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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से डॉलर पर सीमित असर, विदेशी मुद्रा और सोने में हलचलबाज़ार
3 नव॰ 2026, 5:20 pm (9 मिनट पहले)· 0

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से डॉलर पर सीमित असर, विदेशी मुद्रा और सोने में हलचल

विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से डॉलर में कोई बड़ा ढांचागत बदलाव नहीं आएगा, जबकि वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों और राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सोना, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के मतदान और परिणामों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल काफी हद तक स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। आईएनजी के विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों का अमेरिकी डॉलर पर पड़ने वाला कोई भी असर फौरी और बेहद सीमित रहेगा। अगर डेमोक्रेट्स संसद के दोनों सदनों में जीत दर्ज करते हैं, तो कड़े नियमों की आशंका और नीतिगत गतिरोध के चलते डॉलर पर कुछ समय के लिए दबाव जरूर बन सकता है। इसके बावजूद, मुद्रा बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति सबसे अहम कारक बनी हुई है। यदि कांग्रेस विभाजित रहती है, तो यह स्थिति डॉलर के लिए तटस्थ से लेकर थोड़ी मददगार साबित हो सकती है।

संसदीय समीकरण और मुद्रा बाजार की गणित

बाजार की मौजूदा स्थिति का आकलन करते हुए विश्लेषकों ने कहा कि मध्यावधि परिणामों से विदेशी मुद्रा बाजार में बड़े ढांचागत बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि, अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा के साथ सीनेट में भी नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो डॉलर पर तात्कालिक दबाव देखा जा सकता है। बाजार इस समय प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के नुकसान की संभावना को पूरी तरह से शामिल कर चुका है, लेकिन दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक जीत की संभावना को केवल आंशिक रूप से ही आंका गया है।

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यदि डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में क्लीन स्वीप करते हैं, तो तकनीक और खासकर एआई क्षेत्र की कंपनियों पर कड़े विनियामक नियमों की चिंता बढ़ सकती है। हाल के दौर में देखा गया है कि तकनीकी शेयरों पर दबाव का सीधा असर अमेरिकी डॉलर पर भी पड़ा है। इसके अलावा, सरकारी फंडिंग और ऋण सीमा जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर फैसले अटकने या प्रशासनिक गतिरोध गहराने का जोखिम भी बढ़ सकता है, जिससे वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल बन सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर ब्याज दरों के फैसले का दबाव

अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन फिसलते हुए दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपनी ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी किए जाने के बावजूद दर्ज की गई। बाजार को इस दर वृद्धि की व्यापक उम्मीद पहले से थी।

रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का यह फैसला पूरी तरह से सर्वसम्मत नहीं रहा। नीतिगत बैठक में तीन सदस्यों ने नीतिगत दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखने के पक्ष में राय दी थी। सदस्यों के बीच इस मतभेद ने आगे और दर वृद्धि किए जाने की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। भविष्य में सख्त मौद्रिक कदमों की संभावना कम होने और अमेरिकी डॉलर की हल्की मजबूती के कारण एयूडी/यूएसडी जोड़ी पर दबाव लगातार बना रहा।

जापानी येन और सुरक्षित निवेश विकल्पों का हाल

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में एशियाई सत्र के दौरान हल्की बढ़त देखी गई, जिससे यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी पिछले सत्र के 158.00 के स्तर से नीचे खिसक गई। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले की अनिश्चितता और ईरान से कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों के चलते डॉलर में बहुत ज्यादा आक्रामकता नहीं दिखी। दूसरी तरफ, जापान के नीति निर्माताओं की ओर से मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया।

हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे येन की तेजी भी एक सीमित दायरे में ही थमी रही। इस दोतरफा दबाव की वजह से मुद्रा जोड़ी एक जाने-पहचाने दायरे में सीमित रही, जिसके कारण बाजार विश्लेषक किसी स्पष्ट दिशा के संकेत मिलने तक नई पोजिशन लेने में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

सोने की कीमतों में गिरावट और मजबूत आर्थिक आंकड़े

यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 3,900 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गई। यह गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और सख्ती जारी रखने की आशंकाओं के बीच आई है, जिससे सोना पिछले सप्ताह के अपने निचले स्तर के करीब आ गया, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर था।

सोने पर यह दबाव अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सकारात्मक आंकड़ों के बाद और बढ़ गया। हालिया आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में अक्टूबर के दौरान लगातार 10वें महीने विस्तार दर्ज किया गया है। इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट का विनिर्माण पीएमआई अक्टूबर में बढ़कर 55.5 पर पहुंच गया, जबकि पिछले महीने यह 54.5 पर था। यह आंकड़ा बाजार के आम अनुमानों से कहीं अधिक मजबूत रहा, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है।

क्रिप्टो बाजार में कार्डानो की लगातार कमजोरी

डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी सुस्ती का रुख देखने को मिला। कार्डानो में सुधार का दौर लगातार आगे बढ़ रहा है और यह फिसलकर 0.189 डॉलर से नीचे कारोबार करता दिखा। पिछले कारोबारी दिन अपने प्रमुख समर्थन क्षेत्र को गंवाने के बाद से ही एडीए पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। डेरिवेटिव्स बाजार के मिले-जुले आंकड़ों और ब्लॉकचेन पर दर्ज गतिविधियों में कमजोरी के चलते निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों के कमजोर पड़ने से आने वाले सत्रों में इस डिजिटल टोकन में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है।

सवाल-जवाब

क्या अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से डॉलर में भारी गिरावट आ सकती है?
विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नतीजों से डॉलर पर कोई बड़ा ढांचागत असर नहीं होगा और इसका कोई भी नकारात्मक असर फौरी रहेगा।
डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्ण जीत का डॉलर पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में जीतते हैं तो तकनीकी विनियामक चिंताओं और सरकारी फंडिंग के गतिरोध के कारण डॉलर पर तात्कालिक दबाव आ सकता है।
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के फैसले के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर क्यों गिरा?
दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि के बावजूद तीन सदस्यों ने दरें 4.60 प्रतिशत पर रखने का समर्थन किया, जिससे भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कमजोर हुई।
सोने की कीमतों में हालिया गिरावट का क्या कारण है?
अक्टूबर में अमेरिकी विनिर्माण पीएमआई के 55.5 तक पहुंचने और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे सख्ती बनाए रखने की आशंकाओं के कारण सोना 3,900 डॉलर से नीचे आ गया।
कार्डानो की कीमत पर इस समय क्या दबाव बना हुआ है?
कार्डानो अपने प्रमुख तकनीकी समर्थन क्षेत्र को खोने और कमजोर ऑन-चेन मेट्रिक्स के कारण 0.189 डॉलर से नीचे फिसल गया है।
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