बारिश के बाद फैलने वाली सोंधी मिट्टी की गंध अक्सर हर किसी को पसंद आती है, लेकिन अगर यही खुशबू बिना मौसम और बिना बारिश के आपके घर के कमरों में महसूस होने लगे तो सतर्क होने की जरूरत है। अक्सर लोग इसे कमरे की एक सामान्य या सुखद महक समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि असल में यह घर के भीतर बढ़ती नमी और सीलन का शुरुआती संकेत हो सकता है। मानसून के मौसम में यह स्थिति और भी ज्यादा देखने को मिलती है। जब घर के किसी कोने, दीवार या गमले में नमी जमा होने लगती है, तो वहां से बारिश जैसी गंध निकलने लगती है। समय रहते इस गंध के वास्तविक कारण को पहचानना बहुत जरूरी है ताकि घर के ढांचे को किसी बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
इंडोर प्लांट्स और गमलों की अति-सिंचाई
अगर आपने अपने घर के अंदर या बालकोनी में कई तरह के पौधे लगा रखे हैं, तो अचानक आने वाली मिट्टी की खुशबू का सबसे पहला स्रोत वही गमले हो सकते हैं। पौधों में लगातार पानी देने या गमले में पानी रुकने के कारण मिट्टी लंबे समय तक अत्यधिक गीली बनी रहती है। जब गमले की मिट्टी लंबे समय तक सूख नहीं पाती, तो उसमें से सोंधी मिट्टी जैसी तेज महक उठने लगती है। इसके अलावा कई बार गमलों के नीचे रखी जाने वाली जल-निकासी ट्रे में जमा हुआ स्थिर पानी भी इस तरह की गंध का कारण बनता है। पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी देने से न केवल घर में गंध फैलती है, बल्कि पौधों की जड़ें भी सड़ने लगती हैं। इसलिए गमले की ऊपरी मिट्टी को सूखने का पर्याप्त समय देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जल-निकासी का छेद पूरी तरह खुला हो।
दीवारों में छिपी सीलन और प्लास्टर का खराब होना
अगर मिट्टी जैसी यह खुशबू घर के किसी खास कमरे या दीवार के नजदीक पहुंचने पर ज्यादा महसूस होती है, तो वहां सीलन की जांच करना बेहद आवश्यक है। दीवारों पर हल्के पीले या काले धब्बे बनना, पेंट का अचानक फूलने लगना, प्लास्टर का झड़ना या छूने पर दीवार का नम महसूस होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दीवार के अंदर पानी या नमी जमा हो रही है। कई बार सीलन शुरुआत में बाहर से बिल्कुल दिखाई नहीं देती, लेकिन कमरा बंद रहने पर उसमें से मिट्टी या नमी जैसी बंद महक आने लगती है। ऐसी स्थिति में केवल रूम फ्रेशनर या परफ्यूम का छिड़काव कर देने से समस्या खत्म नहीं होती। गंध को दबाने के बजाय उस नमी के मुख्य स्रोत को खोजना और उसे ठीक कराना जरूरी होता है।
कम हवा और धूप वाले बंद कोनों की नमी
घर के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है जहां ताजी हवा और प्राकृतिक धूप की पहुंच बहुत कम होती है। बरसात या अत्यधिक नमी वाले दिनों में इन जगहों पर नमी आसानी से जम जाती है। इसके परिणामस्वरूप फर्श, दीवारों या लकड़ी के पुराने फर्नीचर की सतहों से एक अलग तरह की सोंधी और नम गंध निकलने लगती है। इसके अलावा लंबे समय से बंद पड़े स्टोर रूम, जूते रखने की जगह या भारी अलमारियों के पीछे का हिस्सा नमी और धूल का बड़ा केंद्र बन जाता है। यदि इन जगहों पर नियमित सफाई नहीं होती है, तो वहां हवा का प्रवाह रुक जाता है और मिट्टी जैसी गंध पूरे घर में फैलने लगती है।
नालियों और ड्रेन पाइप में जमा गंदगी
रसोई, बाथरूम या बालकनी के ड्रेन पाइप में कचरा और गंदगी जमा होना भी इस समस्या की एक बड़ी वजह बन सकता है। नालियों में जमा होने वाला जैविक कचरा और नमी मिलकर घर के वातावरण में अजीब सी नम गंध फैला देते हैं। जब ड्रेन में पानी का बहाव धीमा हो जाता है या गंदगी सड़ने लगती है, तो उसकी गंध कमरों तक आ जाती है। इसके समाधान के लिए घर में हवा का बेहतर वेंटिलेशन बनाए रखना बेहद जरूरी है। दिन के समय कुछ घंटों के लिए खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें ताकि ताजी हवा आ सके और कमरों में जमा नमी बाहर निकल सके। गीले स्थानों को तुरंत सुखाने का प्रयास करना चाहिए।
कब लें इसे गंभीरता से और क्या उपाय अपनाएं
यदि घर में मिट्टी की गंध लगातार बनी रहती है, दिन-ब-दिन और ज्यादा तेज होती जाती है, या फिर दीवारों पर फफूंद के निशान साफ दिखाई देने लगते हैं, तो इसे केवल एक खुशबू मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। मानसून के समय में सीलन की एक छोटी सी अनदेखी आगे चलकर घर की दीवारों, पेंट और नींव को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। जब भी घर के अंदर अचानक ऐसी महक महसूस हो, तो तुरंत गमलों की मिट्टी, कमरे की दीवारों, ड्रेन पाइप और घर के अंधेरे कोनों का निरीक्षण करें। अगर समस्या घर के अंदरूनी पाइप में रिसाव या दीवारों की गहरी सीलन से जुड़ी है, तो किसी पेशेवर तकनीशियन की मदद लेकर मरम्मत कराना ही सबसे बेहतर कदम होता है।



















