भारतीय परिवारों में सदियों से सोना सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद संपत्ति रहा है, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा केवल तिजोरियों और बैंक लॉकरों में बंद पड़ा रहता है। शादियों और खास अवसरों पर खरीदे गए पारंपरिक आभूषण साल के ज्यादातर दिन किसी काम नहीं आते। इस स्थिति को बदलने और घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को कमाई का जरिया बनाने के लिए सेफगोल्ड ने एक डिजिटल अभियान के जरिए अपनी ओल्ड गोल्ड लीजिंग योजना को सामने रखा है। इस नए विज्ञापन में टीवीएफ ट्रिपलिंग के अभिनेता अमोल पराशर अपने ही घर के ड्राइंग रूम में एक शार्क टैंक जैसी बैठक में हिस्सा लेते दिखते हैं, जहां वे अपने माता-पिता और पत्नी के सामने घर के पुराने गहनों को निवेश में बदलने का प्रस्ताव रखते हैं। यह पारिवारिक चर्चा दरअसल देश भर के उन लाखों परिवारों की आम दुविधा को दर्शाती है जो अपने पारंपरिक सोने की सुरक्षा और उसके वास्तविक उपयोग को लेकर हमेशा संशय में रहते हैं।
घरों में बंद विशाल संपत्ति और आर्थिक चुनौतियां
भारत में परिवारों के पास मौजूद सोने की कुल मात्रा को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आते रहे हैं, क्योंकि इस संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा औपचारिक बही-खातों में दर्ज नहीं है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल लंबे समय से यह अनुमान लगाता रहा है कि भारतीय घरों में करीब 25,000 टन सोना मौजूद है। वहीं मॉर्गन स्टेनली के एक विश्लेषण के मुताबिक जून 2025 तक भारत की संचयी सोने की होल्डिंग लगभग 34,600 टन आंकी गई थी। इसके अलावा कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 तक भारतीय परिवारों के पास मौजूद इस सोने का कुल मूल्य लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। इतनी भारी संपत्ति होने के बावजूद, यह घरेलू सोना बाजार के भाव में आने वाले उतार-चढ़ाव के अलावा परिवार के लिए कोई अतिरिक्त मासिक या सालाना आमदनी पैदा नहीं करता।
सरकारी स्तर पर इस निष्क्रिय सोने को मुख्य वित्तीय प्रणाली में लाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए हैं। सरकार द्वारा शुरू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम इसका सबसे प्रमुख उदाहरण रही है, हालांकि आम परिवारों की तरफ से इसमें बहुत सीमित भागीदारी देखने को मिली। इस सुस्ती की वजह केवल जानकारी का अभाव नहीं थी। असल में परिवारों को इस बात की चिंता सताती रही है कि लीज पर दिए गए उनके सोने की सुरक्षा का क्या होगा, जिस संस्था को वे सोना सौंप रहे हैं उस पर कितना भरोसा किया जा सकता है, और पूरी प्रक्रिया में कागजी जटिलताएं कितनी अधिक हैं। सेफगोल्ड अपनी इस नई पेशकश के जरिए इन्हीं व्यावहारिक अड़चनों को दूर करने का दावा कर रहा है।
सर्राफा बाजार की लीजिंग व्यवस्था अब आम परिवारों के लिए
बुलियन और थोक आभूषण व्यापार में सोने को लीज पर देना एक लंबे समय से चली आ रही मान्य परंपरा है। बड़े आभूषण निर्माता और खुदरा विक्रेता अपने दैनिक कार्यशील स्टॉक के लिए बाजार से भौतिक सोना उधार लेते हैं और इसके बदले तय दर से लीज शुल्क चुकाते हैं, जिसका भुगतान भी आमतौर पर सोने के रूप में ही किया जाता है। अब तक आम परिवारों के लिए अपने निजी गहनों के साथ इस तरह के संस्थागत बाजार का हिस्सा बनने का कोई सीधा और पारदर्शी रास्ता उपलब्ध नहीं था।
कंपनी के अनुसार भारतीय परिवार बचत के मामले में दुनिया भर में सबसे अनुशासित माने जाते हैं, लेकिन उनकी यह सबसे बड़ी बचत हमेशा स्थिर पड़ी रही है। घर के अनौपचारिक माहौल में की गई चर्चा के जरिए इस विषय को उठाया गया है ताकि लोग समझ सकें कि सोना उनके पास सुरक्षित रहते हुए भी हर महीने कैसे अतिरिक्त रिटर्न कमा सकता है।
योजना की कार्यप्रणाली और शहरों में उपलब्धता
सेफगोल्ड की इस ओल्ड गोल्ड लीजिंग योजना के तहत ग्राहक अपने पुराने आभूषण, सिक्के, बार या टूटे हुए सोने के टुकड़े लेकर अधिकृत पार्टनर स्टोर पर जा सकते हैं। इस योजना के लिए न्यूनतम शुद्धता 14 कैरेट तय की गई है। वर्तमान में यह सुविधा ब्लूस्टोन के पार्टनर स्टोर्स पर देश के सात प्रमुख शहरों में शुरू की जा चुकी है, जिनमें मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे शामिल हैं।
स्टोर पर पहुंचने के बाद गहनों का सटीक वजन किया जाता है और आधुनिक तकनीकों से उनकी शुद्धता की जांच होती है। इसके बाद गहनों को गलाकर 24 कैरेट यानी 99.99 प्रतिशत शुद्ध डिजिटल सोने में बदल दिया जाता है। यह शुद्ध सोना सीधे ग्राहक के सेफगोल्ड खाते में ग्राम के हिसाब से जमा कर दिया जाता है। इसके बाद इस सोने को पूरी तरह केवाईसी सत्यापित और उच्च साख वाले साझेदारों को लीज पर दिया जाता है।
रिटर्न की गणना और निकासी के विकल्प
इस लीजिंग व्यवस्था में ग्राहकों को सालाना 4 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया जाता है। यह रिटर्न नकद रुपये में न मिलकर हर महीने सोने के ग्राम के रूप में ही ग्राहक के खाते में जुड़ता रहता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक 100 ग्राम सोना एक साल के लिए लीज पर रखता है, तो तय रिटर्न के हिसाब से साल के अंत में उसकी कुल जमा पूंजी बढ़कर 104 ग्राम हो जाएगी।
इस योजना में छह महीने की न्यूनतम लॉक-इन अवधि रखी गई है। मैच्योरिटी पूरी होने पर ग्राहकों के सामने कई लचीले विकल्प होते हैं। वे चाहें तो अपनी लीज को आगे की अवधि के लिए रिन्यू कर सकते हैं। यदि वे अपना सोना वापस पाना चाहते हैं, तो 24 कैरेट के 99.99 प्रतिशत शुद्ध सोने के सिक्के या बार के रूप में उसकी डिलीवरी ले सकते हैं। इसके अलावा, ग्राहक उस समय के लाइव मार्केट रेट पर अपने सोने को सीधे बेच भी सकते हैं। चूंकि मिलने वाला ब्याज सोने के रूप में ही जुड़ता है, इसलिए निवेशक को सोने के बाजार भाव में होने वाली बढ़ोतरी का पूरा लाभ अपने बढ़े हुए ग्राम पर भी लगातार मिलता रहता है।
डिजिटल गोल्ड का सुरक्षा ढांचा और पिछला अभियान
यह नया विज्ञापन सेफगोल्ड के उस व्यापक अभियान की दूसरी कड़ी है जो घरों में रखे निष्क्रिय सोने को लेकर चलाया जा रहा है। इससे पहले कंपनी ने सास-बहू के धारावाहिकों पर आधारित एक पैरोडी वीडियो जारी किया था, जिसमें शीबा चड्ढा और भूमिका गुरुंग नजर आई थीं। उस वीडियो को इंटरनेट पर 50 लाख से अधिक बार देखा गया था। नई फिल्म में भी पारिवारिक बातचीत के सहज लहजे में इस वित्तीय अवधारणा को समझाया गया है।
सेफगोल्ड एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो उपभोक्ताओं को सोना खरीदने, बचत करने, बेचने और लीज पर देने की एकीकृत सुविधा प्रदान करता है। प्लेटफॉर्म पर मौजूद प्रत्येक ग्राम डिजिटल सोना स्वतंत्र ट्रस्टियों द्वारा सत्यापित सुरक्षित तिजोरियों में रखे गए वास्तविक भौतिक सोने द्वारा समर्थित होता है। लीज समाप्त होने पर ग्राहक न केवल डिजिटल रूप से इसे भुना सकते हैं, बल्कि तनिष्क, कल्याण और मलाबार जैसे प्रमुख व विश्वसनीय आभूषण विक्रेताओं के पास जाकर इसके बदले नए गहने भी प्राप्त कर सकते हैं।



















