असम और मेघालय के बीच सीमा पर बने गतिरोध को समाप्त करने के लिए शनिवार को गुवाहाटी में उच्च स्तरीय प्रशासनिक वार्ता शुरू हुई। कोइनाधरा में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मेघालय के उपमुख्यमंत्री स्निआवभलंग धर और असम के मंत्री अतुल बोरा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शामिल हुए। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य परिवहन संघों के बीच उपजे तनाव को शांत करना और दोनों राज्यों के बीच वाहनों की निर्बाध आवाजाही को फिर से बहाल करना है।
जोराबाठ सीमा पर लगातार तीसरे दिन भी वाहनों की आवाजाही ठप
दोनों राज्यों के बीच यह परिवहन विवाद अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है। असम से मेघालय में प्रवेश के मुख्य मार्ग जोराबाठ में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों द्वारा मेघालय नंबर प्लेट वाले वाहनों को रोका जा रहा है और उन्हें वापस लौटने पर मजबूर किया जा रहा है। सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और रिजर्व पुलिस तैनात की गई है।
शिलांग में हुई हिंसा से भड़का यह सीमा विवाद
इस सीमा संकट की शुरुआत 19 अगस्त को शिलांग में खासी स्टूडेंट्स यूनियन द्वारा निकाली गई एक ब्लैक-फ्लैग रैली के दौरान हुई हिंसा से हुई थी। उस रैली के दौरान अज्ञात उपद्रवियों, जिनमें से कुछ ने चेहरे पर मास्क पहन रखे थे, ने असम से आए पर्यटकों के वाहनों पर हमला कर दिया था। इस हमले में कई पर्यटक चोटिल हो गए थे और दर्जनों गाड़ियों के शीशे टूट गए थे।
मुआवजे की मांग और आम यात्रियों की बढ़ती मुश्किलें
शिलांग की घटना के विरोध में असम के परिवहन कर्मियों और स्थानीय संगठनों ने जोराबाठ में प्रदर्शन शुरू कर दिया और मेघालय जाने वाले वाहनों की आवाजाही रोक दी। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि हिंसा में क्षतिग्रस्त हुए वाहनों के मालिकों को उचित मुआवजा दिया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सीमा बंदी लंबी खींचने के कारण पर्यटकों, दैनिक यात्रियों और स्थानीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे दोनों राज्यों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है।



















