जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में नरेश मीणा का चिकित्सीय परीक्षण और इलाज चल रहा है। सीने में दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, बेचैनी और घबराहट की शिकायतें सामने आने के बाद उन्हें टोंक से राजधानी जयपुर रेफर किया गया है। वर्तमान में उन्हें इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है, जहां उनकी सेहत से जुड़े विभिन्न टेस्ट किए जा रहे हैं।
टोंक के सआदत अस्पताल में क्या हुआ था
जेल प्रशासन द्वारा नरेश मीणा को सबसे पहले टोंक के सआदत अस्पताल में लाया गया था। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उनकी तुरंत ईसीजी, एक्स-रे और अन्य महत्वपूर्ण मेडिकल जांचें कीं। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू में भर्ती कर लिया था। हालांकि, टोंक के इस अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट यानी हृदय रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता न होने के कारण डॉक्टरों ने किसी भी प्रकार का जोखिम न लेते हुए उन्हें तुरंत किसी बड़े अस्पताल में भेजने का निर्णय लिया।
भारी सुरक्षा के बीच जयपुर रवाना किया गया
डॉक्टरों की सलाह मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने तुरंत हरकत में आते हुए नरेश मीणा को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल भेजने की व्यवस्था शुरू की। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत सआदत अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। कोतवाली इंचार्ज भंवर लाल वैष्णव समेत कई पुलिसकर्मी अस्पताल के अंदर और आईसीयू के बाहर मुस्तैद रहे। इसके बाद एक विशेष एंबुलेंस के जरिए उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जयपुर के लिए रवाना किया गया।
जेल में मुलाकात और तबीयत बिगड़ने का कारण
नरेश मीणा के स्वास्थ्य को लेकर यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने टोंक जेल पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी। चर्चा है कि इसी मुलाकात के दौरान नरेश मीणा ने अपने सीने में दर्द की बात कही थी, जिसे बाद में राजेंद्र गुढ़ा ने सार्वजनिक किया था। आज अचानक सेहत अधिक खराब होने पर उन्हें जेल से सीधे सआदत अस्पताल लाया गया था, जहां से उन्हें जयपुर रेफर कर दिया गया।
समरावता थप्पड़ कांड और न्यायिक हिरासत
गौरतलब है कि नरेश मीणा काफी समय से बहुचर्चित समरावता थप्पड़ कांड के सिलसिले में न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद चल रहे हैं। इस मामले में उन्हें एक बार अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में टोंक एससी-एसटी कोर्ट ने उस जमानत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत के इस नए फैसले के बाद नरेश मीणा ने स्वयं दोबारा सरेंडर कर दिया था और तब से वे टोंक जेल में ही बंद थे। अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने की इस घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है।




















