वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव गहराने से यूरो मजबूती के नए रिकॉर्ड बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में EUR/USD मुद्रा जोड़ी बढ़त दर्ज करते हुए 1.1710 के तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। दैनिक ट्रेडिंग चार्ट पर यह जोड़ी 1.1703 के आसपास बनी हुई है, जो इसके 20-अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 1.1561 से काफी ऊपर है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY), जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मूल्य को मापता है, 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.67 के करीब कारोबार कर रहा है। इससे एक दिन पहले डॉलर इंडेक्स ने 98.56 का नया तीन महीने का निचला स्तर छुआ था। मुद्रा हीटमैप के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर को सबसे ज्यादा नुकसान ऑस्ट्रेलियन डॉलर के मुकाबले उठाना पड़ा है।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा कदम और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
अमेरिकी डॉलर पर इस समय सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के उस अप्रत्याशित निर्णय से आया है, जिसमें उसने सरकारी बॉन्ड की पुनर्खरीद (बायबैक) बढ़ाने की घोषणा की है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर जारी सूचना के अनुसार, ट्रेजरी विभाग ने 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले दीर्घकालिक बॉन्ड की लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक सीमा को दोगुना करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक चलेगी। इस कदम से बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ेगी, जिससे डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर पड़ने से भी ग्रीनबैक पर असर पड़ा है। कॉमर्जबैंक (Commerzbank) के विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष समाप्त होने के बाद डॉलर पर नए सिरे से दबाव बन सकता है। कॉमर्जबैंक का कहना है कि बाजार इस समय फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि को लेकर जो उम्मीदें लगा रहा है, वे पूरी होने की संभावना कम है। इसके बजाय, राजनीतिक दबाव के कारण फेडरल रिजर्व वर्ष 2027 में एक बार फिर ब्याज दरों में तीव्र और अत्यधिक कटौती का रुख अपना सकता है। विश्लेषकों ने यह भी रेखांकित किया कि क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity) के आधार पर अमेरिकी डॉलर काफी ओवरवैल्यूड है, जिसके कारण मध्यम अवधि में इसके नीचे जाने का जोखिम बना हुआ है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की रणनीति और यूरोज़ोन के आर्थिक आंकड़े
अमेरिकी डॉलर की गिरावट का सबसे बड़ा लाभ यूरो को मिला है। डीबीएस (DBS) के विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर में आई कमजोरी का मुख्य लाभार्थी यूरो रहा है, जिससे EUR/USD 1.1700 के स्तर की ओर तेजी से बढ़ा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की व्यापक संभावना जताई जा रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसके अलावा, यूरोज़ोन के हालिया मुद्रास्फीति आंकड़ों ने भी यूरो की अपील को मजबूती दी है। यूरोज़ोन का जुलाई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बाजार के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप रहा, जिसमें हेडलाइन मुद्रास्फीति 2.9 प्रतिशत वार्षिक और कोर मुद्रास्फीति 2.5 प्रतिशत वार्षिक दर्ज की गई। जर्मनी और यूरोज़ोन से आए मिश्रित PMI आंकड़ों के बावजूद यूरोपीय सत्र के दौरान यूरो ने अपनी बढ़त बनाए रखी।
EUR/USD का तकनीकी विश्लेषण और भविष्य के लक्ष्य
तकनीकी चार्ट पर EUR/USD का रुख काफी मजबूत नजर आ रहा है। 1.1703 के स्तर पर कारोबार कर रही यह जोड़ी 1.1561 के 20-दिवसीय EMA से ऊपर बनी हुई है, जो बाजार के लिए एक मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 74.8 के स्तर पर पहुंच गया है, जो ओवरबॉट क्षेत्र में जाने का संकेत देता है। इसका मतलब है कि यद्यपि खरीदार पूरी तरह से नियंत्रण में हैं, लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में कुछ समय के लिए ठहराव या छोटा करेक्शन देखने को मिल सकता है।
नीचे की ओर, EUR/USD के लिए पहला सपोर्ट 1.1703 के हालिया पिवट स्तर पर है, जिसके बाद 1.1561 का 20-दिवसीय EMA एक मजबूत ढांचागत फ्लोर के रूप में काम करेगा। यदि तेजी का रुझान जारी रहता है, तो EUR/USD मई के उच्चतम स्तर 1.1800 की ओर बढ़ सकता है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, RSI 72 पर ओवरबॉट है और ADX 34 पर एक मजबूत ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है, जबकि Bollinger Bands 1.14 से 1.17 की सीमा दिखाते हैं।
पाउंड, गोल्ड और क्रिप्टो बाजार में भी दिखी तेजी
अमेरिकी डॉलर की सर्वव्यापी कमजोरी का असर अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी साफ देखा गया है। ब्रिटेन के सकारात्मक PMI आंकड़ों के समर्थन से GBP/USD फरवरी के बाद के अपने उच्चतम स्तर 1.3650 के पार निकल गया है, हालांकि यूके के खुदरा बिक्री के आंकड़े निराशाजनक रहे थे। वहीं, कीमती धातुओं में भी जोरदार लिवाली देखी गई। सोना (XAU/USD) तेजी के साथ $4,600 के प्रतिरोध क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, जो पिछले छह महीनों की ट्रेडिंग रेंज का ऊपरी सिरा है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी का माहौल बना हुआ है। बिटकॉइन (BTC) $77,000 के ऊपर निकल गया है, जिसका असर अन्य आल्टकॉइन्स पर भी पड़ा है। एथेरियम (ETH) $2,400 के करीब और रिपल (XRP) $1.35 के आसपास कारोबार कर रहे हैं। अब निवेशकों की निगाहें S&P Global द्वारा जारी किए जाने वाले अगस्त के अमेरिकी Purchasing Managers' Indices (PMIs) के प्रारंभिक आंकड़ों पर टिकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग PMI मामूली रूप से घटकर 53.8 (जुलाई में 53.9) और सर्विसेज PMI घटकर 54.0 (जुलाई में 54.6) रह सकती है।
अमेरिकी डॉलर का वैश्विक इतिहास और फेड की मौद्रिक प्रणाली
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में समानांतर मुद्रा के रूप में चलन में है। 2022 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा बाजार के कुल कारोबार में डॉलर की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है, जहां रोजाना औसतन $6.6 ट्रिलियन का लेनदेन होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड को पीछे छोड़कर दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी का दर्जा हासिल किया था। 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते से पहले तक अमेरिकी डॉलर का मूल्य सोने से जुड़ा हुआ था।
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को नियंत्रित करने में फेडरल रिजर्व (Fed) की मौद्रिक नीति सबसे अहम भूमिका निभाती है। फेड के दो मुख्य जनादेश हैं, मूल्य स्थिरता (2 प्रतिशत मुद्रास्फीति लक्ष्य) और पूर्ण रोजगार सुनिश्चित करना। जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जाने लगती है, तो फेड ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति घटती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो दरें घटाई जाती हैं, जिससे डॉलर कमजोर होता है। चरम स्थितियों में फेड क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) के जरिए नए डॉलर छापकर बॉन्ड खरीदता है, जैसा 2008 के वित्तीय संकट के दौरान किया गया था। QE से डॉलर कमजोर होता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) के तहत बॉन्ड पुनर्खरीद रोक दी जाती है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।



















