अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक को लेकर वैश्विक मुद्रा बाजार में हलचल तेज हो गई है। बाजार विश्लेषक इस बात पर करीबी नजर रख रहे हैं कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को लेकर क्या कदम उठाती है। अगस्त महीने में आए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े उम्मीद से अधिक मजबूत रहे थे, जिसने नीति निर्माताओं पर महंगाई पर लगाम लगाने का दबाव बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की व्यापक संभावना है, और यदि केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाने से पीछे हटता है तो इससे उसकी विश्वसनीयता को झटका लग सकता है और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है।
मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की विश्वसनीयता का सवाल
कमर्जबैंक की विश्लेषक अंत्जे प्राफके का आकलन है कि नीति निर्माताओं के सामने अपनी साख बचाने की बड़ी चुनौती है। अगस्त में महंगाई दर के आंकड़ों ने नीतिगत सख्ती की जरूरत को रेखांकित किया था। यदि इस समय नीतिगत दरों को स्थिर रखने का अप्रत्याशित फैसला लिया जाता है, तो वित्तीय बाजार इसे केंद्रीय बैंक की नरमी मान सकते हैं, जिससे मुद्रास्फीति के खिलाफ उसकी लड़ाई की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े होंगे। दूसरी ओर, 25 आधार अंकों की संभावित बढ़ोतरी का अनुमान बाजार पहले ही अपनी कीमतों में काफी हद तक शामिल कर चुका है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर बैठक में पेश किए जाने वाले डॉट प्लॉट्स यह संकेत देते हैं कि आगे भी दरों में इजाफा संभव है, तो बाजार इसे इस बात की पुष्टि मानेगा कि मानक ब्याज दरें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर को और मजबूती मिलने के आसार हैं। हालांकि, डॉलर की चाल पूरी तरह से पूर्व निर्धारित नहीं मानी जा रही है, क्योंकि चेयरमैन वॉर्श फॉरवर्ड गाइडेंस का समर्थन नहीं करते हैं। उनके नेतृत्व में केंद्रीय बैंक की प्रतिक्रिया की दिशा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, जिससे आने वाले दिनों में मुद्रा की दिशा काफी हद तक नए मैक्रो डेटा पर निर्भर करेगी।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल से बढ़ी महंगाई की चिंता
फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले वित्तीय बाजारों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसकी मुख्य वजह अगस्त महीने की मजबूत रोजगार रिपोर्ट और महंगाई के आंकड़े हैं। अगस्त के रोजगार आंकड़ों ने ब्याज दर बाजारों में दरों के ऊंचे रहने की आशंकाओं को नए सिरे से हवा दी थी। इसके साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई का डर और गहरा गया है। तेल आधारित मुद्रास्फीति की इस आशंका ने बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल ला दिया है, जिससे डॉलर को अतिरिक्त सहारा मिला है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग बढ़ा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बनाकर अमेरिकी डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे एक आरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर का रुतबा और मजबूत हुआ है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और सोने की स्थिति
वैश्विक मुद्रा बाजारों में इस समय विभिन्न जोड़ों में अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म (AUD/USD) बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान लगातार तीसरे दिन गिरावट के रुख में रहा। जोखिम से जुड़ी इस मुद्रा ने 0.7100 के स्तर का बचाव करने की कोशिश की और यह अपने मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मजबूती और मध्य पूर्व के तनाव ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर गहरा दबाव बनाया हुआ है।
दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन का युग्म (USD/JPY) बुधवार को एशियाई सत्र में 155.00 के स्तर को पार करते हुए एक हफ्ते के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, यह जोड़ी 155.50 के स्तर से नीचे ही बनी रही क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू हो रही बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले बड़े दांव लगाने से बचते दिखे। जापान की लंबे समय से चली आ रही अत्यंत निचली ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया में फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बन गया था। अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और सख्त करने की उम्मीद है, यह दौर एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने ब्याज दरें बढ़ाई थीं, वहीं जापान लंबे समय तक अलग-थलग रहा था।
कमोडिटी बाजार में सोने ने यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में मामूली इंट्राडे बढ़त बनाए रखी, लेकिन इसमें आक्रामक खरीदारी का अभाव देखा गया और यह 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ही रहा। दो सप्ताह के उच्च स्तर से अमेरिकी डॉलर में हुए हल्के मुनाफे की वसूली ने सोने को कुछ सहारा जरूर दिया, लेकिन केंद्रीय बैंकों की बड़ी बैठकों के जोखिम को देखते हुए ट्रेडर आक्रामक रुख अपनाने के बजाय स्पष्ट संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।



















