अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए तीन साल के अंतराल के बाद अपनी बेंचमार्क उधारी दरों में इजाफा करने का कदम उठाया है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने सर्वसम्मति से नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए नई सीमा 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत निर्धारित कर दी है। वर्ष 2023 के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने दरों में वृद्धि की है। इस नीतिगत निर्णय के आते ही वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों में तेज बिकवाली देखी गई, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख बेंचमार्क काफी नीचे लुढ़क गया।
प्रमुख शेयर सूचकांकों में तेज गिरावट का दौर
ब्याज दरों में इजाफे के आधिकारिक ऐलान के बाद डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 631.21 अंक यानी 1.21 प्रतिशत का गोता लगाकर 51,461.90 के स्तर पर बंद हुआ। इसके विपरीत प्रौद्योगिकी शेयरों की बहुलता वाले नैस्डैक कंपोजिट में सीमित कमजोरी रही और यह 3.15 अंक टूटकर 25,978.42 पर रुका। वहीं व्यापक बाजार का पैमाना माने जाने वाले एसएंडपी 500 सूचकांक में 33.92 अंकों यानी 0.45 प्रतिशत का नुकसान दर्ज किया गया, जिससे यह सत्र के समापन पर 7,551.81 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में यह झटका नीति निर्माताओं द्वारा चालू कैलेंडर वर्ष 2026 के भीतर एक और दर वृद्धि की संभावना जताने के बाद और गहरा गया।
कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई का केंद्रीय बैंक पर दबाव
पॉलिसी बैठक के दौरान सभी 12 समिति सदस्यों ने ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में 12-0 के अनुपात में एकतरफा मतदान किया। इस मौद्रिक सख्ती के पीछे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल के भाव का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाना एक बड़ी वजह बनकर उभरा है। ऊर्जा कीमतों के इस उछाल ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को नीचे लाने की कोशिशों को जटिल बना दिया है। नीतिगत नेतृत्व संभाल रहे केविन वार्श ने स्पष्ट किया कि मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना केंद्रीय बैंक का सर्वोच्च वैधानिक दायित्व है। उन्होंने बैठक के बाद कहा,
"The plain fact is that inflation is too high and has been for too long."हालांकि इस नीतिगत कदम के सामने आते ही व्हाइट हाउस ने ब्याज दरें बढ़ाने के फैसले पर असहमति जताते हुए इसकी खुलकर आलोचना की है।
कॉर्पोरेट मोर्चे पर जेनेरिक के शेयरों में भारी उछाल
समूचे बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में मजबूत व्यक्तिगत हलचल भी देखी गई। ऊर्जा उपकरण विनिर्माता जेनेरिक के शेयरों में विस्तारित कारोबारी सत्र के दौरान 33 प्रतिशत की ऐतिहासिक तेजी दर्ज हुई। इस जबर्दस्त खरीदारी का मुख्य कारण ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न के साथ हुआ एक बड़ा औद्योगिक समझौता रहा। इस रणनीतिक समझौते के तहत जेनेरिक कंपनी अमेज़न के डेटा केंद्रों के लिए बैकअप पावर जनरेटरों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। इसके बदले अमेज़न को जेनेरिक में 340 मिलियन डॉलर मूल्य के शेयर खरीदने से संबंधित वॉरंट जारी किए गए हैं।
वायदा बाजार में निचले स्तरों से शानदार रिकवरी
मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बाद 17 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया। गुरुवार के शुरुआती घंटों में निवेशकों द्वारा की गई लिवाली के चलते डाउ जोंस फ्यूचर्स 322 अंक यानी 0.63 प्रतिशत चढ़कर 51,829 पर कारोबार करता दिखा। इसी प्रकार नैस्डैक फ्यूचर्स 191.50 अंक अथवा 0.66 प्रतिशत की उछाल के साथ 29,156.50 पर पहुंच गया। व्यापक बाजार का रुख दर्शाते हुए एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में भी 41.75 अंक यानी 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह 7,598.25 के स्तर को छूने में सफल रहा।
बाजार विश्लेषक का नजरिया और बॉन्ड यील्ड की चाल
अर्थ भारत ग्लोबल मल्टीप्लायर फंड के फंड मैनेजर नचिकेत सावरीकर के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह कदम अप्रत्याशित नहीं था क्योंकि मुद्रास्फीति निर्धारित 2 प्रतिशत के लक्ष्य से लगातार ऊपर बनी हुई है। अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और रोजगार बाजार में स्थिरता के चलते नीति निर्माताओं के लिए मूल्य स्थिरता बहाल करने का स्पष्ट संकेत देना आवश्यक हो गया था। विश्लेषक ने बताया कि आज की सर्वसम्मत कार्रवाई ने दरअसल दिसंबर में हुई विवादास्पद दर कटौती के प्रभाव को पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया है।
विश्लेषक ने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय हलकों में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न लंबी अवधि की ब्याज दरों की दिशा को लेकर है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में फरवरी के निचले स्तरों से लगभग 100 आधार अंकों की तेजी आ चुकी है, जिसमें जुलाई से दर्ज हुई 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी भी शामिल है। नचिकेत सावरीकर ने तर्क दिया कि यदि केंद्रीय बैंक ने जून या जुलाई में ही अल्पकालिक दरों को कड़ा किया होता, तो लंबी अवधि की यील्ड में हालिया उछाल को रोका जा सकता था। उनका मानना है कि लंबी अवधि के बॉन्ड प्रतिफल को नीचे लाने के लिए अक्सर अल्पकालिक दरों को सख्त करना अनिवार्य कदम साबित होता है। यदि लंबी अवधि की ब्याज दरों में ठहराव आता है, तो निवेशकों का ध्यान आगामी तीसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों और कंपनियों के बुनियादी वित्तीय प्रदर्शन पर केंद्रित हो सकेगा।



















