अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को मिली भारी हार के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक और सैन्य हलचल तेज हो गई है। ईरान के मुख्य वार्ताकार और वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने इन चुनाव नतीजों को युद्ध के खिलाफ अमेरिकी जनता का स्पष्ट फैसला करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि यदि अमेरिकी प्रशासन अपने नागरिकों की इच्छा की अनदेखी करता है और अंतरराष्ट्रीय ब्लैकमेलरों के दबाव में काम करता है, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा। दूसरी तरफ, ट्रम्प ने भी यह स्वीकार किया है कि कांग्रेस उम्मीदवारों की हार के पीछे युद्ध और उसके कारण बढ़े पेट्रोल के दाम एक बड़ा कारण रहे, हालांकि उन्होंने ईरान के खिलाफ फरवरी में इस्राइल के साथ मिलकर किए गए संयुक्त हमले को लेकर किसी पछतावे से इनकार किया।
मध्यावधि चुनाव परिणाम और अमेरिकी नेतृत्व का रुख
अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में आए इस बदलाव पर बोलते हुए ट्रम्प ने कहा कि जनता उनकी ईरान नीति से भले ही सैद्धांतिक रूप से सहमत रही हो, लेकिन वे पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों जैसी तात्कालिक परेशानियों को झेलने के लिए तैयार नहीं थे। फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में उन्होंने साफ तौर पर माना कि नतीजों का एक हिस्सा ईरान संकट से जुड़ा हुआ था। इसके साथ ही सीबीएस न्यूज से बात करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष तभी खत्म होगा जब वे खुद इसे समाप्त करने का निर्णय लेंगे। पिछले कुछ हफ्तों से वे लगातार यह चेतावनी भी देते रहे हैं कि यदि ईरान के साथ किसी समझौते पर सहमति नहीं बन पाती है, तो मध्यावधि चुनाव बीतने के बाद अमेरिका और इस्राइल पूर्ण पैमाने के युद्ध में दोबारा उतर सकते हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स के साथ चुनाव से पूर्व एक अन्य साक्षात्कार में ट्रम्प ने मौजूदा संघर्ष की स्थिति को लेकर संतोष जताया था और कहा था कि वे इसे पूरी तरह एक युद्ध नहीं मानते। जब इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा इस हफ्ते ईरान पर हमले के दिए गए कथित स्पष्ट संकेतों के बारे में उनसे सवाल किया गया, तो ट्रम्प ने टिप्पणी की कि सेना पूरी तरह तैयार और हथियारों से लैस है, लेकिन शायद इसकी जरूरत ही न पड़े।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और सैन्य तनाव
कूटनीतिक बयानों के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जानकारी दी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक बारूदी सुरंगों की चपेट में आने से चार तेल टैंकरों में आग लग गई। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, इनमें से दो जहाजों में आग धधक रही थी, जबकि दो अन्य टैंकरों को ईरानी बलों ने रोक लिया। ईरानी पक्ष का दावा है कि ये जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित दक्षिणी जलमार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे।
समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप में लीमा से लगभग 14 समुद्री मील (करीब 26 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में मंगलवार शाम एक टैंकर पर दो अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इससे पहले सोमवार को लीमा के उत्तर-पूर्व में एक पारंपरिक लकड़ी की नाव (ढो) पर हुए हमले में एक भारतीय चालक दल सदस्य की मौत हो गई थी, जबकि तेरह अन्य सदस्यों को ओमानी अधिकारियों द्वारा सुरक्षित बचा लिया गया था।
ड्रोन टकराव और कतर की मध्यस्थता में रुकी वार्ता
हवाई क्षेत्र में भी तनातनी जारी है। IRGC ने दावा किया कि उसके सुरक्षा बलों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिका के एक और MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है। इससे पहले सोमवार रात को भी ऐसे ही घटनाक्रम के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि अमेरिकी विमान पर IRGC द्वारा गोलीबारी किए जाने के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप पर सीमित सैन्य हमले किए थे।
दूसरी ओर, संकट को समाप्त करने के लिए चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत महीनों से ठप पड़ी है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दोहराया है कि उनकी सरकार बातचीत के रास्ते संकट सुलझाने का प्रयास कर रही है और यदि युद्ध दोबारा शुरू होता है तो किसी भी पक्ष का भला नहीं होगा। पेजेशकियन ने यह भी खुलासा किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने सरकार को उन मुद्दों पर भी बातचीत करने की छूट दी है जिन्हें पहले पूरी तरह से प्रतिबंधित माना जाता था।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया कि कतर की मध्यस्थता में चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत का मुख्य आधार सितंबर में ईरान द्वारा दिया गया सात-चरणीय प्रस्ताव ही है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रस्ताव को अब संक्षिप्त और व्यावहारिक बना दिया गया है, जिससे इसे केवल दो दिनों के भीतर लागू किया जा सकता है।
वैश्विक तेल आपूर्ति और सामरिक जलमार्ग का संकट
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से सामान्य दिनों में दुनिया के तेल और गैस के कुल शिपमेंट का पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद वाणिज्यिक जहाजों पर मिसाइल व ड्रोन हमलों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया था। जून के महीने में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए एक प्रारंभिक सहमति बनी थी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में जहाजों पर दोबारा हुए हमलों और अमेरिकी नाकेबंदी के फिर से लागू होने से यह समझौता टूट गया।
ईरान इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं है और उसने ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर जाने वाले दक्षिणी मार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, ताकि जहाजों को ईरानी जलक्षेत्र वाले मार्ग से जाने पर मजबूर किया जा सके। खाड़ी अरब देशों से तेल निर्यात को निर्बाध बनाए रखने के लिए अमेरिकी सेना हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है।



















