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मिजोरम में आंखें दान करने का संकल्प लेने वालों की संख्या 9,345 हुई, 33 छात्र जुड़ेमिजोरम
8 सित॰ 2026, 7:22 pm (46 मिनट पहले)· 2

मिजोरम में आंखें दान करने का संकल्प लेने वालों की संख्या 9,345 हुई, 33 छात्र जुड़े

मिजोरम में मरने के बाद आंखें दान करने का संकल्प लेने वालों की संख्या अब 9,345 हो गई है, हाल ही में हुए एक कार्यक्रम में 33 छात्र इस सूची में शामिल हुए।

मिजोरम में मरने के बाद आंखें दान करने का संकल्प लेने वालों की सूची में 33 और छात्रों के नाम जुड़ गए हैं, जिससे राज्य में कुल संकल्पित नेत्रदाताओं की संख्या 9,345 पर पहुंच गई है।

नेत्रदान पखवाड़े के दौरान लिया संकल्प

यह नए संकल्प सोमवार को आइजोल में आयोजित 41वें नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम के दौरान लिए गए, जहां छात्रों के एक समूह ने मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने के लिए औपचारिक रूप से पंजीकरण कराया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रधान निदेशक डॉ. लालथलेंगलियानी ने मंगलवार को यह जानकारी दी कि इन छात्रों के जुड़ने से राज्य में संकल्पित दाताओं की संख्या बढ़कर 9,345 हो गई है।

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जागरूकता बढ़ने से बढ़ रहे हैं संकल्प

डॉ. लालथलेंगलियानी के मुताबिक, कॉर्निया दान की प्रक्रिया और इससे कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से जूझ रहे मरीजों को नई रोशनी मिलने की संभावना को लेकर लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है, और यही वजह है कि संकल्प लेने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मृत्यु के बाद निकाली गई कॉर्निया को सीमित समय के भीतर मरीज में प्रत्यारोपित किया जाए तो उसकी खोई हुई नजर वापस लौटाई जा सकती है।

आई बैंक की शुरुआत से अब तक के आंकड़े

मिजोरम में आई बैंक की शुरुआत 31 जुलाई 2008 को हुई थी, और इसके करीब सवा साल बाद यानी 25 सितंबर 2009 को राज्य में पहली सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण सर्जरी हुई। तब से लेकर अब तक 632 लोग मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान कर चुके हैं, जबकि फिलहाल 400 मरीज कॉर्निया पाने के लिए आई बैंक में प्राप्तकर्ता के रूप में पंजीकृत हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में जुलाई तक आई बैंक ने 42 कॉर्निया प्राप्त कीं, वहीं इस दौरान 23 कॉर्निया प्रत्यारोपण सर्जरी भी पूरी की जा चुकी हैं।

दानदाता परिवारों को किया गया सम्मानित

इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में वर्ष 2025-26 के दौरान अपने परिजनों की आंखें दान करने वाले 67 परिवारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। अधिकारियों के मुताबिक कॉर्निया दान एक समय की पाबंदी वाली मेडिकल प्रक्रिया है, क्योंकि मृतक दाता की कॉर्निया को जल्द से जल्द निकालकर कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित पात्र मरीज को प्रत्यारोपित करना जरूरी होता है, तभी उसकी नजर लौटने की उम्मीद बनती है।

सवाल-जवाब

मिजोरम में अब तक कितने लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है?
33 छात्रों के हाल ही में जुड़ने के बाद राज्य में संकल्पित नेत्रदाताओं की संख्या 9,345 हो गई है।
छात्रों ने संकल्प कहां और कब लिया?
सोमवार को आइजोल में आयोजित 41वें नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने संकल्प लिया।
मिजोरम में अब तक वास्तव में कितने लोग मृत्यु के बाद आंखें दान कर चुके हैं?
अब तक 632 लोग मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान कर चुके हैं।
राज्य में कितने मरीज कॉर्निया पाने के इंतजार में हैं?
फिलहाल 400 मरीज आई बैंक में प्राप्तकर्ता के रूप में पंजीकृत हैं।
मिजोरम का आई बैंक कब शुरू हुआ और पहला प्रत्यारोपण कब हुआ था?
आई बैंक की शुरुआत 31 जुलाई 2008 को हुई थी और पहली सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण सर्जरी 25 सितंबर 2009 को हुई थी।
इस वित्त वर्ष में अब तक कितने कॉर्निया प्रत्यारोपण हुए हैं?
जुलाई तक 42 कॉर्निया प्राप्त की गई हैं और 23 कॉर्निया प्रत्यारोपण सर्जरी पूरी की जा चुकी हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 मिनट पहले

यह खबर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक चेतना के एक सकारात्मक पहलू को दर्शाती है। हालाँकि आपराधिक मामलों और कानून-व्यवस्था के बीच ऐसे सकारात्मक सामाजिक कदम यह साबित करते हैं कि जागरूकता अभियानों से जनसहयोग बढ़ सकता है। स्वास्थ्य प्रशासन और कानूनी प्रावधानों के तहत मृतक अंगों के दान की यह पारदर्शी प्रक्रिया भविष्य में प्रतीक्षा सूची में शामिल 400 मरीजों के लिए न्याय और जीवन की नई उम्मीद साबित हो सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·32 मिनट पहले

यह सामाजिक पहल दर्शाती है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ रही है। 632 लोगों द्वारा नेत्रदान और वर्तमान में 400 मरीजों की प्रतीक्षा सूची यह संकेत देती है कि मांग और आपूर्ति के इस अंतर को पाटने के लिए जागरूकता अभियानों को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और डिजिटल मंचों से जोड़कर व्यापक स्तर पर विस्तारित करने की आवश्यकता है, ताकि समय-संवेदनशील इस प्रक्रिया का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक पहुँच सके।

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