घरेलू सराफा बाजारों में हाजिर चांदी की कीमतों में विभिन्न शहरों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। प्रमुख महानगरों में जहां 999 शुद्धता वाली चांदी का सामान्य स्तर 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बना हुआ है, वहीं दक्षिणी शहरों में यह भाव काफी ऊंचे पायदान पर पहुंच गया है। चेन्नई और हैदराबाद जैसे केंद्रों में खरीदारों को अन्य शहरों की तुलना में प्रति किलो 10,000 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मांग और आपूर्ति के समीकरणों के चलते यह क्षेत्रीय मूल्य अंतर सामने आया है।
महानगरों में चांदी का भाव और खुदरा वजन के दाम
राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े कारोबारी केंद्रों में 999 शुद्धता वाली 1 किलोग्राम चांदी 2.35 लाख रुपये के स्तर पर उपलब्ध है। छोटी मात्रा में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी दरें इसी अनुपात में निर्धारित की गई हैं। इन शहरों में 100 ग्राम चांदी का भाव 23,500 रुपये और 10 ग्राम चांदी का रेट 2,350 रुपये दर्ज किया गया है।
इसके अलावा खुदरा आभूषण बाजार में छोटे सिक्कों और कम वजन की चांदी के दाम भी तय किए गए हैं। खुदरा विक्रेताओं के पास 8 ग्राम चांदी 1,880 रुपये में मिल रही है, जबकि 1 ग्राम चांदी की कीमत 235 रुपये दर्ज की गई है। छोटे वजन की चांदी में निवेश करने वाले आम खरीदारों के लिए यह स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चेन्नई और हैदराबाद में 10,000 रुपये की अतिरिक्त तेजी
इसके विपरीत दक्षिणी भारत के प्रमुख बाजारों में चांदी के भाव अलग स्तर पर बने हुए हैं। चेन्नई और हैदराबाद सहित तीन शहरों में 999 शुद्धता वाली 1 किलोग्राम चांदी 2.45 लाख रुपये के भाव पर बिक रही है। मुंबई और दिल्ली की तुलना में यह दर सीधे तौर पर 10,000 रुपये प्रति किलो अधिक है।
इन तीन शहरों में छोटे वजन के सौदों पर भी यह प्रीमियम साफ नजर आ रहा है। यहां 100 ग्राम चांदी की कीमत 24,500 रुपये और 10 ग्राम चांदी का भाव 2,450 रुपये दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि सामान्य औसत दरों के मुकाबले 100 ग्राम पर 1,000 रुपये और 10 ग्राम पर 100 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। अन्य शहरों में औसत 1 किलोग्राम चांदी 2.35 लाख रुपये, 100 ग्राम चांदी 23,500 रुपये और 10 ग्राम चांदी 2,350 रुपये पर स्थिर बनी हुई है।
लगातार छठे साल वैश्विक आपूर्ति घाटे की आशंका
चांदी के बुनियादी ढांचे पर जारी टाटा म्यूचुअल फंड के नोट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर चांदी लगातार छठे साल आपूर्ति घाटे (सप्लाई डेफिसिट) की ओर बढ़ रही है। दुनिया भर में चांदी की कुल खपत में सबसे बड़ा हिस्सा औद्योगिक मांग का है। विनिर्माण और औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ती खपत के मुकाबले नई खदानों से आपूर्ति सीमित रहने के कारण यह असंतुलन बना हुआ है।
इस वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में चीन का दबदबा काफी गहरा है। टाटा म्यूचुअल फंड के नोट में रेखांकित किया गया है कि दुनिया के कुल चांदी भंडारों में चीन की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत है। इसके साथ ही वह वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता के 60 से 70 प्रतिशत हिस्से पर सीधा नियंत्रण रखता है। इस तरह के केंद्रित नियंत्रण की वजह से वैश्विक धातु आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है।
वायदा बाजार का रुख और तकनीकी स्तर
घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर चांदी का अनुबंध 2,25,705 रुपये प्रति 1 किलोग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा, जिसमें 0.2 प्रतिशत की हल्की नरमी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी लगभग 1 प्रतिशत टूटकर 61 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई, जो इसके दो महीने के निचले स्तर के करीब है।
जियोटस डॉट कॉम के सीईओ विक्रम सुब्बुराज ने बाजार की मजबूती पर अपनी बात रखते हुए कहा कि चांदी बेहतर मजबूती दिखा रही है और इसका दिसंबर अनुबंध प्रति किलो 2.25 लाख रुपये से ऊपर टिका हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सत्र के उच्च स्तर 2,28,697 रुपये के करीब कारोबार कर रहा है, जो दर्शाता है कि निचले स्तरों पर खरीदार अब भी सहारा दे रहे हैं।
वैश्विक आर्थिक संकेत और डॉलर का दबाव
विक्रम सुब्बुराज ने आगे स्पष्ट किया कि वैश्विक परिस्थितियां मिली-जुली बनी हुई हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कमजोर हुई हैं, जिससे आम तौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को सहारा मिलना चाहिए। हालांकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के उच्च स्तरों ने तेजी के दायरे को सीमित कर रखा है। इसके साथ ही सोने को सितंबर के तीव्र सुधार से उबरने की आवश्यकता है। सितंबर के दौरान हाजिर सोने में 6.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके चलते अक्टूबर की वापसी ने अभी तक किसी टिकाऊ रुझान की पुष्टि नहीं की है।
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी 61 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकी रही। अमेरिकी नौकरियों के कमजोर आंकड़ों और फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना घटने के बावजूद मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड का दबाव हावी रहा। यूरोप में बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता और राजकोषीय चिंताओं के कारण यूरो में कमजोरी आई, जिससे डॉलर को मजबूती मिली। इसके अलावा लगातार जारी बॉन्ड बिकवाली, राजकोषीय जोखिमों और सतत मुद्रास्फीति चिंताओं के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 24 साल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिसने कीमती धातुओं की तेजी पर लगाम लगाए रखी।
















