अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की जबरदस्त मजबूती के चलते जापानी येन सहित प्रमुख वैश्विक करेंसियों पर दबाव लगातार गहराता जा रहा है। जापान के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि 27 अगस्त से 28 सितंबर के बीच जापानी अधिकारियों ने विदेशी मुद्रा बाजार में कोई नया हस्तक्षेप नहीं किया था। इससे पहले जुलाई के दौरान अमेरिका और जापान के बीच रिकॉर्ड 98.7 अरब डॉलर का समन्वित संयुक्त अभियान चलाया गया था। नए हस्तक्षेप की गैरमौजूदगी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार बनी तेजी के कारण डॉलर के मुकाबले येन अपनी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर रुख पर कारोबार कर रहा है। मुद्रा विनिमय बाजार में USD/JPY दिन के निचले स्तरों से उबरकर 157.41 के स्तर पर सपाट बंद हुआ और एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर पहुंच गया।
जापान में हस्तक्षेप की कमी और बैंक ऑफ जापान की रणनीति
जापान के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों ने बाजार के उन कयासों पर विराम लगा दिया है जिनमें यह माना जा रहा था कि येन में तेज गिरावट को रोकने के लिए अधिकारी हाल के हफ्तों में डॉलर बेच रहे थे। आधिकारिक पुष्टि से यह साबित हुआ कि 27 अगस्त से 28 सितंबर की समयावधि में विनिमय बाजार में कोई सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ। जुलाई महीने में 98.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड संयुक्त अभियान के बाद बाजार सहभागी सतर्क बने हुए थे, लेकिन नई कार्रवाई के अभाव ने सटोरियों को डॉलर के पक्ष में दांव लगाने की खुली छूट दे दी है। हालांकि बैंक ऑफ जापान की ओर से नीतिगत दरों को लेकर आक्रामक रुख की उम्मीदें बनी हुई हैं, फिर भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और बढ़ते यील्ड अंतर के सामने येन का संभलना बेहद कठिन साबित हो रहा है। इसके अलावा मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की तरफ आकर्षित किया है, जिससे डॉलर को दोहरा समर्थन मिल रहा है।
दक्षिण कोरियाई बॉन्ड बाजार में सरकारी चेतावनी का असर
एशियाई ऋण बाजार की बात करें तो दक्षिण कोरिया में बॉन्ड प्रतिफल यानी यील्ड वक्र में चौतरफा गिरावट दर्ज की गई है। दक्षिण कोरियाई सरकार द्वारा आपातकालीन बायबैक को लेकर जारी की गई नई चेतावनी के बाद बाजार में बॉन्ड की खरीदारी बढ़ी, जिससे यील्ड नीचे खिसक गई। आंकड़ों के अनुसार 2 वर्षीय बॉन्ड का यील्ड 3.3 आधार अंक घटकर 3.977 प्रतिशत रह गया। इसी प्रकार 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल में 5.4 आधार अंकों की कमी आई और यह 4.402 प्रतिशत पर आ गया। लंबी अवधि के 30 वर्षीय बॉन्ड के प्रतिफल में सबसे बड़ी नरमी देखी गई, जहां 7.5 आधार अंकों की गिरावट के साथ यह 4.509 प्रतिशत पर दर्ज किया गया। सरकार के इस कदम से घरेलू बॉन्ड बाजार में स्थिरता लाने का प्रयास किया जा रहा है, हालांकि विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा एशियाई मुद्राओं की वित्तीय स्थिति को लगातार चुनौतीपूर्ण बनाए हुए है।
कमजोर मुद्रास्फीति आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उबाल
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी PCE मुद्रास्फीति के नरम आंकड़ों ने अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। इसके बावजूद वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भविष्य में महंगाई दोबारा भड़कने का खतरा मंडरा रहा है। इसी आशंका के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई है। बॉन्ड बाजार में ऊंचा प्रतिफल निवेशकों को डॉलर रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे अन्य संपत्तियों से नकदी निकलकर डॉलर में जा रही है। मजबूत डॉलर और ऊंचे बॉन्ड यील्ड का दोहरा झटका उन सभी परिसंपत्तियों पर पड़ रहा है जो कोई ब्याज नहीं देती हैं।
सोने और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सुस्त रफ्तार
कमोडिटी बाजार में सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना डॉलर की भारी मांग के कारण अपनी बढ़त गंवाता दिख रहा है। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचा जरूर, लेकिन वह इस बढ़त को बरकरार नहीं रख सका और दिन के स्तरों पर लगभग बिना किसी बदलाव के कारोबार करता नजर आया। अमेरिका में मुद्रास्फीति के नरम आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई छूने की प्रवृत्ति ने गैर-उपज वाले सोने की चमक फीकी कर दी है। उधर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी अमेरिकी डॉलर के बुलिश रुख के सामने बेबस नजर आ रहा है। AUD/USD जोड़ी एशियाई सत्र के दौरान दो महीने के निचले स्तर के करीब 0.6900 के मध्य दायरे में स्थिर रही। अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जो पिछले महीनों की तुलना में भारी गिरावट दर्शाता है, हालांकि इसका ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर असर सीमित ही रहा।
यूरो में ऐतिहासिक गिरावट और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
यूरोपीय मुद्रा यूरो पर भी अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व का भारी असर पड़ा है। EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी लुढ़ककर 1.1312 पर आ गई, जो जनवरी में दर्ज 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरो में आई यह तीव्र गिरावट डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप के ऊर्जा संकट से जुड़ी चिंताओं का मिला-जुला नतीजा है। हालांकि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति से जुड़ा कोई नया झटका यूरोपीय सेंट्रल बैंक को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर सकता है, जो यूरो के लिए जीवनदान का काम कर सकता है। वहीं डिजिटल एसेट बाजार में हाइपरलिक्विड यानी HYPE टोकन में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया। संस्थागत निवेशकों की मांग कमजोर पड़ने और बुधवार को 50 लाख डॉलर की पूंजी निकासी होने से बाजार धारणा प्रभावित हुई है। तकनीकी तौर पर HYPE की कीमत 90 डॉलर के नीचे सीमित बनी हुई है, जिससे अल्पावधि में इसका रुख मिला-जुला नजर आ रहा है।

















