मिजोरम सरकार ने साल 2047 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में राज्य का योगदान बढ़ाकर 1 प्रतिशत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। ज़ोनुआम स्थित वुडलैंड हिल में मिजोरम एंटरप्रेन्योर्स चैंबर की ओर से आयोजित यूथ एंटरप्रेन्योरशिप समिट 2026 में मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने युवाओं से स्थानीय व्यापार और सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नवाचार, स्थानीय उद्यम और उद्यमशीलता सबसे अहम माध्यम हैं।
अर्थव्यवस्था का विस्तार और आय बढ़ाने की योजना
आर्थिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश की कुल आबादी में मिजोरम की भागीदारी लगभग 0.9 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य का मौजूदा योगदान सिर्फ करीब 0.1 प्रतिशत है। सरकार का उद्देश्य इस अंतर को समाप्त करना है। इसके तहत वर्ष 2047 तक राष्ट्रीय उत्पादन में राज्य का योगदान 1 प्रतिशत तक पहुंचाने के साथ-साथ प्रति व्यक्ति आय को 16 लाख रुपये के स्तर पर ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इस विजन को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए सरकार ने बुनियादी स्तर पर कई कार्य शुरू किए हैं। कृषि क्षेत्र और कृषकों की आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कृषि उत्पादों के लिए समर्थन मूल्य लागू किए गए हैं। इसके अलावा किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए फसल और पशुधन बीमा योजनाओं की शुरुआत की गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
बाना काइह विशेष पैकेज और वित्तीय सहायता
युवा उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बाना काइह सीएम स्पेशल पैकेज के महत्व पर प्रकाश डाला। यह योजना उन नागरिकों को वित्तीय अवसर उपलब्ध कराती है जो नए छोटे उद्यम शुरू करना चाहते हैं या फिर अपने मौजूदा काम का विस्तार करने के इच्छुक हैं। जो उद्यमी बड़े स्तर पर व्यापारिक उपक्रम स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए योजना में एक अलग ऋण घटक की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बाना काइह के तहत वित्तीय सहायता केवल वास्तविक और योग्य प्रस्तावों को ही दी जाती है, जिसमें किसी भी प्रकार के पक्षपात अथवा भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं है। योजना के क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि अब तक जिन भी लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत किया गया है, उनमें से किसी ने भी किस्त चुकाने में कोई डिफॉल्ट नहीं किया है और भुगतान पूरी तरह नियमित रहा है।
नवाचार और स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा
राज्य में तकनीकी और व्यावसायिक नवाचार को गति देने के लिए भी कई प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार एक इनोवेशन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना कर रही है। इसके साथ ही नए विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए इनोवेशन अवार्ड्स की शुरुआत की गई है। नए स्टार्टअप्स को वित्तीय पूंजी उपलब्ध कराने के लिए वेंचर कैपिटल फंड का निर्माण किया गया है और मिजोरम स्टार्टअप मिशन के माध्यम से युवा उद्यमियों को हर संभव सहायता दी जा रही है।
लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र में आ रहे बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय कृषि उत्पादों का इस्तेमाल करके कई युवा फूड प्रोसेसिंग इकाइयां लगा रहे हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले फलों से फ्रूट बियर बनाने में रुचि रखने वाले उद्यमियों को इस वर्ष आवश्यक परमिट भी जारी किए गए हैं, जिससे स्थानीय फसलों की मांग और मूल्य संवर्धन दोनों में बढ़ोतरी हो रही है।
स्वदेशी उत्पादों की खरीद और अलग बैंक का प्रस्ताव
स्थानीय उत्पादन को बाजार में मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने लोगों से राज्य में बनी वस्तुओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मिजोरम में निर्मित उत्पादों की खरीदारी से सीधे तौर पर स्थानीय उत्पादकों और कारोबारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। राज्य में बने सामान के उपयोग को अधिकतम करने के उद्देश्य से सरकार ने मिजोरम प्रेफरेंशियल स्टोर परचेज रूल लागू किया है, जिससे स्थानीय उत्पादों को सरकारी व गैर-सरकारी स्तर पर वरीयता मिल सके।
स्थानीय कारोबारियों के लिए पूंजी की उपलब्धता को आसान और तेज बनाने के लिए सरकार एक अन्य बड़े कदम पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के उद्यमियों को सुगम ऋण मुहैया कराने के लिए मिजोरम अपना स्वतंत्र बैंक स्थापित करने की संभावना तलाश रहा है। इस पूरे प्रस्ताव का अध्ययन और रूपरेखा तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन पहले ही किया जा चुका है।



















