वैश्विक वित्तीय बाज़ार वर्तमान में कई मोर्चों पर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, जहाँ भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति के बदलते आंकड़े और केंद्रीय बैंकों की रणनीतियां निवेशकों की दिशा तय कर रही हैं। एक तरफ जहाँ मध्य पूर्व में चल रहे कूटनीतिक और सैन्य संघर्षों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले विकल्पों की मांग बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अपनी मौद्रिक नीतियों को लेकर सतर्कता बरत रही हैं। इस जटिल परिदृश्य में, मुद्राओं से लेकर कमोडिटी और क्रिप्टोकरेंसी तक, हर परिसंपत्ति वर्ग में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
बैंक ऑफ जापान की धीमी चाल और आर्थिक चुनौतियां
राबोबैंक के विश्लेषकों ने बैंक ऑफ जापान की वर्तमान मौद्रिक नीतियों का गहन मूल्यांकन किया है। उनका मानना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की धीमी गति के पीछे कई असाधारण झटके ज़िम्मेदार हैं। इनमें व्यापारिक टैरिफ का प्रभाव, वैश्विक युद्ध और घरेलू राजनीति में होने वाले बदलाव प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन बाहरी और आंतरिक दबावों के कारण बैंक ऑफ जापान आक्रामक रूप से नीतियां बदलने से बच रहा है। गवर्नर काज़ुओ उएदा ने अपने बयानों में स्पष्ट किया है कि जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधियों और कीमतों में सुधार होगा, केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत ब्याज दरों में लगातार वृद्धि करेगा और मौद्रिक समायोजन के स्तर को संतुलित करेगा।
गवर्नर उएदा ने जापानी अर्थव्यवस्था पर ऊंचे तेल की कीमतों के कारण पड़ने वाले अस्थायी निराशाजनक प्रभाव का भी ज़िक्र किया है। हालांकि, सरकार द्वारा रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग और AI से संबंधित बढ़ती मांग ने अर्थव्यवस्था को एक बड़ा सहारा दिया है। इन कारकों के संयोजन ने यह सुनिश्चित किया है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और अमेरिका से जुड़े टैरिफ की अनिश्चितताओं के बावजूद जापान का निर्यात और उत्पादन व्यापक रूप से स्थिर बना रहे।
इसके अलावा, मुद्रा बाज़ार में ब्याज दरों का अंतर एकमात्र ऐसा कारक नहीं है जो जापानी येन पर दबाव डाल रहा है। बैंक ऑफ जापान साल 2024 से अपने बॉन्ड खरीद कार्यक्रम (JGB) को धीरे-धीरे कम कर रहा है और अपनी बैलेंस शीट का आकार घटा रहा है। इस कदम ने बाज़ार का ध्यान राजकोषीय जोखिमों और प्रधानमंत्री की विस्तारवादी छवि की ओर केंद्रित कर दिया है। इस स्थिति से संकेत मिलता है कि बाज़ार को अपने बजट के प्रभाव को लेकर सरकार की ओर से अधिक ठोस आश्वासनों की आवश्यकता है।
ब्रिटिश पाउंड और यूरो में ठहराव
मुद्रा बाज़ार के अन्य हिस्सों में, बुधवार के दूसरे पहर में GBP/USD जोड़ी 1.3400 के स्तर से नीचे संघर्ष करती नज़र आई। इसका मुख्य कारण ब्रिटेन के ताज़ा मुद्रास्फीति आंकड़े हैं। जून महीने में ब्रिटेन का वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) ठंडा होकर 2.6 प्रतिशत पर आ गया, जबकि बाज़ार को इसके 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान था। इस गिरावट ने ब्रिटिश पाउंड के लिए रिकवरी की गति हासिल करना बेहद मुश्किल कर दिया है। इसके साथ ही, निवेशक मध्य पूर्व से आ रही हर बड़ी खबर पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं, जिसका असर मुद्रा बाज़ार के जोखिम आकलन पर पड़ रहा है।
दूसरी ओर, EUR/USD की चाल भी बेहद सीमित दायरे में सिमटी हुई है। यह जोड़ी बुधवार को लगभग 1.1400 के आसपास एक संकीर्ण चैनल में कारोबार कर रही है। किसी भी बड़े आर्थिक डेटा के अभाव में, मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव इस जोड़ी की बढ़त को रोक रहा है। अब बाज़ार की नज़रें गुरुवार को होने वाली यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ नई मौद्रिक नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान किया जाएगा।
सोने की रिकॉर्ड दौड़ और कार्डानो की मंदी
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक लगातार बढ़ रही है। सोने ने लगातार चौथे दिन अपनी बढ़त जारी रखी है और यह बिना किसी बाधा के 4,100 डॉलर के स्तर से ऊपर मजबूती से खड़ा है। ईरान में बढ़ते तनाव और तेल की ऊंची कीमतों के कारण बाज़ार में जो जोखिम से बचने का माहौल बना है, उसका सोने पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। इस सप्ताह अब तक सोने की कीमतों में लगभग 2.5 प्रतिशत की शानदार रैली देखी गई है, और यह पिछले तीन महीनों से अधिक समय में अपने सबसे बेहतरीन साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में, कार्डानो (ADA) की स्थिति कमज़ोर बनी हुई है। इस सप्ताह की शुरुआत में जो थोड़ी रिकवरी देखी गई थी, उसे 1.770 डॉलर पर स्थित 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) ने रोक दिया। इसके बाद से ADA की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। वायदा बाज़ार के आंकड़े भी खुदरा निवेशकों की घटती दिलचस्पी की गवाही दे रहे हैं। ओपन इंटरेस्ट और ट्रेडिंग वॉल्यूम दोनों में भारी कमी आई है, जबकि लंबे सौदों के लिक्विडेशन का स्तर बढ़ा हुआ है। तकनीकी दृष्टिकोण से ADA का नज़रिया मंदी का बना हुआ है, क्योंकि 0.1782 डॉलर के पास स्थित एक प्रमुख रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन के नीचे इसकी गति पूरी तरह से सुस्त पड़ चुकी है।
कच्चे तेल में भारी उछाल और एशियाई बाज़ारों की तेज़ी
एशियाई शेयर बाज़ारों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक कोस्पी 4.5 प्रतिशत से अधिक की शानदार बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। इस उछाल का नेतृत्व कोरियाई चिप निर्माता कंपनियाँ कर रही हैं, जिन्हें कल अमेरिकी बाज़ार में वैनएक सेमीकंडक्टर ETF में आई भारी तेज़ी से बड़ा समर्थन मिला है। यह AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेशकों के अटूट विश्वास को दर्शाता है।
इन सबके बीच सबसे ज़्यादा ध्यान कच्चे तेल के बाज़ार ने खींचा है। ऊर्जा बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी का माहौल है, जहाँ WTI क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। लाइव बाज़ार डेटा के अनुसार, कच्चे तेल (CL=F) की मौजूदा कीमत 88.34 डॉलर पर पहुंच गई है, जो पिछले बंद स्तर 86.83 डॉलर के मुकाबले 1.74 प्रतिशत की ठोस बढ़त है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है।
तकनीकी चार्ट पर कच्चे तेल की स्थिति बेहद मज़बूत दिख रही है। 14-दिवसीय RSI इस समय 67 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि बाज़ार में खरीदारी का भारी दबाव है। MACD लाइन (1.20) अपने सिग्नल लाइन (-1.15) से काफी ऊपर है, जो एक स्पष्ट बुलिश हिस्टोग्राम (2.35) का निर्माण कर रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबी अवधि के रुझान में एक शानदार 'गोल्डन क्रॉस' देखा गया है, जहाँ 50-दिवसीय EMA (82.39 डॉलर) ने 200-दिवसीय EMA (75.45 डॉलर) को ऊपर की तरफ पार कर लिया है। मौजूदा कीमत 88.11 डॉलर के पिवट स्तर से ऊपर बनी हुई है, और यदि यह रैली जारी रहती है, तो 88.90 डॉलर और 89.46 डॉलर के रेजिस्टेंस स्तर अगला लक्ष्य बन सकते हैं। कुल मिलाकर, मध्य पूर्व के तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने कच्चे तेल को एक स्पष्ट और मज़बूत अपट्रेंड में ला खड़ा किया है।




















