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मक्का पैक्ट से बौखलाया यूएई, अब भारत बनता दिख रहा पश्चिम एशिया की नई ताकत का केंद्रमध्य पूर्व
5 सित॰ 2026, 5:43 pm (5 घंटे पहले)· 4

मक्का पैक्ट से बौखलाया यूएई, अब भारत बनता दिख रहा पश्चिम एशिया की नई ताकत का केंद्र

आसिम मुनीर के मक्का पैक्ट से सऊदी अरब और पाकिस्तान की नजदीकी बढ़ी, लेकिन इसी वजह से घबराया यूएई अब भारत के करीब आ गया है, जिससे पश्चिम एशिया में भारत की ताकत बढ़ने के आसार बन गए हैं.

पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच मक्का पैक्ट पर दस्तखत करके खुद को एक बड़ा जियोपॉलिटिकल खिलाड़ी साबित करने की कोशिश की, लेकिन यह दांव उन्हीं के खेमे पर बुरी तरह उल्टा पड़ गया है. इस पैक्ट की गूंज पूरे मिडिल ईस्ट में इतनी तेज सुनाई दी कि यूएई घबरा उठा और बिना देर किए सीधे दिल्ली से हाथ मिलाने पहुंच गया. सऊदी अरब और पाकिस्तान की इस अचानक नजदीकी ने यूएई को इतना असहज कर दिया कि उसने अपनी सुरक्षा नीति का रुख भारत की तरफ मोड़ दिया.

सऊदी और यूएई की पुरानी खींचतान

मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब और यूएई के बीच लंबे समय से एक अंडरकरंट प्रतिस्पर्धा चल रही है. दोनों ही देश इलाके में दबदबे और लीडरशिप को लेकर एक-दूसरे से आगे निकलना चाहते हैं. हाल ही में अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ करीब 5 अरब डॉलर, यानी लगभग 41 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम डिफेंस डील को मंजूरी दी. ठीक इसी दौर में सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्किये के साथ मिलकर मक्का अकार्ड पर दस्तखत कर दिए. इस एक कदम ने यूएई के लिए खतरे की घंटी बजा दी, क्योंकि सऊदी अरब ने परमाणु ताकत वाले पाकिस्तान और सैन्य रूप से दमदार तुर्किये को साथ लेकर अपना गुट कहीं ज्यादा मजबूत कर लिया. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक सीधा नियम यहां साफ दिखता है, जिसमें दुश्मन के दोस्त को दुश्मन और दुश्मन के दुश्मन को अपना साझेदार माना जाता है. यूएई के लिए सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये की यह तिकड़ी ठीक इसी नियम के दायरे में आ गई.

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मुनीर की जल्दबाजी, भारत की एंट्री

पाकिस्तान जिस सऊदी खेमे में जाकर खड़ा हुआ, उसने यूएई को पूरी तरह असुरक्षित महसूस करा दिया. अगर आसिम मुनीर मक्का पैक्ट पर दस्तखत नहीं करते, तो यूएई को इतनी जल्दी अपनी सुरक्षा को लेकर भारत की तरफ झुकने की जरूरत ही नहीं पड़ती. मुनीर की इसी चूक का सीधा फायदा भारत को मिल गया. जिस वक्त मक्का पैक्ट और अमेरिका-सऊदी की 5 अरब डॉलर वाली डील की खबरें सुर्खियों में थीं, ठीक उसी समय यूएई एयरफोर्स के चीफ भारत के दौरे पर पहुंच गए. यह मुलाकात महज एक इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि इसमें साफ संदेश छिपा हुआ था कि अगर पाकिस्तान और सऊदी अरब मिलकर नया गुट बना रहे हैं, तो यूएई भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक गहराई के साथ खड़ा होने को तैयार है. यूएई एयरफोर्स चीफ की यह यात्रा इस बात का भी संकेत थी कि खाड़ी देश अब अपनी सुरक्षा को लेकर सिर्फ पश्चिमी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि भारत जैसे उभरते सैन्य केंद्र के साथ सीधा रिश्ता मजबूत करना चाहते हैं.

भारत कैसे बन रहा है पश्चिम एशिया की नई धुरी

इस पूरे घटनाक्रम ने भारत को पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने का ऐसा मौका दे दिया है, जो शायद यूं आसानी से नहीं मिलता. इसकी तीन बड़ी वजहें हैं.

  • मिलिट्री और डिफेंस पार्टनरशिप: यूएई को पता है कि दक्षिण एशिया में भारत ही अकेला ऐसा देश है जो पाकिस्तान को सैन्य स्तर पर टक्कर दे सकता है. भारत की एयरफोर्स, आधुनिक टेक्नोलॉजी और तेजी से बढ़ता डिफेंस एक्सपोर्ट यूएई को एक भरोसेमंद और नजदीकी विकल्प देता है.
  • सऊदी-पाकिस्तान गुट को बैलेंस करना: भारत अब सिर्फ तेल खरीदने वाला बाजार नहीं रह गया है. यूएई भारत के जरिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को नई मजबूती देना चाहता है, ताकि सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये की तिकड़ी के सामने वह कमजोर न पड़े.
  • आर्थिक ताकत का मेल: यूएई के पास भारी निवेश क्षमता है, जबकि भारत के पास विशाल बाजार, हाई-टेक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और बढ़ती स्ट्रैटेजिक पावर है. दोनों देशों की यह जोड़ी आगे चलकर आर्थिक और सामरिक, दोनों मोर्चों पर फायदे का सौदा बन सकती है.

कुल मिलाकर कहानी बेहद सीधी है. आसिम मुनीर भारत को घेरने और मिडिल ईस्ट में अपनी धाक जमाने निकले थे, लेकिन उनकी इसी जल्दबाजी ने यूएई को भारत की गोद में ला बिठाया. मक्का पैक्ट के जरिए पाकिस्तान जितना रौब दिखाना चाहता था, उसने यूएई को उतना ही भारत के करीब पहुंचा दिया. नतीजा यह हुआ कि मिडिल ईस्ट की राजनीति की डोर अब भारत के हाथों में पहले से कहीं ज्यादा मजबूती से आ गई है, और आने वाले महीनों में भारत-यूएई की यह नजदीकी रक्षा सौदों और रणनीतिक साझेदारी की नई शक्ल में सामने आ सकती है.

सवाल-जवाब

मक्का पैक्ट किसने और किसके बीच साइन किया?
मक्का पैक्ट सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्किये के साथ मिलकर साइन किया.
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच कितनी बड़ी डिफेंस डील हुई?
अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ करीब 5 अरब डॉलर, यानी लगभग 41 हजार करोड़ रुपये की डिफेंस डील को मंजूरी दी.
यूएई ने भारत की तरफ रुख क्यों किया?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये की नजदीकी से यूएई असुरक्षित महसूस करने लगा, इसलिए उसने भारत के साथ सैन्य नजदीकी बढ़ाई.
यूएई की तरफ से भारत में किसने दौरा किया?
मक्का पैक्ट और अमेरिका-सऊदी डील की खबरों के बीच यूएई एयरफोर्स के चीफ भारत के दौरे पर पहुंचे.
पाकिस्तान के आर्मी चीफ कौन हैं जिन्होंने मक्का पैक्ट पर दस्तखत किए?
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने मक्का पैक्ट पर दस्तखत किए.
इस पूरे घटनाक्रम से भारत को क्या फायदा मिल रहा है?
इससे भारत को पश्चिम एशिया में यूएई के साथ सैन्य और रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का मौका मिल रहा है.
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