अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान स्विस फ्रैंक की चाल सुस्त पड़ गई, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले दो कारोबारी दिनों से जारी इसकी बढ़त थम गई। भू-राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ती अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की घटती क्षमता के चलते निवेशकों का रुख सुरक्षित संपत्तियों की ओर मुड़ा है। इस बदलते माहौल में यूएसडी/सीएचएफ मुद्रा जोड़ी ने निचले स्तरों से शानदार वापसी करते हुए 0.8325 के स्तर को छू लिया। सत्र की शुरुआत में यह जोड़ी 0.8290 के निचले स्तर तक लुढ़क गई थी, लेकिन डॉलर में आई मांग के कारण यह एक सप्ताह के अपने उच्च स्तर यानी 0.8345 के दायरे के करीब पहुंच गई।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा बाजार का बदलता परिदृश्य
वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने भी मुद्रा बाजार के समीकरणों को प्रभावित किया है। मध्य पूर्व के क्षेत्र में तनाव लगातार गहराने की खबरों के कारण तेल की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ ही घंटे पहले घोषित ऊर्जा संघर्ष विराम समझौते के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस समझौते की घोषणा के तुरंत बाद रूस द्वारा यूक्रेन के कई बिजली संयंत्रों पर किए गए नए हमलों ने स्थिति को और अधिक उलझा दिया है। इन हमलों के चलते संघर्ष विराम समझौते के विफल होने की प्रबल आशंका पैदा हो गई है, जिससे बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है।
एशियाई कारोबारी सत्र की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव फिसलकर 100.66 डॉलर के निचले स्तर तक चला गया था। हालांकि, इसके बाद कीमतों ने भारी सुधार दर्ज किया और यह नुकसान की भरपाई करते हुए 103.50 डॉलर के स्तर के आसपास लौट आया। कच्चे तेल के दामों में इस तरह के उछाल से स्विट्जरलैंड जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। ऊर्जा लागत में अचानक वृद्धि से न केवल स्विट्जरलैंड की आयात लागत बढ़ती है, बल्कि निवेशकों के बीच बाजार में जोखिम उठाने का उत्साह भी कमजोर पड़ जाता है, जिसका सीधा असर स्विस मुद्रा के प्रदर्शन पर दिखाई दिया।
सीमित कारोबारी दायरे और छुट्टियों का असर
यूरोपीय व्यापारिक सत्र काफी हद तक शांत रहा, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा। इस सतर्कता ने अमेरिकी डॉलर को उल्लेखनीय सहारा प्रदान किया। हालांकि, अधिकांश डॉलर से जुड़ी मुद्रा जोड़ियां अपने पिछले कारोबारी दायरों के भीतर ही सीमित रहीं। इस सुस्ती का मुख्य कारण वैश्विक बाजारों में कम लिक्विडिटी और कारोबारी मात्रा का बेहद सीमित होना रहा। जापान में स्थानीय बैंक अवकाश के कारण बाजार बंद रहे, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में कोलंबस डे के सार्वजनिक अवकाश की वजह से वित्तीय बाजारों में गतिविधियां काफी धीमी गति से चलती रहीं।
सुरक्षित निवेश के रूप में स्विस फ्रैंक की वैश्विक भूमिका
स्विस फ्रैंक आधिकारिक रूप से स्विट्जरलैंड की राष्ट्रीय मुद्रा है और यह दुनिया की शीर्ष दस सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में शामिल है। वैश्विक स्तर पर इसका कारोबारी वॉल्यूम इतना बड़ा है कि वह स्विट्जरलैंड की पूरी अर्थव्यवस्था के आकार को भी पीछे छोड़ देता है। विदेशी मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक की कीमत मुख्य रूप से समग्र बाजार धारणा, देश की आर्थिक सेहत और स्विस नेशनल बैंक द्वारा उठाए गए मौद्रिक कदमों से तय होती है।
वित्तीय हलकों में स्विस फ्रैंक को एक मजबूत सुरक्षित निवेश विकल्प यानी सेफ हेवन संपत्ति माना जाता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक या राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक अपनी पूंजी बचाने के लिए स्विस फ्रैंक की तरफ रुख करते हैं। स्विट्जरलैंड की वैश्विक पहचान, उसकी बेहद स्थिर अर्थव्यवस्था, मजबूत निर्यात क्षेत्र, केंद्रीय बैंक के भारी विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में तटस्थ रहने की ऐतिहासिक नीति इस मुद्रा को संकट के समय निवेशकों की पहली पसंद बनाती है। जब भी विश्व भर में उथल-पुथल होती है, तो अधिक जोखिम वाली अन्य मुद्राओं के मुकाबले स्विस फ्रैंक का मूल्य सामान्यतः बढ़ जाता है।
स्विस नेशनल बैंक की मौद्रिक नीति और यूरो का गहरा प्रभाव
स्विट्जरलैंड की मौद्रिक दिशा तय करने वाला स्विस नेशनल बैंक साल में केवल चार बार यानी हर तिमाही में एक बार अपनी नीतिगत बैठक आयोजित करता है, जो अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में कम है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य वार्षिक मुद्रास्फीति की दर को 2 प्रतिशत से नीचे बनाए रखना है। जब भी महंगाई दर इस निर्धारित लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है या भविष्य में इसके बढ़ने की संभावना होती है, तो बैंक अपनी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करके कीमतों पर लगाम लगाने का प्रयास करता है। उच्च ब्याज दरें आम तौर पर स्विस फ्रैंक के लिए फायदेमंद होती हैं, क्योंकि इससे बेहतर यील्ड मिलती है और विदेशी निवेशक देश में निवेश करने के लिए आकर्षित होते हैं। इसके विपरीत, ब्याज दरों में कटौती से स्विस फ्रैंक कमजोर पड़ता है।
वर्ष 2011 से 2015 के बीच स्विस फ्रैंक को यूरो के साथ एक निश्चित विनिमय दर पर बांधकर रखा गया था। वर्ष 2015 में इस पेग को अचानक हटा दिया गया, जिसके तुरंत बाद फ्रैंक के मूल्य में 20 प्रतिशत से अधिक की अप्रत्याशित छलांग लगी और वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी हलचल मच गई थी। हालांकि अब यह निश्चित पेग प्रभावी नहीं है, फिर भी स्विस फ्रैंक का भाग्य यूरो के उतार-चढ़ाव से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है। स्विट्जरलैंड पड़ोसी यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक निर्भर है। कुछ आर्थिक मॉडलों के अनुसार, यूरो और स्विस फ्रैंक के बीच का सह-संबंध 90 प्रतिशत से भी अधिक है, जो लगभग पूर्ण निर्भरता को दर्शाता है।
मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों का असर और अन्य मुद्राओं का हाल
स्विट्जरलैंड एक खुली और छोटी अर्थव्यवस्था होने के नाते यूरोपीय संघ को अपना सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और राजनीतिक सहयोगी मानता है। इसलिए यूरोज़ोन में मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता स्विस अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्विट्जरलैंड के घरेलू आर्थिक आंकड़े भी फ्रैंक के मूल्यांकन को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं। देश में आर्थिक विकास, महंगाई, चालू खाता और केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार में होने वाले बदलाव सीधे तौर पर मुद्रा में उतार-चढ़ाव लाते हैं। मजबूत विकास दर, कम बेरोजगारी और बेहतर कारोबारी विश्वास फ्रैंक को मजबूती देते हैं, जबकि आर्थिक सुस्ती के संकेतों से इसमें गिरावट आती है।
सोमवार को अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों में भी मिला-जुला रुझान देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र में 0.7000 के नीचे बना रहा, जहां ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती संभावनाओं ने बढ़त को सीमित किया। उधर यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) 158.00 के पार कारोबार करता रहा, जहां जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए संभावित हस्तक्षेप की अटकलों के बीच निवेशक सतर्क रहे। सोने की कीमतों में भी एक सप्ताह के उच्च स्तर से गिरावट आई और शुरुआती यूरोपीय सत्र में यह 4,170 डॉलर प्रति औंस के नए दैनिक निचले स्तर तक फिसल गया, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख ने गैर-ब्याज वाली पीली धातु पर दबाव बनाए रखा।
डिजिटल एसेट बाजार में पाई नेटवर्क (PI) भारी बिकवाली दबाव में दिखा और 0.0800 डॉलर के समर्थन स्तर के पास लाल निशान में कारोबार करता रहा। ओपन इंटरेस्ट 9 मिलियन डॉलर से नीचे गिरने के कारण इसमें तकनीकी मंदी का जोखिम बना हुआ है। वहीं घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ खुला और 95.80 के करीब संभलता दिखा। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए नए कदमों ने भारतीय मुद्रा को राहत प्रदान की है।


















