मिजोरम लोक निर्माण विभाग ने सिहमुई और मुआलंगथु के बीच बनने वाली आइजोल बाईपास सड़क के निर्माण कार्य से प्रभावित हुए 185 भूस्वामियों के बीच 7.4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा बांटना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी है।
मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया और समयसीमा
यह अतिरिक्त मुआवजा राशि पीडब्ल्यूडी की प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट के माध्यम से वितरित की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के 23 अक्टूबर तक पूरा हो जाने की उम्मीद जताई गई है। यह कदम तब उठाया गया है जब कुछ दिन पहले ही आइजोल बाईपास रोड वेस्टर्न साइड लैंडओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी मांगें पूरी न होने पर 1 नवंबर से सड़क निर्माण का काम रोक देने की चेतावनी दी थी।
एसोसिएशन की मांगें और कुल स्वीकृत राशि
<ب>एसोसिएशन ने अक्टूबर के अंत तक 7.4 करोड़ रुपये का मुआवजा जारी करने की मांग उठाई थी और भुगतान प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता बरतने पर जोर दिया था। लोक निर्माण विभाग ने मुआवजे के मौजूदा चरण के लिए कुल 13.3 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। विभाग ने इस मुआवजे की पहली किस्त पिछले साल दिसंबर के महीने में जारी की थी।पीएम-देवलाइन योजना और स्थानीय आपत्तियां
यह बाईपास परियोजना पीएम-देवलाइन योजना के तहत कार्यान्वित की जा रही है, जिसे भूमि अधिग्रहण और उपयोग से जुड़ी चिंताओं के साथ-साथ मुआवजे के भुगतान को लेकर भूस्वामियों की तरफ से आपत्तियों का सामना करना पड़ा है। गत 6 अक्टूबर को एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि सिहमुई से मुआलंगथु तक भूमि अधिग्रहण के दायरे में लगभग 348 लोग प्रभावित हुए हैं और मुआवजा प्रक्रिया में अनियमितताएं तथा पारदर्शिता की कमी है।
आरटीआई के आंकड़े और अन्य शिकायतें
एसोसिएशन ने यह भी दावा किया कि पीडब्ल्यूडी के आधिकारिक आंकड़ों और आरटीआई के तहत दी गई जानकारी में विसंगतियां हैं। उनके अनुसार, आधिकारिक डेटा में केवल 17 लाभार्थियों को भुगतान मिलना बाकी बताया गया था, जबकि वास्तविकता में 100 से अधिक भूस्वामी मुआवजे का इंतजार कर रहे थे। एसोसिएशन ने विभाग से मांग की थी कि वह सभी लाभार्थियों के नाम और उन्हें दी गई राशि की सूची सार्वजनिक करे। इसके अलावा, जिन लोगों ने मौद्रिक मुआवजे के बजाय भूमि बंदोबस्त प्रमाण पत्र का विकल्प चुना था, उनकी भूमि की तत्काल पैमाइश कराने की भी मांग की गई थी।
अन्य प्रमुख मांगें और समाधान
इस परियोजना से प्रभावित होने वाले स्टोन खदान मालिकों के दावों का निपटान करना, मलबे को तय डंपिंग साइट्स पर ही सही तरीके से ठिकाने लगाना और भूस्खलन या मिट्टी डंपिंग के कारण नष्ट हुई फसलों व बागों का मुआवजा देना भी उनकी अन्य मांगों में शामिल था।























