वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इस समय केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों को लेकर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों को लेकर अपनाई जा रही समय खींचने वाली कार्यप्रणाली अब ब्रिटिश पाउंड की स्थिरता के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। लंबे समय से मौद्रिक नीति समिति की प्रत्येक बैठक के नजदीक आते ही दरों में बढ़ोतरी या सख्ती की संभावनाएं घटती रही हैं और बाजार की उम्मीदें आगे खिसकती रही हैं। अब यह परिदृश्य पाउंड की मजबूती के लिए प्रतिकूल होता दिख रहा है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के रुख ने अन्य प्रमुख मुद्राओं की दिशा तय कर दी है।
ब्रिटिश पाउंड और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत दुविधा
बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए इस साल अब तक की रणनीति मुख्य रूप से समय हासिल करने पर आधारित रही है। आपूर्ति पक्ष से उपजी मुद्रास्फीति के दबाव और श्रम बाजार से जुड़े अनिश्चित घटनाक्रमों के बीच यह रुख नीतिगत स्तर पर उचित माना जा रहा था। इस दृष्टिकोण ने अब तक ब्रिटिश मुद्रा को अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव से बचाकर काफी हद तक स्थिर बनाए रखने में सफलता दिलाई। इसके बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि इस देरी करने वाली कार्यशैली का प्रभाव अब समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुका है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि नीतिगत बैठक में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के पक्ष में 6-3 के अंतर से मतदान हो सकता है। साथ ही फॉरवर्ड गाइडेंस में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। यदि ऐसा होता है, तो केवल दरें जस की तस रखने और पुरानी दिशा बनाए रखने भर से पाउंड में आने वाली नरमी को रोक पाना संभव नहीं होगा। नैरोइंग कैरी यानी ब्याज दरों के घटते अंतर ने पाउंड की स्थिति को नाजुक बना दिया है, जिससे वैश्विक निवेशक अब सतर्क रुख अपना रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय में अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के अपने उच्च स्तर के आसपास बेहद मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंकाओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को काफी बढ़ा दिया है।
इस पूरे माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार तीसरे कारोबारी दिन दबाव में बना रहा। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए लगभग एक महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। जोखिम उठाने के प्रति निवेशकों के घटते रुझान और डॉलर के मजबूत रुख ने इस मुद्रा पर लगातार नकारात्मक प्रभाव डाला है।
डॉलर के मुकाबले जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की तैयारी
बुधवार के एशियाई सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी भारी कमजोरी देखी गई। यह मुद्रा जोड़ी उछलकर 155.00 के स्तर को पार करते हुए एक सप्ताह के नए उच्च स्तर तक पहुंच गई। कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई की चिंताओं और फेडरल रिजर्व के कड़े रुख के अनुमानों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार तेजी बनाए रखी है। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव ने वैश्विक आरक्षित मुद्रा के तौर पर डॉलर के दर्जे को और अधिक मजबूती दी है।
हालांकि, यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे ही बनी रही क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व के ताजा निर्णय और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले बड़े दांव लगाने से बचते दिखाई दिए। जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में सहायता की थी, जिससे येन दुनिया में फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बन गया था। दुनिया के प्रमुख देशों द्वारा दरों में आक्रामक बढ़ोतरी के दौरान भी जापान एक अलग छोर पर खड़ा रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इसी सप्ताह नीतिगत सख्ती के संकेत मिलने से यह दशक पुराना फायदा एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है।
सोने की चाल और फेडरल रिजर्व के आंकड़ों का प्रभाव
यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसमें आगे खरीदारी का उत्साह कम रहा और यह 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ही सीमित रहा। डॉलर इंडेक्स में दो हफ्ते के शीर्ष स्तर से आई हल्की मुनाफावसूली ने सोने को निचली कीमतों पर सहारा दिया। इसके बावजूद, केंद्रीय बैंकों की महत्वपूर्ण बैठकों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए कारोबारी किसी भी एकतरफा दिशा में बड़ा दांव लगाने के बजाय किनारे बैठकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में फेडरल रिजर्व का निर्णय सबसे केंद्रीय महत्व रखता है। इस नीतिगत घोषणा से पहले आए अमेरिकी आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त महीने की रोजगार रिपोर्ट काफी मजबूत रही थी, जिसने दरों के वायदा बाजार में फेडरल रिजर्व की ओर से आक्रामक सख्ती की संभावनाओं को हवा दे दी थी। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के अनुसार रोजगार के आंकड़ों की तुलना में हालिया अमेरिकी अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े मौद्रिक नीति की अंतिम रूपरेखा तय करने के लिहाज से कहीं अधिक निर्णायक साबित हो रहे हैं।



















