अंतरराष्ट्रीय बाजार में सर्राफा की कीमतों में गुरुवार को मजबूत रिकवरी देखने को मिली। अमेरिका में थोक महंगाई के आंकड़े अनुमान से काफी ज्यादा आने के बावजूद पीली धातु पर दबाव बनने के बजाय लिवाली का रुख देखने को मिला। उत्पादक मूल्य सूचकांक के अप्रत्याशित रूप से उछलने के बाद अमेरिकी बेंचमार्क ट्रेजरी यील्ड में दस आधार अंकों की गिरावट आई, जिससे अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और गैर-ब्याज वाली संपत्तियों में निवेशकों का भरोसा लौट आया। बाजार में हाजिर सोना मजबूत होकर 4,148 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया और आगे बढ़ते हुए 4,170 डॉलर के दायरे में कारोबार करने लगा। हालिया कारोबारी सत्रों में यह धातु 1.73 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ 4,179 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई, जबकि इसका पिछला बंद भाव 4,108 डॉलर था।
थोक महंगाई के आंकड़ों का बाजार पर वास्तविक असर
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के उत्पादक मूल्य सूचकांक में सालाना आधार पर 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों द्वारा लगाए गए 5.3 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक रहा। ऊर्जा की कीमतों में आए अचानक उछाल ने हेडलाइन पीपीआई को 6 प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार धकेलने में मुख्य भूमिका निभाई। इसके साथ ही, खाद्य और ऊर्जा घटकों को अलग करके मापी जाने वाली कोर महंगाई भी 4.8 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अनुमानों से कहीं ज्यादा रही।
आम तौर पर महंगाई में इस तरह की तेज वृद्धि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा देती है, जिससे सोने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, मौजूदा माहौल में निवेशकों ने इस झटके को पहले ही अपनी गणनाओं में शामिल कर लिया था। बाजार सहभागियों ने यह भांप लिया कि फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में अपनी मौद्रिक नीतियों को अत्यधिक सख्त करने की स्थिति में नहीं है। नतीजतन, आंकड़ों के जारी होते ही अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में शुरुआती स्थिरता के तुरंत बाद कमजोरी देखी गई, जिसने सर्राफा के लिए एक मजबूत उत्प्रेरक का काम किया।
ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स में गिरावट का समीकरण
बॉन्ड बाजार की चाल ने सोने की तेजी को सबसे अधिक सहारा दिया। अमेरिका के 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड का प्रतिफल 10 आधार अंक गिरकर 5.089 प्रतिशत पर आ गया। प्रतिफल में आई इस तेज गिरावट से बॉन्ड रखने का आकर्षण घटा और गैर-प्रतिफल वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश प्रवाह बढ़ गया। इसके साथ ही छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.4 प्रतिशत फिसलकर 102.11 पर आ गया।
चीन द्वारा अमेरिकी बॉन्ड की संभावित खरीदारी से जुड़ी चर्चाओं ने भी ट्रेजरी यील्ड पर अतिरिक्त दबाव डाला। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए विदेशी मुद्राओं में सोने की खरीद सस्ती हो जाती है। इस पारंपरिक विपरीत संबंध ने निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित किया, जिससे पिछले तीन लगातार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला पूरी तरह थम गया।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें
मुद्रा बाजारों में ब्याज दर वृद्धि के अनुमानों में तेजी से बदलाव आया है। नवीनतम आंकड़ों के बाद मनी मार्केट्स में 28 अक्टूबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की संभावना घटकर केवल 26 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, दिसंबर की नीतिगत बैठक में दर वृद्धि की संभावना 92 प्रतिशत के उच्च स्तर पर आंकी जा रही है।
नीति निर्माताओं की टिप्पणियों ने भी बाजार के मिजाज को शांत करने में अहम भूमिका निभाई है। सैन फ्रांसिस्को फेड की अध्यक्ष मैरी डेली और गवर्नर मिशेल बोमन सहित कई प्रमुख अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि केंद्रीय बैंक को तुरंत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। इस बीच, बाजार के तमाम प्रतिभागी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक बैठक में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के संबोधन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वॉर्श के भाषण से इस महीने के अंत में होने वाली नीतिगत बैठक की रूपरेखा और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी विश्लेषण और सोने के महत्वपूर्ण स्तर
तकनीकी चार्ट पर सोने का परिदृश्य एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। तेजी का रुख बनाए रखने के लिए खरीदारों को सबसे पहले 4,200 डॉलर के मनोवैज्ञानिक प्रतिरोध को पार करना होगा। इसके ऊपर निकलने पर 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,245 डॉलर पर स्थित है, जो अगला बड़ा लक्ष्य होगा। यदि तेजी का रुझान और मजबूत होता है, तो 50-दिवसीय एसएमए 4,334 डॉलर पर एक मजबूत अवरोध के रूप में सामने आएगा।
वर्तमान तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 43 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि बाजार न तो अत्यधिक बिका हुआ है और न ही ओवरबॉट की स्थिति में है। एमएसीडी -58.98 पर है जबकि इसकी सिग्नल लाइन -59.50 पर स्थित है, जिसका हिस्टोग्राम 0.52 के साथ एक हल्की सकारात्मक गति का संकेत दे रहा है। हालांकि, लंबी अवधि के रुझान में 50-दिवसीय ईएमए (4,225 डॉलर) और 200-दिवसीय ईएमए (4,438 डॉलर) के नीचे बने रहने से एक डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। 14-दिवसीय एडीएक्स 20 के कमजोर दायरे में है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार अभी एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है। दैनिक अस्थिरता बफर के रूप में एटीआर 85.57 डॉलर पर दर्ज किया गया है।
नीचे की ओर, मंदड़ियों के हावी होने की स्थिति में पहला तात्कालिक समर्थन 4,100 डॉलर पर है, जहां धुरी स्तर 4,163 डॉलर के नीचे पहला सपोर्ट 4,137 डॉलर और दूसरा 4,094 डॉलर के करीब आंका गया है। यदि 4,100 डॉलर का स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो सोना 14 अक्टूबर के निचले स्तर 4,073 डॉलर तक लुढ़क सकता है। इसके बाद 29 जुलाई का चक्र निचला स्तर 3,996 डॉलर, 17 जुलाई का निचला स्तर 3,959 डॉलर और अंततः वार्षिक निचला स्तर 3,941 डॉलर के परीक्षण के लिए दरवाजे खुल जाएंगे। 52-सप्ताह के दायरे में सोने की न्यूनतम कीमत 3,901 डॉलर और उच्चतम स्तर 5,586 डॉलर दर्ज किया गया है।
सुरक्षित निवेश और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य संचय और विनिमय के एक भरोसेमंद माध्यम के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। आभूषणों के निर्माण और भौतिक चमक के अलावा, आधुनिक वित्तीय प्रणाली में इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित आश्रय माना जाता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता, मंदी की आशंका और कमजोर होती मुद्राओं के खिलाफ सोना एक बेजोड़ बचाव प्रदान करता है क्योंकि यह किसी विशिष्ट सरकार या वित्तीय संस्थान की देनदारी पर निर्भर नहीं करता।
वैश्विक केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक बने हुए हैं। अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की साख बचाने और आर्थिक मजबूती का प्रदर्शन करने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण कर रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी आधिकारिक खरीदारी थी। उभरती अर्थव्यवस्थाएं, विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की, अपने स्वर्ण भंडार को बेहद तेज गति से बढ़ाने में जुटी हुई हैं ताकि उनकी राष्ट्रीय शोधन क्षमता पर वैश्विक भरोसा कायम रह सके।
वैश्विक वित्तीय बाजारों की प्रतिक्रिया और अन्य संपत्तियां
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट का असर अन्य वित्तीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया। मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6950 के आसपास सुस्त बना रहा। दूसरी ओर, डॉलर-येन की जोड़ी 158.00 के नीचे खिसक गई क्योंकि निवेशकों को जापानी मौद्रिक अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की आशंका थी।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में दबाव का माहौल बना रहा, जहां रिपल 1.30 डॉलर के करीब मंदी के दायरे में फंसा रहा। अमेरिका में महंगाई की लगातार चिंताएं डिजिटल परिसंपत्तियों पर बिकवाली का भारी दबाव बना रही हैं। वहीं ब्रिटेन में परिस्थितियां अपेक्षाकृत स्थिर नजर आ रही हैं, जहां चांसलर के बजट से पहले यूके बॉन्ड में तेजी आई है और एफटीएसई 100 इस सप्ताह का शीर्ष प्रदर्शन करने वाला सूचकांक बनकर उभरा है। इस पूरे वैश्विक परिदृश्य के बीच, पीली धातु ने अपनी रक्षात्मक स्थिति को साबित करते हुए निवेशकों को एक बार फिर आकर्षित किया है।























