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मिजोरम में सरकारी फंड पर नजर रखने के लिए आठ बैंकों के साथ नई व्यवस्था लागूमिजोरम
7 सित॰ 2026, 7:24 pm (45 मिनट पहले)· 2

मिजोरम में सरकारी फंड पर नजर रखने के लिए आठ बैंकों के साथ नई व्यवस्था लागू

मिजोरम सरकार ने सोमवार को आठ बैंकों के साथ करार कर 'वन डिपार्टमेंट, वन बैंक' व्यवस्था शुरू की, ताकि सरकारी विभागों के फंड पर बेहतर निगरानी रखी जा सके।

मिजोरम सरकार ने सोमवार को आठ बैंकों के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए, जिसके तहत 'वन डिपार्टमेंट, वन बैंक' (ODOB) नाम की नई व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसका मकसद अलग अलग विभागों में सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर वित्त विभाग की पैनी और तेज नजर बनाए रखना है। यह समझौता मुख्यमंत्री कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ, जहां मुख्यमंत्री लालडुहोमा और वित्त एवं योजना विभाग के मुख्यमंत्री सलाहकार टीबीसी लालवेनछुंगा मौजूद रहे।

कैग की रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ी

लालडुहोमा ने बताया कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्टों में बार-बार यह बात सामने आई कि आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के खातों में सरकार का बड़ा पैसा जमा रहता है, जबकि वित्त विभाग को इसकी भनक तक नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब विभाग ऐसे फंड की जानकारी मांगता है, तो कई बार पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा, "हमने 'वन डिपार्टमेंट, वन बैंक' व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।" उनके मुताबिक इससे सरकारी फंड की निगरानी पहले से कहीं बेहतर हो सकेगी।

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पहले चरण में आठ विभाग शामिल

मुख्यमंत्री के मुताबिक, पहले चरण में यह व्यवस्था आठ विभागों पर लागू होगी और आगे जरूरत के हिसाब से और विभागों को इसमें जोड़ा जाएगा। किस विभाग का खाता किस बैंक में रहेगा, इसका ब्योरा अभी तय होना बाकी है और अधिकारियों के मुताबिक इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। इस व्यवस्था से जुड़े आठ बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, मिजोरम रूरल बैंक और मिजोरम कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक शामिल हैं।

कुछ योजनाएं इस दायरे से बाहर रह सकती हैं

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि कुछ योजनाओं के लिए पहले से ही अपनी अलग मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय है, जो बताती है कि उनका पैसा किस तरह इस्तेमाल और स्थानांतरित होगा। जहां मौजूदा व्यवस्था के चलते किसी योजना को ODOB में शामिल करना मुश्किल होगा, वहां उसे इस नई व्यवस्था से बाहर ही रखा जा सकता है।

क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो बढ़ाने का लक्ष्य

लालडुहोमा ने इस मौके पर मिजोरम के क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो का भी जिक्र किया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे बना हुआ है। कार्यक्रम में बताए गए आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में यह अनुपात असम में 73.52 प्रतिशत, नागालैंड में 61.1 प्रतिशत और त्रिपुरा में 61 प्रतिशत रहा, जबकि मिजोरम में सिर्फ 55.83 प्रतिशत। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस आंकड़े को 2028-29 तक कम से कम 67 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है और इसके लिए उन्होंने मिजोरम में काम कर रहे बैंकों से मिलकर प्रयास करने की अपील की।

सवाल-जवाब

'वन डिपार्टमेंट, वन बैंक' योजना क्या है?
यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें मिजोरम के हर सरकारी विभाग को एक तय बैंक से जोड़ा जाएगा, ताकि वित्त विभाग सरकारी फंड की आवाजाही पर बेहतर नजर रख सके।
यह समझौता कब हुआ?
यह समझौता सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ।
इसमें कौन-कौन से बैंक शामिल हैं?
भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, मिजोरम रूरल बैंक और मिजोरम कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक।
पहले चरण में कितने विभाग शामिल होंगे?
पहले चरण में आठ विभाग शामिल होंगे, बाद में जरूरत के हिसाब से और विभाग जोड़े जाएंगे।
यह योजना क्यों शुरू की गई?
कैग की ऑडिट रिपोर्टों में बार-बार यह सामने आया कि DDO खातों में सरकारी फंड जमा रहता है, जिसकी वित्त विभाग को पूरी जानकारी नहीं होती।
क्या हर योजना ODOB के दायरे में आएगी?
नहीं, जिन योजनाओं की अपनी अलग SOP पहले से तय है, उन्हें लागू करना मुश्किल होने पर इस दायरे से बाहर रखा जा सकता है।
मिजोरम का मौजूदा क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो कितना है?
2025-26 में यह 55.83 प्रतिशत रहा, जबकि असम में 73.52 प्रतिशत, नागालैंड में 61.1 प्रतिशत और त्रिपुरा में 61 प्रतिशत रहा।
सरकार का CD रेशियो लक्ष्य क्या है?
सरकार 2028-29 तक मिजोरम का CD रेशियो कम से कम 67 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 मिनट पहले

कैग की रिपोर्टों के आधार पर मिजोरम सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम वित्तीय पारदर्शिता और लोक धन के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक सुधार है। 'वन डिपार्टमेंट, वन बैंक' व्यवस्था से आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के खातों में छिपे फंड की आवाजाही पर वित्त विभाग की सीधी नजर रहेगी। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कुछ योजनाओं को इस दायरे से बाहर रखने के अपवाद का भविष्य में वित्तीय निगरानी पर कितना असर पड़ता है। साथ ही, कम क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो को सुधारने का यह प्रयास राज्य के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में कितना मददगार साबित होता है, यह आगामी वर्षों में इसकी प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 मिनट पहले

मुख्यमंत्री लालडुहोमा का यह कदम वित्तीय अनुशासन की बहाली के लिए एक साहसी राजनीतिक और प्रशासनिक पहल है, विशेषकर तब जब कैग की रिपोर्टों में डीदो खातों की अस्पष्टता बार-बार उजागर हुई थी। हालांकि, पहले चरण में केवल आठ विभागों को शामिल करना और कुछ योजनाओं को छूट देना यह दर्शाता है कि नौकरशाही के भीतर मौजूदा व्यवस्थाओं से तालमेल बिठाना आसान नहीं होगा। इसके अलावा, 2028-29 तक क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो को 67 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है जब सरकार और बैंक मिलकर जमीनी स्तर पर ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन को तेज करें, अन्यथा यह केवल कागजी आंकड़ा बनकर रह जाएगा।

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