वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में एक साथ कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के तरलता विस्तार से जुड़े अप्रत्याशित नीतिगत फैसले ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों, कीमती धातुओं और डिजिटल एसेट सेक्टर में जोरदार तेजी ला दी है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया ने वर्ष 2027 के लिए अपने दीर्घकालिक बजटीय खाके को सार्वजनिक कर दिया है। इंडोनेशियाई सरकार ने आने वाले वर्षों में अपने राजकोषीय घाटे को कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ राजस्व संग्रह से जुड़े अनुमानों को लेकर सतर्क और संशयवादी रुख अपना रहे हैं।
इंडोनेशिया का वर्ष 2027 बजटीय खाका और राजकोषीय चुनौतियां
इंडोनेशिया की सरकार ने वर्ष 2027 के लिए अपने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2.4 प्रतिशत तक सीमित करने का आधिकारिक लक्ष्य तय किया है। यह कदम वर्ष 2026 के लिए निर्धारित 2.9 प्रतिशत के घाटे के लक्ष्य की तुलना में अधिक सख्त और अनुशासित राजकोषीय रुख को प्रदर्शित करता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान स्टैंडर्ड चार्टर्ड के वरिष्ठ अर्थशास्त्री आल्डीयन तालोपुत्रा ने इस बजटीय योजना का बारीक विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया है कि बैंक का अपना पूर्वानुमान वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटा 2.9 प्रतिशत रहने का ही बना हुआ है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड का मानना है कि इंडोनेशियाई प्रशासन द्वारा राजस्व संग्रह को लेकर लगाए गए अनुमान अत्यधिक महत्वाकांक्षी हैं और कर प्राप्ति में संभावित कमी आ सकती है।
इंडोनेशियाई बजट विवरणों के अनुसार, सरकार ने वर्ष 2026 में कर राजस्व संग्रह में 21 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके तुरंत बाद वर्ष 2027 में भी 12 प्रतिशत की लगातार दूसरे वर्ष दोहरे अंकों की कर राजस्व वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। आल्डीयन तालोपुत्रा का कहना है कि लगातार दो वर्षों तक दोहरे अंकों में कर राजस्व वृद्धि हासिल करना वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में बेहद चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है। इसके बावजूद, स्टैंडर्ड चार्टर्ड का अनुमान है कि राजकोषीय बफर में कमी आने के बाद भी इंडोनेशिया का राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की वैधानिक सीमा के सुरक्षित दायरे में ही बना रहेगा।
इंडोनेशिया की राजकोषीय नीति का प्राथमिक ध्यान देश के चार मुख्य बुनियादी क्षेत्रों को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा, जिनमें खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा क्षेत्र, शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय रक्षा तैयारियां शामिल हैं। इसके साथ ही, इंडोनेशियाई सरकार राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों (SOE) की संपत्तियों के पुनर्गठन और प्राथमिकता वाले डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण उद्योगों तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने की व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, आधिकारिक घाटे के लक्ष्य को छोटा किए जाने के बावजूद वर्ष 2027 में इंडोनेशिया की कुल उधारी और वित्तपोषण आवश्यकताएं बड़ी बनी रहेंगी। इसका मुख्य कारण इस अवधि के दौरान पुराने सरकारी ऋणों की परिपक्वता (डेब्ट मैच्योरिटी) का उच्च स्तर होना है, जिसके चलते सरकार को पुनर्वित्तपोषण की बड़ी जरूरतों को पूरा करना होगा।
अमेरिकी ट्रेजरी के तरलता कदम से डॉलर में चौतरफा गिरावट
वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक मोर्चे पर, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा और चौंकाने वाला नीतिगत कदम उठाया है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने निर्धारित नियमित कैलेंडर से अलग हटकर एक आधिकारिक अपडेट जारी किया। इस फैसले के तहत, ट्रेजरी विभाग ने दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड की पुनर्खरीद (बायबैक) के माध्यम से बाजार में दी जाने वाली तरलता सहायता के आकार को दोगुना करने का निर्णय लिया है। यह विस्तार मुख्य रूप से 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड क्षेत्रों पर लागू होगा।
नई व्यवस्था के तहत, प्रति ऑपरेशन अधिकतम 2 बिलियन डॉलर की मौजूदा बायबैक सीमा को बढ़ाकर कम से कम 4 बिलियन डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। यह नया तरलता सहायता कार्यक्रम 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ाने और प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद को दोगुना करने के इस निर्णय से अमेरिकी डॉलर (USD) पर भारी दबाव पड़ा है। डॉलर में आई इस तेज गिरावट ने दुनिया भर की अन्य प्रमुख मुद्राओं, कीमती धातुओं और क्रिप्टो परिसंपत्तियों को मजबूत उछाल दर्ज करने का अवसर प्रदान किया है।
विदेशी मुद्रा बाजार: पाउंड और यूरो में डॉलर के मुकाबले तेजी
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का सीधा असर विदेशी मुद्रा (FX) बाजार पर दिखाई दिया है, जहां कई प्रमुख मुद्राओं ने डॉलर के मुकाबले मजबूत बढ़त दर्ज की है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) ने अपने साप्ताहिक लाभ के सिलसिले को जारी रखते हुए फरवरी के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छू लिया और 1.3650 के स्तर के ऊपर कारोबार करने लगा। ब्रिटेन के निराशाजनक रिटेल सेल्स आंकड़ों के बावजूद, हाल ही में जारी हुए मजबूत परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों ने पाउंड स्टर्लिंग को मजबूत समर्थन दिया है, जिससे करेंसी पेअर में तेजी बनी हुई है।
इसी क्रम में, यूरो (EUR/USD) ने भी शुक्रवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अपनी तेजी को बरकरार रखा और 1.1700 के स्तर से ऊपर मजबूती से टिका रहा। हालांकि जर्मनी और पूरे यूरोज़ोन क्षेत्र से आए PMI आंकड़े मिश्रित रहे थे, लेकिन अमेरिकी डॉलर में बनी चौतरफा कमजोरी ने यूरो को अपनी तेजी बनाए रखने में मदद की। इस बीच, वित्तीय बाजार के निवेशक एसएंडपी ग्लोबल (एसएंडपी ग्लोबल) द्वारा जारी किए जाने वाले अमेरिका के प्रारंभिक अगस्त PMI आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिका की आर्थिक गतिविधियों में मामूली सुस्ती देखने को मिल सकती है, जहां मैन्युफैक्चरिंग PMI जुलाई के 53.9 से घटकर 53.8 रहने और सर्विसेज PMI जुलाई के 54.6 से गिरकर 54.0 रहने की संभावना है।
कमोडिटीज और क्रिप्टोकरेंसी: सोना $4,600 के करीब, बिटकॉइन $77,000 के पार
अमेरिकी डॉलर में आई नरमी का बड़ा फायदा कमोडिटी बाजार को मिला है, जहां सोने की कीमतों में शुक्रवार को तेजी का रुख रहा। सर्राफा बाजार के निवेशक सोने के भाव को $4,600 के महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर की ओर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, जो पिछले छह महीनों की ट्रेडिंग रेंज का ऊपरी दायरा रहा है। कीमती धातुओं में यह तेजी अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा दीर्घकालिक सिक्योरिटीज की पुनर्खरीद योजना के बाद डॉलर में आई तेज बिकवाली से संचालित हो रही है।
दूसरी ओर, डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी शुक्रवार को चौतरफा तेजी का माहौल देखा गया, जिसकी अगुवाई बिटकॉइन (BTC) ने की। बिटकॉइन की कीमत में जोरदार उछाल आया और यह $77,000 के स्तर को पार कर गई। बिटकॉइन के इस सकारात्मक रुख का असर अन्य ऑल्टकॉइन्स पर भी पड़ा, जहां एथेरियम (ETH) $2,400 के करीब और रिपल (XRP) $1.35 के आसपास मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया।



















