गाजा पट्टी में महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा की वारदातों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसमें कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह के मामले प्रमुख रूप से शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की कई हालिया रिपोर्टों में यह चिंताजनक खुलासा किया गया है कि संघर्ष और विस्थापन के इस दौर में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
बाल विवाह और जबरन शादियों में तेज उछाल
संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार जेंडर आधारित हिंसा के दायरे में आने वाले शुरुआती और जबरन विवाह के मामलों में इस साल की दूसरी तिमाही में गंभीर रूप से तेजी आई है। आंकड़े बताते हैं कि इस साल की पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में शुरुआती और जबरन विवाह के दर्ज मामलों में 123 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। इनमें ज्यादातर 12 से 17 साल की उम्र की किशोरियां शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के फलस्तीन प्रतिनिधि ने इस प्रवृत्ति को बेहद चौंकाने वाला करार दिया है। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान गाजा में हुए भीषण विध्वंस और बार-बार के विस्थापन ने सामाजिक ताने-बाने को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
तथ्य जुटाना चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद सामने आए मामलों से यह साफ है कि हालात कितने बदतर हो चुके हैं। गाजा के एक स्कूल से आश्रय स्थल बने शिविर में रहने वाली एक विस्थापित महिला ने बताया कि कई बार बलात्कार पीड़िताओं को बदनामी से बचाने के लिए उनके हमलावरों के साथ ही उनकी शादी तय कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब परिसरों में बलात्कार के मामले सामने आते हैं, तो अक्सर अगले ही दिन वहां शादियां और जश्न होते देखे जाते हैं। एक अन्य महिला ने पिछले साल के अकाल के दिनों को याद करते हुए बताया कि एक पिता ने भोजन के दो बोरों के बदले अपनी 14 साल की बेटी की शादी कर दी ताकि वह और उसके बाकी बच्चे पेट भर सकें। विस्थापन शिविरों में रह रही छह महिलाओं ने इस तरह के लेन-देन की कहानियां साझा कीं, जिनकी कल्पना इजराइल और हमास के बीच संघर्ष शुरू होने से पहले कोई नहीं कर सकता था।
गंभीर मानवीय संकट और बुनियादी सुविधाओं का पतन
गाजा की अधिकांश आबादी अपने घरों से बेघर हो चुकी है और दो मिलियन से अधिक लोग तंबू या क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने को मजबूर हैं। लगभग 1.2 मिलियन फलस्तीनी तंबू या अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। हालांकि खाद्य बाजार दोबारा खुल चुके हैं, लेकिन भारी गरीबी और भुखमरी के कारण लोग सामान खरीदने में असमर्थ हैं और पूरी तरह राहत सामग्री पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण सार्वजनिक सेवाएं बड़े पैमाने पर चरमरा चुकी हैं और संघर्ष विराम के बावजूद इजरायली हवाई हमले जारी हैं।
युद्ध से पहले गाजा में प्राथमिक शिक्षा से ऊपर की हर स्तर पर लड़कियां लड़कों से आगे थीं और उनकी संख्या भी अधिक थी। लेकिन स्कूलों के लंबे समय तक बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई छूट चुकी है। लड़कों पर परिवारों की मदद के लिए काम ढूंढने का दबाव है, जबकि लड़कियों के मामले में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। अजनबियों के बीच बिना किसी निजता के तंबू शिविरों में रहने के कारण यौन उत्पीड़न की शिकायतें भी आम हो गई हैं।
अनाथ लड़कियों की मुश्किलें और स्वास्थ्य जोखिम
युद्ध के दौरान माता-पिता को खो चुकी अनाथ लड़कियां इस संकट के दौर में सबसे ज्यादा असुरक्षित पाई गई हैं। गाजा सिटी के एक शिविर में साक्षात्कार के दौरान एक महिला ने बताया कि उसने अपने परिवार की दो लड़कियों की शादी में हिस्सा लिया जिनकी उम्र महज 14 और 15 साल थी। उनके चाचाओं ने कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी ताकि वे जिम्मेदारी और खर्चों से छुटकारा पा सकें।
गाजा स्थित विमेंस अफेयर्स सेंटर और अन्य सहायता समूहों ने ऐसी बच्चियों के मामलों का दस्तावेजीकरण किया है जिनका बाल विवाह हुआ और उन्हें प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। कम उम्र में गर्भधारण करने वाली किशोरियों को वयस्क महिलाओं की तुलना में गर्भपात और कम वजन वाले बच्चों के जन्म की आशंका बहुत अधिक होती है। अधिकारियों का कहना है कि भुखमरी और अस्वच्छ माहौल में शरीर का पूरी तरह विकास न होने के कारण इन गर्भधारणों के परिणाम बेहद घातक साबित होते हैं।
यौन हिंसा के मामलों में चिंताजनक वृद्धि
कलंक और बदले के डर के कारण गाजा में यौन हिंसा के मामले अब भी बहुत कम सामने आते हैं। इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा ऑडिट से पता चलता है कि रात के समय महिलाओं और लड़कियों को सबसे ज्यादा खतरा होता है, जिससे वे शिविरों के शौचालयों और स्नानघरों का उपयोग करने से कतराती हैं। अप्रैल से जून 2026 के बीच जेंडर आधारित हिंसा की कुल घटनाओं में यौन उत्पीड़न और बलात्कार के मामले 2.7 प्रतिशत थे, जो पिछली तिमाही में 2.1 प्रतिशत थे।
विधवा महिलाओं या ऐसी महिलाओं जिनके पति हिरासत में हैं या लापता हैं, उनके साथ यौन शोषण का जोखिम काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग हर चौथा परिवार अब महिला द्वारा संचालित है, जो युद्ध से पहले की तुलना में दोगुना है। राहत एजेंसियों का मानना है कि गाजा में मानवीय स्थितियों को बेहतर बनाकर महिलाओं के लिए खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए तंबुओं, स्वच्छता सुविधाओं और प्रकाश व्यवस्था को सुधारने की मांग की जा रही है, हालांकि इजराइल सैन्य उपयोग की आशंका वाले सामानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है।


















