न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच से वैश्विक रणनीतियों, सुरक्षा और कूटनीति पर कड़ा रुख सामने रखा। खचाखच भरे सभागार के सामने दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस समय एक बड़े फैसले के मोड़ पर खड़े हैं, जहां एक तरफ ईरान पर दोबारा सैन्य हमला करने का विकल्प है तो दूसरी तरफ किसी व्यापक शांति समझौते पर आगे बढ़ने का रास्ता भी खुला हुआ है। जब वे अपना भाषण दे रहे थे, उस दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल का केवल एक सदस्य सभागार में मौजूद रहकर उनकी बातें सुन रहा था। ट्रंप ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यदि यह टकराव सुलझ नहीं पाता है, तो वे इस्लामिक रिपब्लिक का पूरी तरह सफाया कर सकते हैं।
ताकत के जरिए शांति और ईरानी मसले पर कड़ा रुख
अपने पूरे संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव और फरवरी में अमेरिका तथा इजरायल द्वारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि इस कड़े कदम ने तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया है। ट्रंप ने इसे समझौते या समझौते की कमजोर बातचीत के बजाय अल्टीमेटम पर आधारित ताकत के जरिए शांति की नीति करार दिया। उन्होंने कहा कि उनके सामने यह सवाल है कि क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जो उसे पहले से कहीं अधिक भव्य देश बनाने और पुनर्निर्माण करने का अवसर दे, या फिर वे इस्लामिक गणराज्य को तुरंत खत्म कर देंगे ताकि वह कभी दोबारा लोगों और देशों को तबाह न कर सके। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि जो समझौता अब तक नहीं हो सका है, वह नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद पूरा हो जाएगा।
यह भाषण उनकी उस दबावपूर्ण कूटनीति को दर्शाता है, जिसमें अत्यधिक सैन्य ताकत का डर दिखाने के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी जारी रखा जाता है। हालांकि फरवरी से शुरू हुए इस सैन्य अभियान की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और घरेलू स्तर पर ट्रंप की लोकप्रियता की रेटिंग्स पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
पर्दे के पीछे तीन घंटे तक चली कूटनीतिक बातचीत
महासभा के मंच पर आक्रामक भाषण देने के बाद राष्ट्रपति ने पत्रकारों को जानकारी दी कि महासभा की बैठकों के इतर दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच लगभग तीन घंटे की बेहद उपयोगी वार्ता संपन्न हुई है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने भी पुष्टि की कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिम एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच बैठक हुई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सरकारी प्रसारक आईआरएनए के हवाले से स्पष्ट किया कि यह बातचीत कतर के मध्यस्थ के जरिए आयोजित की गई थी। इस चर्चा में तेहरान की ओर से शर्तें रखी गईं, जिनमें सभी मोर्चों पर जारी युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने और अमेरिकी आक्रामकता को रोकने की मांग शामिल थी।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से बाहर निकलते समय जब स्टीव विटकॉफ से बैठक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सकारात्मक संकेत दिया। बाद में उन्होंने एक्स पर पुष्टि की कि पूरे दिन दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों ने इधर-उधर संदेश पहुंचाकर बातचीत करवाई। विटकॉफ के अनुसार, दोनों पक्षों ने चर्चा का एक महत्वपूर्ण दौर पूरा कर लिया है, जिसके काफी रचनात्मक और फलदायी साबित होने की उम्मीद है, और मध्यस्थ आगे भी अपना काम जारी रखेंगे।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और आगामी विदेश नीति एजेंडा
सभागार में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने यह दावा भी दोहराया कि उनकी कूटनीति रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करा देगी। दोनों देशों के बीच सीमा पार मिसाइलों और ड्रोन हमलों का दौर तेज होने के बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के नेतृत्व के साथ मिलकर जल्द से जल्द समाधान निकाला जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, विदेश मंत्री मार्को रुबियो न्यूयॉर्क में बुधवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से सीधी द्विपक्षीय मुलाकात करने वाले हैं।
महासभा के इस सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की, ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग सहित सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान के नेताओं के साथ द्विपक्षीय व बहुपक्षीय बैठकें भी कीं। खाड़ी और अन्य इस्लामिक देशों के नेताओं के साथ हुई इस बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और स्थिरता मजबूत करने के उपायों पर विस्तृत विमर्श हुआ।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुपर इंटेलिजेंस की अवधारणा
तकनीक के मुद्दे पर बोलते हुए ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी वैश्विक चिंताओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी तरह के वैश्विक षड्यंत्र या अत्यधिक डर के कारण चीन के सामने अपनी बढ़त नहीं छोड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब सुपर इंटेलिजेंस कहा जाना चाहिए, क्योंकि आर्टिफिशियल शब्द से यह नकली प्रतीत होता है, जबकि वास्तव में यह अत्यंत प्रभावशाली तकनीक है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तकनीक के इस्तेमाल में सावधानी बरतना आवश्यक रहेगा।
वैश्विक संस्थानों की आलोचना और ग्रीनलैंड समझौता
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने विदाई भाषण में दुनिया के महाशक्तियों को चेतावनी दी थी कि उनकी शक्ति उतनी असीम नहीं है जितनी वे समझते हैं, और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, युद्ध, जलवायु परिवर्तन व AI के चलते वैश्विक विभाजन लगातार गहरा रहा है। इसके विपरीत, ट्रंप ने वैश्विक संस्थाओं और उनके नौकरशाहों की तीखी आलोचना की और इसे एक अप्रत्यक्ष वामपंथी एजेंडा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया में कोई भी वैश्विक सरकार नहीं है और अमेरिका अपनी संप्रभुता तथा अद्वितीय सैन्य शक्ति के आधार पर ही अपने हितों की रक्षा करेगा।
इसी कूटनीतिक दौरे के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं के साथ मिलकर उत्तरी अटलांटिक द्वीप पर अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को सुदृढ़ करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड की संप्रभुता को दोबारा मान्यता दी गई है, लेकिन अमेरिका को इस द्वीप के हवाई क्षेत्र और सामरिक भूमि तक व्यापक पहुंच प्रदान की गई है। इसके अलावा ट्रंप ने क्यूबा की वामपंथी सरकार पर भी निशाना साधा और उसे एक विफल राष्ट्र बताया, जिसके विरोध में क्यूबा का प्रतिनिधिमंडल भाषण के दौरान ही उठकर बाहर चला गया।


















