यूरोपीय संघ और चीन के बीच बढ़ते आर्थिक गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में नए व्यापार युद्ध की आशंकाओं को हवा दे दी है। चीन द्वारा यूरोपीय संघ से आने वाले नाइट्रोटोलुईन पर नई एंटी-डंपिंग जांच शुरू किए जाने के कदम को सीधे तौर पर व्यापक व्यापारिक तनावों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। कॉमर्शबैंक के फोकमर बावर ने इस बात को रेखांकित किया है कि दोनों आर्थिक महाशक्तियों के बीच रस्साकशी केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह नीतिगत और कानूनी कार्रवाइयों में बदलने लगी है। यदि व्यापारिक असंतुलन को दूर करने के लिए ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा प्रभाव चीनी युआन के साथ-साथ वैश्विक मुद्रा बाज़ार पर पड़ सकता है।
व्यापारिक असंतुलन पर बातचीत और नीतिगत दबाव
यूरोपीय संघ और चीन के बीच संबंध पिछले कुछ महीनों से अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस शेफचोविक ने जून के अंत में अपने चीनी समकक्ष वांग वेंटाओ से मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ रहे व्यापारिक असंतुलन का समाधान अक्टूबर तक निकालने पर सहमति बनी थी। हालांकि, तय समयसीमा नजदीक आने के बावजूद ठोस उपायों का अभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसी बीच सामने आए एक फ्रांको-जर्मन गैर-आधिकारिक दस्तावेज़ (नॉन-पेपर) ने यूरोपीय संघ से डंपिंग, अनुचित सब्सिडी और मुद्रा हेरफेर के मामलों में सख्त रवैया अपनाने की मांग की है। इस दस्तावेज़ ने यह साफ संदेश दिया है कि केवल कूटनीतिक बयानबाजी अब पर्याप्त नहीं होगी और यूरोपीय नेतृत्व को कड़े नीतिगत फैसले लेने होंगे।
दोनों पक्षों के लिए बड़ा आर्थिक दांव
यूरोप और चीन के बीच इस खींचतान में दोनों ही पक्षों के भारी आर्थिक हित दांव पर लगे हुए हैं। चीन वर्तमान में जर्मनी और पूरे यूरोपीय संघ के लिए एक अपरिहार्य आपूर्तिकर्ता की भूमिका निभा रहा है। विनिर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाली इंटरमीडिएट वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए यूरोप लगभग पूरी तरह से चीनी आपूर्ति पर निर्भर हो चुका है, क्योंकि ये वस्तुएं चीन के अलावा अन्यत्र आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। आपूर्ति श्रृंखला की इस निर्भरता के कारण यूरोप के लिए कठोर प्रतिबंध लगाना आर्थिक रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है।
दूसरी ओर, अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध की पृष्ठभूमि में यूरोप चीन के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात गंतव्य बन चुका है। मौजूदा वर्ष के पहले आठ महीनों के आंकड़े इस व्यापारिक झुकाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इस अवधि में यूरोपीय संघ को चीनी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 15% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच व्यापार अधिशेष 23% तक बढ़ गया, जिसने यूरोपीय नीति-निर्माताओं की चिंताओं को और अधिक गहरा कर दिया है। मारोस शेफचोविक की आगामी चीन यात्रा और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए यूरोपीय परिषद की इसी महीने होने वाली बैठक से ठीक पहले इस दस्तावेज़ का सार्वजनिक होना दोनों पक्षों पर दबाव बनाने की रणनीति मानी जा रही है।
मुद्रा बाज़ार में डॉलर, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
चीन और यूरोप के बीच इस तनाव का व्यापक प्रभाव विदेशी मुद्रा बाज़ार पर भी महसूस किया जा रहा है। एशियाई सत्र के दौरान मंगलवार को AUD/USD में हल्की गिरावट देखी गई, जिससे पिछले सप्ताह दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय सुधार की प्रक्रिया रुक गई। फिक्स्ड इनकम बाज़ार में लगातार बिकवाली के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के निकट बनी हुई है। इस स्थिति और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की संभावना घटने के बावजूद अमेरिकी डॉलर के रुख को मज़बूत बनाए रखा है। दूसरी ओर, इस महीने रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ समर्थन दे सकती है।
मंगलवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबार में USD/JPY वापस 158.00 के स्तर से ऊपर पहुंच गया। बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) के सख्त रुख की संभावनाओं और संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी येन में कोई खास उत्साह नहीं दिखा। भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊंची अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कारण डॉलर अपने साल के उच्चतम स्तर के करीब टिका रहा, जिससे यह जोड़ी मज़बूत बनी रही। जापानी आर्थिक आंकड़ों से भरे सप्ताह और बैंक ऑफ़ जापान की अस्पष्ट समयसीमा के बीच येन लगातार 158.00 के करीब संघर्ष कर रहा है।
सोने की चाल, क्रिप्टो बाज़ार और केंद्रीय बैंकों का संकट
सोमवार को मामूली उछाल के बाद सोने की कीमतों में बढ़त की गति धीमी रही और मंगलवार को पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम आंकड़े को फिर से हासिल करने के लिए संघर्ष करती दिखी। सोने में यह बढ़त अमेरिकी डॉलर में नए सिरे से आई कमजोरी और सभी परिपक्वता अवधियों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के समर्थन से दर्ज की गई।
क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार की बात करें तो बिटकॉइन मंगलवार को 85,837 डॉलर पर कारोबार करते हुए अपना मज़बूत रुख बनाए रखने में सफल रहा, हालांकि बिकवाल रुझान पर दोबारा नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे हैं। ऑल्टकॉइन्स में भी बिटकॉइन के दायरे का असर दिखा, जहां एथेरियम 2,700 डॉलर के स्तर से ऊपर सीमित दायरे में कारोबार कर रहा था और रिपल 1.50 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास बना रहा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) एक जटिल नीतिगत दुविधा का सामना कर रहा है। आम परिस्थितियों में, जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सीधा रास्ता होता है। परंतु वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। बॉन्ड मार्केट पहले ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का एक हिस्सा खुद ही संभाल रहा है, जिससे ईसीबी के समक्ष नीतिगत विकल्पों को लेकर एक कठिन असमंजस की स्थिति बन गई है।



















