रंप और शी जिनपिंग की अहम बैठक पर भी निवेशकों की करीबी नजर है।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 157.50 के आसपास हल्के लाभ के साथ कारोबार करता दिखा। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने येन में बड़ी गिरावट को रोकने में मदद की। बैंक ऑफ़ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया और ब्याज दरों को 31 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया गया। हालांकि, यह कदम मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में पहले से तय उम्मीदों के अनुरूप था, लेकिन बैंक के नरम रुख वाले संकेतकों के कारण येन में तेजी का रुख मजबूत नहीं हो सका और डॉलर की मजबूती इस जोड़ी को लगातार आगे बढ़ा रही है।
ब्याज दरों के दबाव में फिसला सोना
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। पीली धातु लुढ़ककर 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे पहुंच गई, हालांकि बाद में इसमें थोड़ा सुधार देखा गया और इसने स्थिरता पाने की कोशिश की। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की बढ़ती संभावनाओं ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को लगातार समर्थन दिया है। गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने के लिए ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर एक प्रतिकूल माहौल तैयार करते हैं, जिसके चलते कीमती धातु भारी दबाव का सामना कर रही है।
वाशिंगटन में ट्रंप और शी जिनपिंग की शिखर वार्ता पर टिकी निगाहें
वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम गुरुवार को देखने को मिलेगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वॉशिंगटन में शिखर बैठक के लिए आमने-सामने होंगे। दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच होने वाली इस वार्ता पर वित्तीय बाजारों की सांसें टिकी हैं। यह बैठक यह तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है कि दोनों देशों के बीच चल रहा आर्थिक युद्धविराम आगे बढ़ेगा या फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के एक नए और जटिल दौर में प्रवेश करेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, तकनीक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत की दिशा से आने वाले समय में वित्तीय बाजारों की दिशा निर्धारित होगी।



















