पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते हवाई हमलों ने सोमवार को एक बार फिर तेल बाजार को गरमा दिया। दिनभर के कारोबार में कच्चे तेल के दाम तेजी से चढ़ते रहे और आपूर्ति में रुकावट की आशंका ने कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। WTI क्रूड की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई, जबकि ब्रेंट क्रूड ने भी 90 डॉलर प्रति बैरल का स्तर लांघ लिया। कारोबार के दौरान WTI में करीब 2 प्रतिशत और ब्रेंट में 2 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती दर्ज की गई।
इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई बाधित होने का डर बाजार पर हावी है, और आपूर्ति में किसी भी तरह की अड़चन सीधे कीमतों को ऊपर धकेल देती है।
निचले स्तरों से 30 फीसदी महंगा हुआ कच्चा तेल
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, जुलाई में बने निचले स्तरों की तुलना में कच्चे तेल के दाम अब तक करीब 30 प्रतिशत तक चढ़ चुके हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता टूट गया है। हालात बिगड़ते ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी दोबारा शुरू कर दी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हमलों में तेजी आ गई है। यही वजह है कि पिछले हफ्ते से शुरू हुई तेजी सोमवार को और भड़क उठी।
ईरान ने युद्धविराम खत्म करने का ऐलान किया
अजय केडिया ने बताया कि ईरान ने अमेरिका के साथ चल रहे युद्धविराम को समाप्त करने की घोषणा कर दी है। ईरान का दावा है कि बीते वीकेंड पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे चार जहाजों को रोका गया। दोनों देशों के बीच टकराव अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलों, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सेवाओं और बंदरगाहों तक फैल चुका है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने भी पुष्टि की है कि शनिवार को ईरानी हमले में उसकी एक तेल इकाई को निशाना बनाया गया।
दुनियाभर के लिए बढ़ी चिंता
तेल की कीमतों में आई इस ताजा तेजी ने दुनियाभर के बाजारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जानकारों का मानना है कि अगर दामों की यह रफ्तार जल्दी नहीं थमी, तो महंगाई का दबाव फिर से लौट सकता है। तेल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ढुलाई से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक हर जगह पहुंचता है। यही डर वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नई हलचल पैदा कर रहा है, और निवेशकों की नजरें अब पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी हैं।
















