मुंबई के मीरा रोड में रहने वाले एक 81 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी साढ़े तीन दशक पुरानी जमीन की जंग में न्याय पाने के लिए देश के प्रधानमंत्री और अपने बचपन के स्कूल के साथी नरेंद्र मोदी का दरवाजा खटखटाया है। असगर अली वोहरा नाम के इस बुजुर्ग ने, जिन्होंने कभी प्रधानमंत्री के साथ एक ही कक्षा में बैठकर पढ़ाई की थी, इस पेचीदा जमीन विवाद में दखल देने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की गुहार लगाई है। उन्हें उम्मीद है कि बचपन का यह पुराना रिश्ता अब उनकी दशकों लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई को खत्म करने में मददगार साबित होगा।
सहपाठी से मुलाकात और न्याय की उम्मीद
असगर अली वोहरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडनगर में स्थित बीएन स्कूल में एक साथ शिक्षा ग्रहण की थी। बीते 8 सितंबर को वोहरा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और अपने साथ हुई नाइंसाफी की पूरी कहानी बयां की। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री की तरफ से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद वोहरा के मन में न्याय की उम्मीद एक बार फिर से जग गई है और दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई को अब एक नई दिशा मिलती दिख रही है।
35 साल पुराना भूमि विवाद और अवैध कब्जे के आरोप
इस विवाद की शुरुआत करीब 35 साल पहले हुई थी, जब वोहरा ने साल 1989 में मीरा रोड के भायंदर ईस्ट स्थित नवघर क्षेत्र में लगभग 2,810 वर्गमीटर जमीन खरीदी थी। वोहरा का दावा है कि कई वर्षों तक इस जमीन पर उनका पूरा और शांतिपूर्ण अधिकार रहा। हालांकि, साल 2011 में इस मामले ने एक नया और विवादित मोड़ ले लिया। वोहरा ने आरोप लगाया कि स्वयं बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने उनकी इस कीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया और उन्हें अपनी ही संपत्ति से बेदखल कर दिया।
फर्जी कागजात के जरिए धोखाधड़ी के आरोप
यह मामला केवल जमीन पर अवैध कब्जे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बड़े पैमाने पर जालसाजी के आरोप भी शामिल हैं। वोहरा का कहना है कि उनकी जानकारी के बिना ही जमीन के मालिकाना हक से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए गए। इन जाली कागजातों के आधार पर जमीन को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया और दोनों बिल्डर कंपनियों के नाम पर कागजों में कब्जा दर्ज करा दिया गया। इस कथित धोखाधड़ी के खिलाफ वोहरा लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों और जांच एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं।
साल 2015 में FIR और लगातार संघर्ष
इस गंभीर भूमि विवाद के संबंध में साल 2015 में एक FIR भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद मामला सालों से कोर्ट-कचहरी के चक्करों में फंसा हुआ है। वोहरा के अनुसार, उन्होंने न्याय पाने के लिए राजस्व विभाग, स्थानीय नगर निगम और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों से कई बार संपर्क साधा, लेकिन उन्हें कहीं से भी कोई ठोस मदद नहीं मिली। इसी प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर आखिरकार उन्होंने सीधे अपने पुराने सहपाठी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने का फैसला किया।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद प्रशासनिक हलचल
प्रधानमंत्री से वोहरा की इस मुलाकात का असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है। इस मुलाकात के बाद स्थानीय प्रशासन अचानक हरकत में आ गया है और इस जमीन विवाद को सुलझाने के लिए आगामी 16 सितंबर को एक औपचारिक सुनवाई तय की गई है। इस सुनवाई में शामिल होने के लिए सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस और स्वयं बिल्डर्स के प्रतिनिधियों को भी हाजिर रहने का सख्त निर्देश दिया गया है। ऐसे में जिस मामले में वोहरा सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, वहां अब त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद दिख रही है।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असगर अली वोहरा की इस मुलाकात की तस्वीरें और प्रेस विज्ञप्ति जारी किए जाने के बाद यह मामला अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया। वोहरा के लिए यह केवल एक कानूनी लड़ाई का मंच नहीं था, बल्कि बचपन के दोस्त से मिलकर पुरानी यादों को ताजा करने का एक बेहद भावुक पल भी था। अब सभी की निगाहें 16 सितंबर को होने वाली प्रशासनिक सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या 35 साल पुरानी इस कानूनी जंग का कोई ठोस नतीजा निकलेगा या नहीं।



















