आइजोल में पेट्रोल पंपों के बंद रहने का संकट फिलहाल टल गया है क्योंकि राज्य सरकार के साथ हुई सफल बैठकों के बाद संबंधित संगठनों ने अपने आंदोलन के फैसले को वापस ले लिया है। मिजो जर्लई पावल और ऑल मिजोरम पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने बुधवार को राज्य प्रशासन के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को रद्द कर दिया।
सरकार के साथ उच्च स्तर पर हुई बैठक
यह राहत भरा फैसला राज्य के गृह सचिव वानलालमाविया और दोनों प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई औपचारिक बातचीत के बाद सामने आया है। इस बैठक में मुख्य रूप से पेट्रोल पंप संचालकों की सुरक्षा और गैर-आदिवासी लोगों द्वारा संचालित ईंधन स्टेशनों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। प्रशासन की तरफ से अपील किए जाने के बाद दोनों पक्षों ने नरमी दिखाई ताकि आम जनता को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
चंदे के विवाद और आरोपों पर स्थिति स्पष्ट
ऑल मिजोरम पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने पहले यह घोषणा की थी कि वे १७ सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे क्योंकि उनका आरोप था कि छात्र संगठन के सदस्यों ने गैर-मिजो संचालकों वाले कुछ पेट्रोल पंपों पर जाकर जबरन पैसे वसूले हैं। डीलर्स एसोसिएशन की शिकायत थी कि कुछ पंपों के प्रबंधकों से एक लाख बीस हजार रुपये की राशि छात्र संगठन को ट्रांसफर करने के लिए कहा गया था। डीलर्स ने इस धन को तुरंत वापस लौटाने और इस तरह की धन उगाही को पूरी तरह से बंद करने की मांग उठाई थी।
छात्र संगठन ने आरोपों को नकारा
दूसरी ओर मिजो जर्लई पावल ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या धमकाने का काम नहीं किया गया था। संगठन के अध्यक्ष डॉ. सी लालरेम्रुता ने स्पष्ट किया कि एक पेट्रोल पंप से प्राप्त हुई राशि पूरी तरह से स्वैच्छिक थी और उसे पंप मालिक ने संगठन के आगामी सम्मेलन के लिए अपनी मर्जी से दिया था। हालांकि इस विवाद के बीच छात्र संगठन ने गैर-आदिवासियों द्वारा संचालित या गैर-मिजो कर्मचारियों वाले सभी ईंधन स्टेशनों को भी १७ सितंबर से बंद करने का अलग से आह्वान कर दिया था।
बाहरी लोगों के व्यवसाय पर चिंता
छात्र संगठन का यह कदम राज्य में बाहरी लोगों द्वारा व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ती दखलअंदाजी को लेकर जताई जा रही चिंताओं का हिस्सा था। हालांकि मौजूदा हड़ताल को वापस ले लिया गया है, लेकिन मिजो जर्लई पावल ने यह भी साफ कर दिया है कि वे उन व्यवसायों के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखेंगे जो कथित तौर पर गैर-मिजो लोगों द्वारा मिजो नामों का इस्तेमाल करके चलाए जा रहे हैं।
आगामी सम्मेलन और कड़े कानूनों की मांग
डॉ. सी लालरेम्रुता ने जानकारी दी कि उनका संगठन आगामी २३ सितंबर से २५ सितंबर तक डार्लौन में आयोजित होने वाली अपनी सभा में इस गंभीर विषय को प्रमुखता से उठाएगा और सरकार से मांग करेगा कि मिजो नामों के पीछे छिपकर बाहरी लोगों द्वारा किए जा रहे व्यापार को रोकने के लिए और अधिक कड़े कानून बनाए जाएं।
स्थानीय लोगों से विशेष अपील
संगठन ने राज्य के निवासियों से भी यह अपील की है कि वे थोड़े से वित्तीय लाभ के लिए अपने नाम या जमीन का इस्तेमाल बाहरी लोगों को व्यावसायिक गतिविधियों के वास्ते न करने दें। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे व्यक्तिगत मुनाफे से ऊपर उठकर राज्य और मिजो समुदाय के व्यापक हितों को प्राथमिकता दें। बातचीत के दौरान ऑल मिजोरम पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी छात्र संगठन के खिलाफ अपनी सभी मांगों को वापस ले लिया है जिससे स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है।
























