अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमतों में लगातार कमजोरी का रुख बना हुआ है। 22 अक्टूबर को एक अहम चढ़ती हुई ट्रेंडलाइन के टूटने के बाद से पीली धातु लगातार दबाव के घेरे में दिख रही है। इसके बाद 30 अक्टूबर को भाव 3,943 डॉलर के स्तर से नीचे फिसलते हुए 3,870 डॉलर के करीब जा पहुंचे, जो एक साल का सबसे निचला स्तर रहा। तकनीकी संकेतों में दिख रही तेज गिरावट की रफ्तार इस बात की ओर इशारा कर रही है कि आने वाले दिनों में कीमतें 3,700 डॉलर के स्तर की तरफ भी फिसल सकती हैं। हालांकि इस स्तर के नीचे लगातार बड़ी गिरावट बने रहने की संभावना फिलहाल सीमित मानी जा रही है।
तकनीकी स्तरों पर बिकवाली का असर
बाजार के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 22 अक्टूबर को जब सोने ने ट्रेंडलाइन तोड़ी थी, तब शुरुआत में बिकवाली का बहुत गहरा असर फौरन नहीं दिखा था। लेकिन बीते शुक्रवार को बाजार में अचानक तेज गिरावट आई और भाव 3,943 डॉलर के स्तर को तोड़ते हुए 3,870 डॉलर के एक साल के निचले स्तर तक लुढ़क गए। बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में 3,700 डॉलर से नीचे भाव के टिके रहने की उम्मीद काफी कम है। यूनाइटेड ओवरसीज बैंक के क्वेक सेर लियांग ने कहा,
"इस चरण में 3,700 डॉलर के नीचे लगातार गिरावट की संभावना अधिक नहीं है।"
यूरोपीय सत्र में 3,900 डॉलर के नीचे फिसला सोना
यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से के दौरान सोना एक बार फिर फिसलकर 3,900 डॉलर के निशान से नीचे आ गया। कीमतें अब पिछले सप्ताह बने अक्टूबर 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर की ओर देख रही हैं। इस कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीतियों में और सख्ती किए जाने की आशंकाएं हैं। अमेरिकी आर्थिक मोर्चे पर जारी आंकड़ों ने इस धारणा को और मजबूती दी है। सोमवार को सामने आए आंकड़ों से पता चला कि अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र की कारोबारी गतिविधि में अक्टूबर में लगातार दसवें महीने विस्तार हुआ है। इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अनुमानों से बेहतर रहा और यह पिछले महीने के 54.5 से बढ़कर अक्टूबर में 55.5 पर पहुंच गया, जिससे सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव गहरा गया।
मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलिया और जापान की हलचल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में केवल सोना ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार भी बड़े बदलावों से गुजर रहे हैं। मंगलवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन नीचे खिसकते हुए दो सप्ताह के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में उम्मीद के मुताबिक की गई 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद आई। हालांकि केंद्रीय बैंक का यह फैसला पूरी तरह सर्वसम्मत नहीं था, क्योंकि तीन सदस्य ब्याज दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही बनाए रखने के पक्ष में थे। इस असहमति ने आगे दर वृद्धि की उम्मीदों को कमजोर कर दिया, जिसने अमेरिकी डॉलर की हल्की मजबूती के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बना दिया।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर मंगलवार के एशियाई सत्र में कुछ नरमी दिखाता नजर आया और पिछले दिन की बढ़त को समेटते हुए 158.00 के स्तर से नीचे आ गया। डॉलर में यह सुस्ती ईरान से जुड़ी कूटनीतिक उम्मीदों और आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले देखी जा रही है। बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिम से येन को सहारा तो मिल रहा है, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे बढ़त सीमित है। नतीजतन, यह मुद्रा जोड़ी एक जाने-पहचाने दायरे में सिमट कर रह गई है।
क्रिप्टो बाजार में कार्डानो पर बढ़ता दबाव
डिजिटल एसेट बाजार की बात करें तो कार्डानो में गिरावट का दायरा और बढ़ गया है। मंगलवार को एडीए का कारोबार 0.189 डॉलर से नीचे दर्ज किया गया, क्योंकि पिछले ही दिन इसने अपना एक अहम समर्थन क्षेत्र गंवा दिया था। डेरिवेटिव्स बाजार के मिले-जुले आंकड़े और ब्लॉकचेन पर दिख रहे सतर्क रुझान खरीदारों के विश्वास को कमजोर कर रहे हैं। तकनीकी संकेतकों में दिख रही कमजोरी यह संकेत दे रही है कि कार्डानो के लिए आने वाले समय में गिरावट का जोखिम अभी खत्म नहीं हुआ है।


















