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राजस्थान के टोंक में साइबर ठगी का भंडाफोड़, 30 लाख रुपये ऐंठने वाले 7 जालसाज गिरफ्तारराजस्थान
20 अग॰ 2026, 10:18 am (56 मिनट पहले)· 4

राजस्थान के टोंक में साइबर ठगी का भंडाफोड़, 30 लाख रुपये ऐंठने वाले 7 जालसाज गिरफ्तार

राजस्थान के टोंक जिले में जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने कार्रवाई करते हुए 30 लाख रुपये की साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया है और निवाई तथा टोंक सदर से 7 आरोपियों को दबोचा है।

राजस्थान के टोंक जिले में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा और प्रभावी अभियान चलाकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) के प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी के नेतृत्व में पुलिस की विशेष टीम ने निवाई और टोंक सदर थाना क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी करते हुए साइबर अपराध में शामिल 7 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच-पड़ताल के दौरान पुलिस के सामने लगभग 30 लाख रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का पर्दाफाश हुआ है। इस व्यापक कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में संदिग्ध डिजिटल और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें 11 मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री शामिल है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई गुप्त सूचनाओं और तकनीकी निगरानी से मिले ठोस इनपुट के आधार पर की गई है।

सोशल मीडिया पर फर्जी इन्वेस्टमेंट लिंक भेजकर बनाते थे शिकार

जांच अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी बेहद ही योजनाबद्ध तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए आम नागरिकों को अपना शिकार बनाते थे। आरोपी अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी खाते बनाकर लोगों से संवाद स्थापित करते थे और फिर उन्हें आकर्षक रिटर्न देने वाले फर्जी इन्वेस्टमेंट लिंक भेजा करते थे। इन लिंक के माध्यम से लोगों को बेहद कम समय में उनकी लगाई गई पूंजी पर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। जब भी कोई नागरिक आरोपियों के लुभावने दावों के झांसे में आकर उनके बताए गए बैंक खातों या यूपीआई आईडी में पैसे जमा करवा देता था, आरोपी तुरंत उस रकम को हड़प लेते थे। पैसे जमा होने के बाद पीड़ित से संपर्क काट लिया जाता था। फिलहाल पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी हुई है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने लोगों को चूना लगाया है और ठगी की रकम को किन-किन अलग-अलग खातों में किस प्रकार ट्रांसफर किया गया था।

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205 फर्जी सिम कार्ड और 45 एनसीआर शिकायतों का हुआ पर्दाफाश

डीएसटी की जांच के दौरान इस गिरोह के काम करने के तरीके से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। पुलिस पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने इस पूरे अवैध कारोबार को संचालित करने के लिए कुल 205 फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन फर्जी सिम कार्ड्स का उपयोग साइबर ठगी के उद्देश्य से लोगों से संपर्क साधने, मैसेज भेजने और अलग-अलग संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था। इसके अलावा, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग (एनसीआर) पोर्टल पर भी इन आरोपियों के खिलाफ पहले से ही 45 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी पुलिस के हाथ लगी है। टोंक पुलिस अब एनसीआर पोर्टल पर दर्ज इन सभी 45 शिकायतों और गिरफ्तार आरोपियों के बीच के आपसी संबंधों की गहराई से जांच कर रही है ताकि पीड़ितों को राहत दिलाई जा सके।

तीन एफआईआर दर्ज, टोंक और निवाई में नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस

कानूनी कार्रवाई के तहत पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। पुलिस प्रशासन ने निवाई थाने में 6 आरोपियों के खिलाफ 2 अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं, वहीं टोंक सदर थाना क्षेत्र में 1 आरोपी के खिलाफ 1 मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। डीएसटी प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी के मार्गदर्शन में पुलिस की टीम आरोपियों से बरामद 11 मोबाइल फोन और वित्तीय कागजातों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान साइबर अपराध के कई अन्य मामलों का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है। डीएसटी की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई के बाद से जिले भर में सक्रिय साइबर ठगों और उनके सहयोगियों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, फर्जी मोबाइल नंबरों, सोशल मीडिया प्रोफाइल और वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी को खंगाल रही है ताकि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों को भी जल्द से जल्द शिकंजे में लिया जा सके।

सवाल-जवाब

टोंक में डीएसटी ने साइबर ठगी मामले में कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस की जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने टोंक जिले के निवाई और टोंक सदर थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस साइबर ठगी गिरोह ने लगभग कितने रुपये का फ्रॉड किया था?
प्रारंभिक जांच-पड़ताल के अनुसार, आरोपियों द्वारा लगभग 30 लाख रुपये की साइबर ठगी करने का खुलासा हुआ है।
आरोपी लोगों को किस प्रकार अपनी ठगी का शिकार बनाते थे?
आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों से संपर्क साधते थे और उन्हें फर्जी इन्वेस्टमेंट लिंक भेजकर कम समय में मोटी रकम कमाने का लालच देकर ठगी करते थे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या-क्या सामग्री बरामद की है?
पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक तथा 205 फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं।
आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कहां-कहां मामले दर्ज किए हैं?
पुलिस ने निवाई थाने में 6 आरोपियों के खिलाफ 2 अलग-अलग मामले और टोंक सदर थाने में 1 आरोपी के खिलाफ 1 मामला दर्ज किया है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 मिनट पहले

इस गिरोह के पास से 205 फर्जी सिम कार्ड और एनसीआर पोर्टल पर पहले से दर्ज 45 शिकायतें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि ये किसी बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस को अब यह पता लगाना चाहिए कि ये फर्जी सिम कहां से एक्टिवेट किए गए थे और क्या इस अवैध नेटवर्क में बैंक या टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े किसी अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता है या नहीं।

Rohan Verma@rohan-verma·39 मिनट पहले

यह मामला डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब एक छोटे से जिले में 205 फर्जी सिम कार्ड और 45 एनसीआर शिकायतें मिलती हैं, तो यह स्थानीय स्तर पर चल रहे बड़े संगठित अपराध का प्रमाण है। जांच एजेंसियों को यह भी खंगालना होगा कि इन सिम कार्ड्स के सत्यापन में कहां चूक हुई और क्या अन्य राज्यों के साइबर गिरोह भी इनसे जुड़े हैं।

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