भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता काफी दबाव भरा साबित हुआ था। शुरुआती सत्रों में लगातार गिरावट झेलने के बाद हफ्ते के आखिरी दिनों में बाजार में कुछ संभलने के संकेत जरूर दिखाई दिए थे, लेकिन इसके बावजूद साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में लगभग 0.6 फीसदी और निफ्टी में करीब 0.5 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई थी। कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स महज 3 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 77,541 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 20 अंक चढ़कर 24,252 के स्तर पर पहुंच गया था। अब निवेशकों और कारोबारियों की निगाहें 24 से 28 अगस्त के नए कारोबारी हफ्ते पर टिकी हुई हैं, जहां बाजार की चाल को दिशा देने के लिए चार प्रमुख कारक अहम भूमिका निभाने वाले हैं।
1. पश्चिम एशिया का तनाव
मिडिल ईस्ट में लगातार गहराता भू-राजनीतिक तनाव इस समय वैश्विक बाजारों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों के लिए भी सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अमेरिका की तरफ से ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। यदि दोनों देशों के बीच टकराव और अधिक गंभीर होता है, तो पूरी दुनिया के बाजारों में अनिश्चितता का माहौल गहरा सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
2. कच्चे तेल के दाम
क्रूड ऑयल की कीमतें हमेशा से भारतीय बाजार की दिशा तय करने में एक निर्णायक कारक रही हैं। बीते सप्ताह ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 87 डॉलर के ऊंचे स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया था। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में कच्चे तेल के दामों में लगातार बनी तेजी देश के लिए आर्थिक चुनौतियां बढ़ा सकती है। महंगे क्रूड से देश में महंगाई दर और कंपनियों की परिचालन लागत पर भारी दबाव आ सकता है, जिससे शेयर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हो सकता है।
3. सरकारी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव
भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े मोर्चे पर, देश का 10 साल का सरकारी बॉन्ड यील्ड पिछले हफ्ते बढ़कर 6.88 फीसदी पर पहुंच गया था, जो पिछले दो महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और बाद में यह 6.85 फीसदी के स्तर पर बंद हुआ था। अमेरिका में भी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर ही बनी हुई है। जब बॉन्ड यील्ड में बढ़त दर्ज होती है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर डेट इंस्ट्रूमेंट्स निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन जाते हैं, जिसके चलते शेयर बाजार से पैसा निकालकर वहां निवेश करने का दबाव बढ़ जाता है।
4. अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख
आगामी सप्ताह में अमेरिकी वित्तीय बाजारों से आने वाले संकेतक भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। निवेशकों की नजरें विशेष रूप से फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के भाषण और अमेरिका के आने वाले PCE महंगाई के आंकड़ों पर टिकी होंगी। इन प्रमुख आंकड़ों से यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि आने वाले समय में अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर क्या रणनीति अपनाई जाएगी।
बाजार का रुझान और सतर्कता
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी आधार और कुछ चुनिंदा शेयरों में लगातार बनी खरीदारी का समर्थन भारतीय बाजार को मिल सकता है। बीते सप्ताह रियल्टी, मेटल और कुछ चुनिंदा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के शेयरों में निवेशकों की अच्छी खासी दिलचस्पी देखने को मिली थी, जबकि दूसरी ओर IT और FMCG सेक्टर के शेयरों पर दबाव का माहौल बना रहा था। इस बीच, निवेशकों को बाजार की हर हलचल पर पैनी नजर रखते हुए बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
अधिक जानकारी के लिए SEBI की रिपोर्ट भी देख सकते हैं।



















