अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब और दैनिक खर्चों को प्रभावित करने वाले कई वित्तीय बदलाव प्रभावी हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण ऊर्जा संकट और महंगाई का दबाव बना हुआ है, लेकिन इसके बीच तेल विपणन कंपनियों ने कई उत्तरी शहरों में सीएनजी और पीएनजी के दामों में कोई फेरबदल न करते हुए कीमतों को स्थिर रखा है। हालिया समय में महाराष्ट्र, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में सीएनजी दरों में बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसके बाद इस महीने की स्थिरता उपभोक्ताओं के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
देश के प्रमुख शहरों में सीएनजी की मौजूदा कीमतें
अक्टूबर महीने में नई दरें लागू न होने से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में सीएनजी 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम के पुराने स्तर पर ही बिक रही है, जो देश के कई अन्य बड़े शहरों की तुलना में सस्ती है। दक्षिण और मध्य भारत के प्रमुख केंद्रों की बात करें तो चेन्नई, भरतपुर और देवास में सीएनजी की कीमत 97.50 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। इसके अलावा बैंगलोर में वाहन चालकों को 97 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान करना पड़ रहा है।
उत्तर भारत के अन्य प्रमुख औद्योगिक और उपनगरीय शहरों में भी दरें अलग-अलग स्तर पर दर्ज की गई हैं। हरियाणा के सोनीपत में सीएनजी 94 रुपये प्रति किलोग्राम, रेवाड़ी में 91.54 रुपये और 91.59 रुपये के स्तर पर तथा उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में 99 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रही है। मेरठ में दर 93.50 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज है, जबकि मथुरा में यह 100 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है।
राज्यों में सीएनजी की दरों का ताजा आंकड़ा
राज्यों के स्तर पर हालिया संशोधनों के बाद कीमतों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला है। बिहार में सबसे बड़ा इजाफा दर्ज किया गया, जहां कीमत में 7 रुपये की बढ़ोतरी के साथ भाव 93 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। महाराष्ट्र में 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दर 88 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जबकि ओडिशा में 0.24 रुपये की मामूली वृद्धि के साथ यह 93.50 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
इसके विपरीत कुछ राज्यों में दरों में कटौती भी दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश में सीएनजी की कीमत में 3.75 रुपये की कमी दर्ज की गई, जिससे भाव 95.75 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। पश्चिम बंगाल में 6 रुपये की राहत मिलने के बाद दर 93.50 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। झारखंड में भी 0.15 रुपये की मामूली कमी के साथ कीमत 94.50 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है।
अन्य राज्यों की स्थिति देखें तो तेलंगाना में सीएनजी सबसे महंगी 112 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है, जबकि जम्मू और कश्मीर में यह 105.80 रुपये और हिमाचल प्रदेश में 100.50 रुपये प्रति किलोग्राम है। आंध्र प्रदेश में भाव 99.80 रुपये, हरियाणा में 99.70 रुपये, उत्तराखंड में 99.50 रुपये, केरल में 99 रुपये, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में 99 रुपये प्रति किलोग्राम है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु में यह 97.50 रुपये, कर्नाटक में 97 रुपये, चंडीगढ़ में 93.80 रुपये, पंजाब में 91.33 रुपये, गुजरात में 88.76 रुपये तथा पांडिचेरी में सबसे सस्ती 79.50 रुपये प्रति किलोग्राम उपलब्ध है।
सीएनजी का महत्व और तकनीकी पहलू
कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी सीएनजी को पेट्रोल, डीजल, गैसोलीन और एलपीजी के एक स्वच्छ और प्रभावी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसका निर्माण प्राकृतिक गैस को अत्यधिक दबाव में संपीड़ित करके किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस शामिल होती है। इस प्रक्रिया में गैस का आयतन मूल आयतन के 1 प्रतिशत से भी कम कर दिया जाता है। पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव न डालने के कारण इसे सुरक्षित और टिकाऊ ईंधन माना जाता है।
रसोई गैस पीएनजी की कीमतों में स्थिरता
घरेलू उपयोग में एलपीजी सिलेंडर के सीधे विकल्प के रूप में लोकप्रिय पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की दरों में भी अक्टूबर महीने के लिए स्थिरता देखी गई है। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में पीएनजी 49.50 रुपये और 49.59 रुपये प्रति एससीएम पर उपलब्ध है। कोलकाता में यह 50 रुपये प्रति एससीएम, जबकि मुंबई और चेन्नई में 52 रुपये प्रति एससीएम के भाव पर मिल रही है।
दिल्ली-एनसीआर से सटे गुड़गांव में पीएनजी सबसे सस्ती 48.40 रुपये प्रति एससीएम के स्तर पर मिल रही है, जबकि भुवनेश्वर में यह 49 रुपये और नोएडा में 49.46 रुपये प्रति एससीएम दर्ज की गई है। जयपुर में इसका भाव 51.50 रुपये, तिरुवनंतपुरम में 51 रुपये, पटना में 52.50 रुपये और बैंगलोर में 53 रुपये प्रति एससीएम है। दूसरी ओर चंडीगढ़ में पीएनजी सबसे महंगी 57.48 रुपये प्रति एससीएम है, इसके बाद लखनऊ में 56.50 रुपये और हैदराबाद में 56 रुपये प्रति एससीएम दर्ज की गई है।
पीएनजी की विशेषताएं और सुरक्षा
पीएनजी का उत्पादन भी मुख्य रूप से मीथेन आधारित प्राकृतिक गैस से होता है, जिसे भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सीधे घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जाता है। यह एलपीजी की तुलना में काफी कम विषैली होती है और इसका दहन पूरी तरह स्वच्छ होता है। हवा से हल्की होने के कारण रिसाव की स्थिति में यह वायुमंडल में तेजी से फैल जाती है, जिससे आग लगने या दुर्घटनाओं का खतरा बहुत कम हो जाता है।



















