नशे के खिलाफ चलाए जा रहे प्रयासों में मिज़ोरम पूरे देश में सबसे आगे निकल आया है। ऐज़ॉल से अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि केंद्र सरकार के एक बड़े अभियान के तहत राज्य के काम को देश में नंबर वन आंका गया है।
सम्मान कैसे मिला
अधिकारियों के मुताबिक गुरुवार को हुई एक बैठक में यह जानकारी दी गई, जिसकी अध्यक्षता सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के केंद्रीय सचिव ने की। इस बैठक में मिज़ोरम को नशा मांग में कमी लाने की राष्ट्रीय कार्ययोजना यानी NAPDDR के तहत देश का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया। यह योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय पूरे देश में चला रहा है।
NAPDDR योजना असल में करती क्या है
इस योजना के तहत चार बड़े काम किए जाते हैं, लोगों को नशे की लत से पहले ही बचाना, जो लोग पहले से नशे के शिकार हैं उन्हें इलाज और पुनर्वास देना, नशा छोड़ चुके लोगों के लिए सहयोग व्यवस्था मजबूत करना, और इस काम में जुटे कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना। योजना में खास जोर बच्चों और युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने पर दिया गया है, क्योंकि यही उम्र वर्ग सबसे पहले नशे की चपेट में आता है।
राज्य से लेकर ब्लॉक तक की जिम्मेदारी
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यक्रम राज्य, जिला और ब्लॉक, तीनों स्तर पर चलाया जा रहा है। राज्य स्तर पर इसकी निगरानी समाज कल्याण मंत्री लालरिनपुई करती हैं, जबकि जिलों में इसे जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी उपायुक्तों के पास है।
चर्च और स्वयंसेवी संस्थाओं का साथ
सरकारी विभागों के अलावा राज्य ने चर्च और स्वयंसेवी संगठनों को भी इस मुहिम से जोड़ा है, ताकि इसका दायरा और बड़ा हो सके। इस साझा कोशिश में महिलाओं और बच्चों को नशे के दुष्प्रभाव से बचाने पर खास ध्यान दिया गया है।
नियमित रिपोर्टिंग और एक और अभियान साथ साथ
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मिज़ोरम अपने नशा विरोधी काम की प्रगति रिपोर्ट लगातार केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को भेजता रहता है। इसी के साथ राज्य के हर जिले में नशा मुक्त भारत अभियान यानी NMBA भी NAPDDR के ढांचे के तहत चलाया जा रहा है।
टॉप रैंकिंग की वजह क्या रही
अधिकारियों के अनुसार मिज़ोरम की इस पहली रैंकिंग के पीछे राज्य और जिला प्रशासन, चर्च और स्वयंसेवी संगठनों के बीच मजबूत तालमेल की बड़ी भूमिका रही। उनका कहना है कि किसी अकेले कदम से नहीं बल्कि इन सबकी साझा मेहनत से ही मिज़ोरम को नशे की मांग घटाने के मामले में देश का अग्रणी राज्य होने की पहचान मिली।


















