संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल के साथ लगभग सात महीने से जारी सैन्य टकराव के बीच कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने वैश्विक नेताओं के सामने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों और धमकियों के दबाव में आकर उनका देश कभी भी घुटने नहीं टेकेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया कि अगर उनकी बुनियादी शर्तें पूरी की जाती हैं, तो ईरान इस पूरे संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के लिए अब भी पूरी तरह तैयार है।
धमकियों और प्रतिबंधों का प्रतिरोध करने का संकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान पर पेजेशकियन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें उन्होंने जल्द कोई समझौता न होने की स्थिति में इस्लामिक गणराज्य को पूरी तरह नष्ट करने की चेतावनी दी थी। ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विदेशी नेतृत्व को यह भलीभांति समझ लेना चाहिए कि प्रतिबंधों, बढ़ते दबाव और दादागिरी के सामने ईरानी जनता का प्रतिरोध केवल और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि सैन्य धमकियों के बल पर तेहरान से कोई रियायत हासिल नहीं की जा सकती।
होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री नाकेबंदी का मुद्दा
पेजेशकियन ने शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक प्रमुख शर्त रखी, जिसके तहत ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त करना अनिवार्य होगा। उन्होंने जलमार्गों के न्यायसंगत उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था कतई स्वीकार्य नहीं हो सकती जहां पूरी दुनिया होर्मुज जलडमरूमध्य का लाभ उठाए, जबकि ईरान को इस रास्ते से पूरी तरह वंचित रखा जाए।
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि दुनिया भर में होने वाले कुल तेल और गैस शिपमेंट का पांचवां हिस्सा सामान्य दिनों में इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। हालांकि, फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से यह जलमार्ग व्यावहारिक रूप से पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। इस बंद के पीछे जहाजों पर हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले तथा अमेरिका द्वारा लागू की गई सख्त नौसैनिक नाकेबंदी मुख्य वजह रहे हैं।
विफल हुआ जून का प्रारंभिक समझौता
संघर्ष को थामने और महत्वपूर्ण जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे। अमेरिका और ईरान के बीच जून के महीने में युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से शुरू करने के लिए एक प्रारंभिक सहमति बन गई थी। यह सहमति ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई और कुछ ही सप्ताह के भीतर बिखर गई। जहाजों पर नए सिरे से ईरानी हमले शुरू हो गए, जिसके जवाब में अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को दोबारा कड़ाई से लागू कर दिया।
न्यूयॉर्क में कूटनीतिक बातचीत का नया दौर
मौजूदा गतिरोध को तोड़ने के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर कुछ सुगबुगाहट देखने को मिली है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर मंगलवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता आयोजित की गई। इस पूरी बातचीत में कतर के मध्यस्थों ने दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराने में अहम भूमिका निभाई। जून के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच यह पहला औपचारिक संपर्क था।
बातचीत की प्रक्रिया पर अपनी राय रखते हुए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने उम्मीद जताई कि यह चर्चा रचनात्मक और सकारात्मक परिणाम देने वाली साबित होगी। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि संकट के समाधान के लिए कतरी मध्यस्थ अपने प्रयास निरंतर जारी रखेंगे।
ईरान की अपरिवर्तित शर्तें और संपत्तियों की मांग
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इस चर्चा को लेकर अत्यधिक उत्साह दिखाने से परहेज किया। उन्होंने साफ किया कि इन वार्ताओं में कोई नई बात सामने नहीं आई है। बकाई के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान के पुराने रुख और शर्तों को ही दोहराया है। ईरान का मुख्य जोर इस बात पर बना हुआ है कि किसी भी स्थायी समाधान के लिए अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी का खात्मा होना जरूरी है और इसके साथ ही विभिन्न देशों में रोकी गई ईरानी संपत्तियों को बिना शर्त जारी किया जाना चाहिए।



















