मिज़ोरम में रोज़गार और आजीविका के नए अवसर बनाने की दिशा में सरकार ने अपनी हैंडहोल्डिंग पहल को आगे बढ़ाया है. मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने शुक्रवार को आइज़ॉल स्थित इरिगेशन एंड वॉटर रिसोर्सेज कॉन्फ्रेंस हॉल में बाना काइह, यानी हैंडहोल्डिंग 3.0, के तीसरे चरण की शुरुआत की. इस चरण के तहत सरकार ने राज्य में लोगों को काम और आय के अतिरिक्त साधन देने वाले नए कदम प्रस्तावित किए हैं.
योजना का व्यापक दायरा
बाना काइह को केवल ऋण योजना या कृषि उपज खरीद कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा है. लालदुहोमा ने कहा कि इसके तहत सरकार के विकास कार्यक्रमों का एक व्यापक समूह चलाया जा रहा है. कृषि उपज खरीद, ऋण घटक और मुख्यमंत्री स्पेशल पैकेज इसके बेहतर जाने जाने वाले हिस्से हैं, लेकिन योजना इन तक सीमित नहीं है.
बुनियादी ढांचे और आजीविका से जुड़े प्रोजेक्टों में लुआंगमुअल में हल्दी प्रोसेसिंग उद्योग तथा सैरांग में अदरक प्रोसेसिंग इकाई शामिल हैं. मुख्यमंत्री इनोवेशन चैलेंज और मिज़ोरम हैंडहोल्डिंग वेंचर कैपिटल फंड भी इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा हैं. इन कार्यक्रमों से खेती उत्पादन, प्रोसेसिंग और वित्त सहायता को एक पहल के तहत रखा गया है.
सोलर ड्रायर और स्लाइसिंग मशीनों की खरीद भी योजना में शामिल है. गेहूं और मकई की अनुबंध खेती को भी कवर किया गया है, जबकि थेनज़ॉल में एनिमल हस्बेंड्री एंड वेटरिनरी फार्म के लिए सूखने के शेड और चारा निर्माण सुविधाएं प्रस्तावित हैं. यह दायरा दिखाता है कि उपकरण और फसल के बाद की सुविधाएं भी आजीविका योजना का हिस्सा मानी जा रही हैं.
लंबित वायदे और ऋण चुकौती
लालदुहोमा ने कहा कि सरकार के कई लंबे समय से चले आ रहे वायदे हैंडहोल्डिंग पहल के जरिए धीरे-धीरे पूरे किए जा रहे हैं. इनमें खेती उपज की खरीद, 100% ब्याज सब्सिडी के माध्यम से बिना ब्याज ऋण और सरकारी बैंक गारंटी देना शामिल है. मुख्यमंत्री ने इन सुविधाओं को योजना के तहत अमल में आ रहे विकास संकल्पों से जोड़ा.
मुख्यमंत्री ने साझेदार बैंकों के सहयोग की सराहना की और लाभार्थियों की ऋण चुकौती में हुई प्रगति को रेकॉर्ड किया. उन्होंने कहा कि हैंडहोल्डिंग योजना नैतिक सुधार की प्रक्रिया में भी योगदान दे रही है.
युवाओं और प्रोग्रेस पार्टनर्स के लिए प्रस्ताव
मिज़ोरम के बाहर रोज़गार तलाशने वाले युवाओं की मदद के लिए सरकार हैंडहोल्डिंग योजना के तहत फॉरिन प्लेसमेंट लोन लाने पर विचार कर रही है. यह सुविधा अभी विचाराधीन है.
तीसरे चरण में प्रोग्रेस पार्टनर्स के लिए एक पुनर्वास योजना भी प्रस्तावित की गई है. इसका दायरा उन साझेदारों को शामिल करेगा जिनकी परियोजनाएं उनके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण असफल हो गईं.
जैविक खेती और मजबूत निगरानी
कृषि के मामले में लालदुहोमा ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया. सरकार मिज़ोरम के बाहर से आने वाले रसायनिक उर्वरकों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करेगी. साथ ही, स्थानीय स्तर पर बने जैविक उर्वरकों का उत्पादन और उपयोग बढ़ाने की योजना है, जिससे जैविक उत्पादन को स्थानीय inputs से सहायता मिल सके.
परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिक मजबूत निगरानी की मांग की. उन्होंने कहा कि पर्याप्त फॉलो-अप न होने से राज्य में कई प्रोजेक्ट असफल हुए हैं, इसलिए कामों की नियमित देखरेख जरूरी है. यही चिंता तीसरे चरण में करीबी निगरानी की मांग का आधार है.
लाभार्थियों से अनुरोध किया गया कि वे कार्यान्वयन विभागों और साझेदार बैंकों से सहयोग करें और राशियों का सही उपयोग सुनिश्चित करें. धन का सही उपयोग योजना के आजीविका लक्ष्यों को पूरा करने से सीधे जुड़ा है.
लालदुहोमा ने हैंडहोल्डिंग योजना को विकसित भारत 2047 की दृष्टि का हिस्सा बताया. उन्होंने टीम मिज़ोरम से अपील की कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और नए आजीविका अवसर पैदा करने के लिए सभी मिलकर प्रयास करें.



















