शिलोंग: मेघालय में हाल ही में भड़की हिंसा और बढ़ते तनाव को कम करने के लिए विभिन्न संगठनों ने आपसी संवाद और संयम बरतने पर जोर दिया है। इसी कड़ी में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) की स्टेट यूथ विंग और हynniewtrep Achik National Movement (एचएएनएम) ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह गिरफ्तार किए गए खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के तीनों वरिष्ठ नेताओं की रिहाई पर गंभीरता से विचार करे। संगठनों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए पुलिसिया कार्रवाई की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया जाना बेहद जरूरी है ताकि राज्य में दोबारा शांति और सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
हिंसा की निंदा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
यूडीपी स्टेट यूथ विंग के मुख्य युवा आयोजक ऑगस्टेर जिरवा ने केएसयू रैली के दौरान हुई हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सार्वजनिक शांति भंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने केएसयू के वरिष्ठ पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद संगठन के कार्यालय पर हुई पुलिस कार्रवाई के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल भी उठाए। ऑगस्टेर जिरवा ने इस बात पर आपत्ति जताई कि केएसयू का कार्यालय एक घनी आवासीय बस्ती और अस्पताल के बेहद करीब स्थित है, ऐसे में वहां पुलिस द्वारा आंसू गैस के इस्तेमाल की क्या आवश्यकता थी, इस पर स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।
सरकार से संवाद और पड़ोसी राज्य से जुड़े मुद्दे
छात्र समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ खुली चर्चा शुरू करने की वकालत करते हुए यूडीपी नेता ने कहा कि गिरफ्तार नेताओं की रिहाई के अनुकूल माहौल तैयार करना अब सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा, यूडीपी यूथ विंग ने असम के जोरabat में मेघालय नंबर के वाहनों को रोके जाने की खबरों पर भी गहरी चिंता जताई है और पड़ोसी राज्य में मेघालय के छात्रों को मिल रही कथित धमकियों का मुद्दा उठाया है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि वह समय रहते उचित कदम उठाए ताकि मौजूदा हालात और अधिक न बिगड़ें।
एचएएनएम का रुख और केएसयू की प्रमुख मांगें
दूसरी ओर, एचएएनएम के अध्यक्ष लैम्फ्रांग खरबानी ने भी हिंसा की खुलकर निंदा की और केएसयू कार्यालय के साथ-साथ राहगीरों और असम पंजीकरण वाले वाहनों पर हुए हमलों को गलत बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केएसयू द्वारा उठाए गए तमाम मुद्दे प्रशासनिक और सरकारी ध्यान आकर्षित करने योग्य हैं, जिन्हें केवल गिरफ्तारियां करके नहीं सुलझाया जा सकता है। लैम्फ्रांग खरबानी ने केएसयू की कई अहम मांगों का पुरजोर समर्थन किया है, जिनमें ईस्ट जयंतिया हिल्स में श्री सीमेंट की जनसुनवाई से जुड़े मामले, पुलिस बल के कथित अत्यधिक प्रयोग की जवाबदेही, मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट 2016 को लागू करना और प्रवासी मजदूरों से जुड़े नियमों को अधिक कड़ाई से लागू करना शामिल है।
विभिन्न मांगें और पर्यटन पर पड़ने वाला प्रभाव
इसके साथ ही संगठन ने भर्ती सुधारों, स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षण, एनईआईजीआरआईएचएमएस में भर्ती से जुड़ी समस्याओं और इनर लाइन परमिट (आईएलपी) को लागू करने जैसी मांगों का भी समर्थन किया है। असम और मेघालय के बीच बनी इस तनातनी के बीच खरबानी ने दोनों राज्यों के नागरिकों से संयम बरतने की अपील की है ताकि दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच दशकों पुराने संबंधों को बचाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे मेघालय के पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान पहुंच सकता है और हजारों परिवारों की आजीविका भी खतरे में पड़ सकती है, इसलिए इस समस्या का जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाना चाहिए।



















