मिजोरम सरकार ने राज्य में फर्जी और अमान्य दस्तावेजों के जरिए ली जा रही पारिवारिक पेंशन के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की है। राज्य प्रशासन ने फर्जी पेंशन दावों की पहचान करने और इस सिलसिले में लागू की गई माफी योजना के प्रति जनजागरूकता फैलाने के लिए स्थानीय गिरजाघरों के प्रमुखों से सहयोग मांगा है।
30 सितंबर तक PPO सरेंडर करने का अवसर
इस विशेष अभियान के तहत, गलत या फर्जी कागजात के आधार पर पारिवारिक पेंशन का लाभ उठा रहे अपात्र लाभार्थियों से स्वेच्छा से अपने पेंशन भुगतान आदेश (PPO) सरेंडर करने का आग्रह किया गया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ऐसे सभी अपात्र व्यक्तियों के लिए अपनी पेंशन स्वेच्छा से छोड़ने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है।
सूचना को व्यापक रूप से प्रसारित करने के उद्देश्य से, राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह विभिन्न चर्चों के प्रमुखों को पत्र भेजे थे। इन पत्रों में गिरजाघर अधिकारियों से अनुरोध किया गया था कि वे वित्त विभाग द्वारा 16 जून को जारी किए गए कार्यालय ज्ञापन को अपने समुदायों के बीच साझा करें और इसे नियमित प्रार्थना सभाओं के दौरान पढ़कर सुनाएं।
जनजागरूकता में धार्मिक सभाओं की भूमिका
मिजोरम के सामाजिक जीवन में गिरजाघरों के व्यापक प्रभाव को देखते हुए, प्रशासन का मानना है कि सामुदायिक प्रार्थना सभाओं में की गई घोषणाएं इस संदेश को हर घर तक पहुंचाने में बेहद कारगर सिद्ध होंगी। सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक लोग इस माफी योजना और PPO जमा करने की अंतिम समय सीमा के बारे में जान सकें।
अधिकारियों का कहना है कि चर्चों के माध्यम से इस योजना का प्रचार-प्रसार होने से अपात्र लाभार्थी बिना किसी झिझक के सामने आएंगे और अपने अवैध पेंशन दावों को वापस लेंगे। इससे राज्य सरकार को न केवल फर्जी मामलों को पकड़ने और उन्हें ठीक करने में मदद मिलेगी, बल्कि सरकारी खजाने से होने वाले अवैध खर्च पर भी लगाम लगाई जा सकेगी।



















