फारस की खाड़ी के रणनीतिक मुहाने पर बसे केशम द्वीप पर अचानक हुए धमाकों ने अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव को दोबारा चरम पर पहुंचा दिया है। यह नया घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब वाशिंगटन में मध्यावधि चुनाव सिर पर हैं, जिनका नतीजा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य और सत्ता पर पकड़ के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित यह द्वीप लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी रहा है, और यहां छिड़ी ताजा रार ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत के साथ-साथ वित्तीय बाजारों में भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। फरवरी के अंतिम दिनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के कई ठिकानों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाए जाने के बाद यह पूरा संघर्ष महीनों तक अनिर्णायक गतिरोध में फंसा रहा था, लेकिन अब इस नए घटनाक्रम ने शांति की किसी भी फौरी संभावना पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
सैन्य गतिविधियों का यह नया दौर एक ऐसे विरोधाभासी मोड़ पर आया है जब ट्रंप ने सार्वजनिक मंचों से ईरान के साथ किसी संभावित समझौते की गुंजाइश का संकेत भी दिया था। हालांकि उनके बयानों और वास्तविक कदमों के बीच अक्सर विरोधाभास देखा जाता रहा है। अमेरिकी अधिकारियों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि हालिया सैन्य कार्रवाई पूरी तरह सुरक्षात्मक मकसद से की गई थी। इस पूरे अभियान को सार्वजनिक रूप से बड़ा प्रचार इसलिए नहीं दिया गया ताकि दुनिया में यह संदेश न जाए कि अमेरिका खाड़ी में कोई नया और विस्तृत युद्ध अभियान छेड़ने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से इस पूरे मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
केशम द्वीप पर रहस्यमयी विस्फोट और तेहरान का कूटनीतिक रुख
ईरान के आधिकारिक सूचना तंत्र के अनुसार, केशम द्वीप के अलग-अलग हिस्सों में एक के बाद एक कई जोरदार धमाके सुने गए। स्थानीय चश्मदीदों ने उस समय इलाके के आसमान में दो अज्ञात विमानों को उड़ते हुए देखने का दावा किया है, हालांकि इन विस्फोटों की सटीक वजह और उनसे हुए नुकसान का ब्योरा पूरी तरह साफ नहीं हो सका है। इस सैन्य हलचल के बीच कूटनीतिक संपर्क भी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच परोक्ष चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी है। उन्होंने वर्तमान क्षेत्रीय परिस्थितियों को अत्यंत गंभीर और संवेदनशील बताते हुए कहा कि मौजूदा संकट को टालने के लिए पर्दे के पीछे काफी सघन विचार-विमर्श चल रहा है।
वाशिंगटन के साथ पिछले संवादों में तेहरान के मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा चुके मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने मंगलवार को स्पष्ट लहजे में कहा कि उनका देश किसी भी संभावित युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके बावजूद उसने अमेरिकी प्रशासन को एक बेहद तर्कसंगत और नपा-तुला जवाब भेजा है। घालीबाफ के शब्दों में, अब युद्ध को रोकने या भड़काने का पूरा दारोमदार वाशिंगटन के पाले में डाल दिया गया है।
कूटनीतिक चिट्ठियों की आवाजाही और जीत के दावे
क्षेत्रीय राजनीति के गलियारों में पिछले दिनों एक बड़ा कूटनीतिक कदम उस वक्त दर्ज किया गया, जब वेंस की तरफ से ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक औपचारिक पत्र भेजा गया। इस पत्र में दोनों मुल्कों के बीच नए सिरे से सीधी या परोक्ष बातचीत शुरू करने की संभावनाओं का जिक्र किया गया था, जिसे बीते कई महीनों के दौरान हुआ सबसे उच्च-स्तरीय कूटनीतिक प्रयास माना गया। इस संवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने दावा किया कि अमेरिका की तरफ से मिले ये संदेश वास्तव में ईरान की मजबूत स्थिति और रणनीतिक जीत की मौन स्वीकारोक्ति हैं।
जलडमरूमध्य का नया मार्ग और प्रतिबंध हटाने की शर्त
एक अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यम को दिए अपने साक्षात्कार में ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने बातचीत की शर्तें बिल्कुल साफ कर दीं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका हालात सामान्य करना चाहता है तो उसे ईरान और ओमान के बीच तय हुए उस नए समुद्री आवागमन समझौते को मान्यता देनी होगी, जिसे होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा अरागची ने मांग रखी कि वाशिंगटन को हाल के दिनों में थोपे गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तत्काल वापस लेना होगा और खाड़ी क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी व सैनिकों की तादाद घटानी होगी।
दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान को लेकर आक्रामक तेवर में कोई कमी नहीं आई है। ट्रंप ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं संभले तो अमेरिका को आने वाले दिनों में ईरान पर किसी भी क्षण बेहद कड़ी सैन्य चोट करनी पड़ सकती है।
पिकएक्स माउंटेन पर नजर और तेहरान की सीधी जवाबी धमकी
सप्ताहांत में दिए गए अपने बयानों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उनकी सैन्य सूची में अभी भी एक या दो अहम निशाने बाकी हैं जिन्हें ठिकाने लगाना जरूरी है। इन संभावित निशानों में मध्य ईरान में स्थित पिकएक्स माउंटेन का नाम प्रमुखता से लिया गया। इस पर्वतीय ठिकाने को पश्चिमी जगत में एक संदिग्ध गुप्त परमाणु स्थल के रूप में देखा जाता है, हालांकि तेहरान प्रशासन ने हमेशा ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे असैन्य क्षेत्र बताया है।
ईरानी नेतृत्व ने जवाबी चेतावनी देते हुए दोहराया है कि यदि अमेरिका ने दोबारा पूर्ण युद्ध छेड़ने की हिमाकत की तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक और विनाशकारी होगा। इस कड़वाहट की सीधी तस्वीर मंगलवार को राजधानी तेहरान की सड़कों पर भी देखने को मिली, जहां प्रशासन ने शहर के मुख्य चौराहे पर एक विशाल बैनर लगा दिया। इस बैनर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की तस्वीर के साथ फारसी में साफ अक्षरों में धमकी चस्पा की गई है कि वे ट्रंप को मौत के घाट उतार देंगे।



















