पाउंड स्टर्लिंग 1.3350 से ऊपर सथर रहा, निगाहें यूके रिटेल सेल्स परअंबिकापुर की रानी सोनी ने यूट्यूब से सीखकर शुरू किया 'स्वाद स्टेशन', बेटे के साथ मिलकर खड़ा किया कारोबारसोनीपत में नाबालिग की हत्या पर उबाल, परिजनों ने अंतिम संस्कार रोका और श्मशान घाट के बाहर दिया धरनाविविधता और फीचर्स से भरपूर विवलडी ब्राउज़र के ये 10 बेहतरीन ट्रिक्सपाली में शादियों की धूम, कपड़े से मैच करती राजस्थानी जूतियां सात दिन में हो रहीं तैयारईरानी हमलों में अमेज़न वेब सर्विसेज़ का कुछ ग्राहक डेटा हमेशा के लिए खो गयादिल्ली के स्वरूप नगर में 16 साल की लड़की से गैंगरेप के बाद हत्या, चार गिरफ्तारक्लैरिटी डिजिटल एसेट विधेयक अटकने के बीच पैसिव फ्यूचर्स सॉफ्टवेयर को CFTC की चुनिंदा राहतजौनपुर का ऐतिहासिक राजा साहब पोखरा अपनी पहचान खोने की कगार पर, कभी थी भारी रौनकभारत के सामने गहराया अलनीनो का खतरा, 17 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकता है कमजोर मानसून
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का दावा, ईरान में हमलों के दौरान अमेरिका ने किए युद्ध अपराधमध्य पूर्व
18 सित॰ 2026, 7:59 am (42 मिनट पहले)· 0

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का दावा, ईरान में हमलों के दौरान अमेरिका ने किए युद्ध अपराध

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान पर हुए हमलों में अमेरिका द्वारा युद्ध अपराध किए जाने के पुख्ता आधार मौजूद हैं। इस संघर्ष के दौरान और उसके बाद हुए प्रदर्शनों में ईरानी प्रशासन की कार्रवाई को भी मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा गया है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने एक गंभीर रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि ईरान में किए गए दो प्रमुख हमलों के दौरान अमेरिका की ओर से युद्ध अपराध किए जाने के पर्याप्त और तार्किक आधार मौजूद हैं। इन हमलों में कम से कम 177 नागरिकों की जान चली गई थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस संघर्ष की भीषण मानवीय लागत की ओर खींचा है। इस संबंध में अमेरिकी प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने पूर्व में लामर्द शहर पर हमले के दावों से इनकार किया था और मिनब में हुई घटना की जांच की बात कही थी।

मिनब के प्राथमिक विद्यालय पर हमला और तबाही

जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब 28 फरवरी को दक्षिणी शहर मिनब में स्थित शजारेह तय्येबह प्राइमरी स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइलों से हमले किए गए थे। स्थानीय अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक, इस दुखद घटना में कम से कम 156 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 120 बच्चे भी शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञों ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह विद्यालय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के एक नौसैनिक परिसर के पास स्थित था, जिसे उसी दिन निशाना बनाया गया था। इसके बावजूद, स्कूल की इमारत पूरी तरह स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकने वाली स्थिति में थी और ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि उस परिसर का इस्तेमाल किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि के लिए किया जा रहा था।

ये भी पढ़ें

विशेषज्ञों ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए बताया कि मीडिया में आई उन खबरों के आधार पर, जिनमें अमेरिकी सेना की एक प्रारंभिक जांच द्वारा अमेरिकी बलों को जिम्मेदार ठहराए जाने की बात कही गई थी, यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह हमला अमेरिका द्वारा किया गया था। इसके अलावा, इस बात को भी मुख्य आधार बनाया गया कि इस संघर्ष में केवल अमेरिकी सेना के पास ही टॉमहॉक मिसाइलें मौजूद हैं। चूँकि प्रत्यक्षदर्शियों और बचे हुए लोगों ने यह गवाही दी कि विद्यालय पर दो बार मिसाइलें दागी गईं, इसलिए जांचकर्ताओं ने यह माना कि वह स्कूल ही हमले का मुख्य निर्धारित बिंदु था और यह नुकसान किसी भटके हुए प्रक्षेपास्त्र या सैन्य ठिकाने पर हमले के दौरान हुई आकस्मिक क्षति का परिणाम नहीं था। हालांकि अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने यह दोहराया है कि अमेरिकी सेना कभी भी जानबूझकर नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाती है, लेकिन मिनब हमले की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

लामर्द में हुआ हमला और हथियारों की पुष्टि

उसी तारीख यानी 28 फरवरी को एक अन्य भीषण घटना में, लामर्द शहर के एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आवासीय क्षेत्र पर प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल यानी PrSM दागी गईं, जिनसे टंगस्टन छर्रों के बादल हवा में फैल गए थे। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 21 नागरिकों की जान चली गई, जिनमें सात बच्चे भी शामिल थे। जांच दल ने पाया कि यह खेल परिसर भी स्पष्ट रूप से अलग से पहचाना जा सकता था और इसके सैन्य उपयोग में लाए जाने का कोई प्रमाण नहीं था। चूंकि केवल अमेरिकी सेना ही इस प्रकार की मिसाइलों का उपयोग करती है, इसलिए विशेषज्ञों ने माना कि इस हमले के पीछे भी अमेरिकी बलों की संलिप्तता के ठोस आधार हैं। हालांकि अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि उसने उस दिन लामर्द में कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की थी और इस्तेमाल किए गए हथियार के PrSM होने के दावों को भी चुनौती दी है।

ईरान के भीतर घरेलू प्रदर्शनों पर कठोर कार्रवाई

संयुक्त राष्ट्र के जांच मिशन की इस व्यापक रिपोर्ट में केवल बाहरी सैन्य हमलों का ही जिक्र नहीं है, बल्कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान ईरान के भीतर हुए विशाल जन-आंदोलनों और सरकार द्वारा उनके दमन का भी विस्तार से विवरण दिया गया है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह दमनकारी कार्रवाई पिछली सभी घटनाओं से कहीं अधिक भीषण और अभूतपूर्व स्तर की थी, जिसमें भारी पैमाने पर प्राणघातक बल का प्रयोग किया गया और अनगिनत लोगों की हत्याएं, गंभीर चोटें तथा बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां दर्ज की गईं।

घटनाओं के गवाहों, स्वास्थ्य कर्मियों और पीड़ितों के परिवारों ने जांचकर्ताओं को बताया कि सुरक्षा बलों ने इमारतों की छतों और अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर मोर्चा संभाल रखा था, जहां से वे सीधे प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर असॉल्ट राइफलों से गोलियां चला रहे थे। इसके अलावा, मेटल शॉटगन के छर्रों से प्रदर्शनकारियों के सिर, छाती और आंखों पर गंभीर घाव हुए, जिसके कारण कई लोगों की आंखें हमेशा के लिए खराब हो गईं और वे स्थायी रूप से अंधेपन का शिकार हो गए।

चिकित्सा सुविधाओं और मानवाधिकारों का हनन

जैसे-जैसे सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज होती गई, उन्होंने अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों को भी अपने निशाने पर ले लिया। घायलों का इलाज करने आ रहे प्रदर्शनकारियों और कुछ स्वास्थ्य कर्मियों को बेरहमी से पीटा गया तथा गिरफ्तार किया गया, जिससे पीड़ितों में जीवनरक्षक उपचार कराने का भय बैठ गया। इसके अतिरिक्त, इस अशांति के दौरान पकड़े गए हजारों लोगों को हिरासत में भारी प्रताड़ना, एकांत कारावास और कानूनी सहायता से वंचित रखे जाने जैसी अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मौत की सजा के प्रावधानों का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा दिया है। इस अशांति से जुड़े मामलों में त्वरित और निष्पक्षताहीन मुकदमों के बाद कम से कम 29 पुरुषों को फांसी पर लटकाया जा चुका है। हालांकि जांच दल के लिए सरकारी आंकड़ों से इतर इस दमन में हुई मौतों की वास्तविक संख्या को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना संभव नहीं हो सका, लेकिन उनका मानना है कि वास्तविक आंकड़ा सरकार द्वारा बताए गए 3,000 के आंकड़े से काफी अधिक है, जिसमें अधिकांश लोगों को सरकार ने सुरक्षा बलों या राहगीरों के रूप में पहचाना था। वहीं, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन Hrana ने अपनी पुष्टि में 7,000 से अधिक लोगों के मारे जाने की बात कही है, जिनमें से लगभग सभी आम प्रदर्शनकारी थे।

सवाल-जवाब

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने किन दो हमलों की जांच की है?
विशेषज्ञों ने 28 फरवरी को मिनब के एक प्राइमरी स्कूल और लामर्द के एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर हुए हमलों की जांच की है।
मिनब के स्कूल पर हुए हमले में कितने लोगों की मौत हुई थी?
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार मिनब के स्कूल पर हुए हमले में कम से कम 156 लोगों की जान गई थी, जिनमें 120 बच्चे शामिल थे।
अमेरिकी सेना ने इन हमलों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
अमेरिका ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है, हालांकि उसने लामर्द में हमलों से इनकार किया है और मिनब की घटना की जांच जारी रहने की बात कही है।
ईरान में प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने किस तरह की कार्रवाई की?
सुरक्षा बलों ने छतों से भीड़ पर गोलियां चलाईं और मेटल शॉटगन के छर्रों का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोगों की जान गई और कई लोग स्थायी रूप से अंधे हो गए।
ईरानी अधिकारियों ने इन प्रदर्शनों और मौतों के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया है?
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इजरायल पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया तथा मौतों के लिए आतंकवादियों और दंगाइयों को जिम्मेदार बताया।
मानवाधिकार संगठन Hrana ने दमन के दौरान कितनी मौतों की पुष्टि की है?
मानवाधिकार संगठन Hrana ने अपनी रिपोर्ट में 7,000 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है, जिनमें लगभग सभी प्रदर्शनकारी थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp