मिज़ोरम सरकार की हेल्थ इंश्योरेंस योजना से अब तक 3.2 लाख से ज्यादा परिवार जुड़ चुके हैं, और अधिकारियों के मुताबिक 2025 में योजना शुरू होने के बाद से इलाज पर 271 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं।
किन-किन को मिला योजना का फायदा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुड़े परिवारों में 48,091 सामान्य लाभार्थी परिवार हैं, 35,325 परिवार सरकारी कर्मचारियों से जुड़े हैं, जबकि 11,928 परिवार पेंशनभोगियों के हैं। इसके अलावा 2,26,899 लाभार्थी केंद्र की AB-PMJAY योजना के तहत कवर हैं, जिसे राज्य ने अपनी MUHCS योजना के साथ जोड़ दिया है, यानी केंद्रीय योजना के लाभार्थियों को भी राज्य की अतिरिक्त सुविधा मिल जाती है।
दो चरणों में आगे बढ़ी योजना
मिज़ोरम यूनिवर्सल हेल्थकेयर स्कीम यानी MUHCS को ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट यानी ZPM सरकार ने मार्च 2025 में शुरू किया था। मुख्यमंत्री लालडुहोमा के नेतृत्व वाली इस सरकार ने सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ मिज़ोरम के अंदर और बाहर के सूचीबद्ध निजी और चर्च द्वारा चलाए जा रहे अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज की सुविधा दी। योजना का दूसरा चरण इस साल मार्च में शुरू हुआ। पहले चरण में एक लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ था, जिस पर सरकार ने 171.57 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि 4,772 मरीजों को खास इलाज के लिए मिज़ोरम से बाहर के अस्पतालों में भेजा गया। MUHCS 2.0 के तहत 24 अगस्त तक 31,832 मरीज इलाज करा चुके हैं, और इस पर 99.60 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।
किसे कितना प्रीमियम चुकाना पड़ता है
योजना में कवरेज और प्रीमियम लाभार्थी की कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग है। सामान्य लाभार्थियों को सालाना 5 लाख रुपए तक का हेल्थ कवर मिलता है, जिसके लिए वे अपनी पसंद के वॉर्ड के हिसाब से 2,500 से 10,000 रुपए तक प्रीमियम चुकाते हैं। सरकारी कर्मचारी, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट और मस्टर-रोल पर काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं, हर महीने 200 से 1,500 रुपए देकर अनलिमिटेड मेडिकल कवरेज पाते हैं। पेंशनभोगी और उनके पति या पत्नी को सालाना 2 लाख रुपए तक का कवर मिलता है, बशर्ते वे अपना मंथली मेडिकल अलाउंस छोड़ दें।
अस्पतालों का नेटवर्क और बकाया दावे
फिलहाल मिज़ोरम में 20 निजी अस्पताल और पांच डे-केयर सेंटर योजना से जुड़े हैं, जबकि राज्य के बाहर के 53 निजी अस्पताल भी इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा बाहर के 11 और अस्पतालों को डीम्ड एम्पैनलमेंट का दर्जा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सूचीबद्ध किसी भी अस्पताल का कोई बकाया नहीं है, हालांकि 25 करोड़ रुपए से ज्यादा के दावे, जिनमें अस्पताल के बिल और 1,757 रीइम्बर्समेंट क्लेम शामिल हैं, अभी प्रोसेस में हैं और इन्हें चरणों में निपटाया जाएगा।





















