भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) अपने ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खातों पर आकर्षक ब्याज दरों का लाभ दे रहा है। देश का यह प्रमुख सरकारी बैंक 3 करोड़ रुपये से कम मूल्य की जमा राशियों पर विभिन्न अवधियों के दौरान 3.50 प्रतिशत से लेकर 7.35 प्रतिशत तक का वार्षिक ब्याज प्रदान कर रहा है। जमाकर्ता बैंक ऑफ बड़ौदा में न्यूनतम 7 दिनों की बेहद कम अवधि से लेकर लंबी समय-सीमा तक के लिए एफडी खाता खोल सकते हैं। वर्तमान में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों के बीच 555 दिनों की विशेष एफडी योजना काफी चर्चा में है, क्योंकि यह विभिन्न आयु वर्गों के निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न की गारंटी देती है।
555 दिनों की एफडी पर ब्याज दर का विस्तृत गणित
बैंक ऑफ बड़ौदा की 555 दिनों वाली एफडी योजना पर निवेशकों को 6.75 प्रतिशत से लेकर 7.35 प्रतिशत तक का बंपर ब्याज मिल रहा है। इस योजना के तहत आयु सीमा और ग्राहक श्रेणी के आधार पर ब्याज दरें निर्धारित की गई हैं। 59 वर्ष तक की आयु वाले सामान्य नागरिकों के लिए 555 दिनों की एफडी पर 6.75 प्रतिशत का सालाना ब्याज दिया जा रहा है। वहीं, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह ब्याज दर 7.25 प्रतिशत सालाना तय की गई है। इसके अलावा, 80 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु वाले अति वरिष्ठ नागरिकों (सुपर सीनियर सिटीजन्स) को 555 दिनों की अवधि पर सबसे अधिक 7.35 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा है। इस विशेष जमा योजना में ग्राहक अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक की राशि का निवेश कर सकते हैं।
वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाला अतिरिक्त प्रीमियम
बैंक ऑफ बड़ौदा अपने वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिक ग्राहकों को सामान्य जमाकर्ताओं की तुलना में अधिक ब्याज का लाभ देता है। नियम के अनुसार, सीनियर सिटीजन्स को सामान्य नागरिकों की तुलना में 0.50 प्रतिशत (आधा प्रतिशत) अधिक ब्याज दर का फायदा मिलता है। इसके साथ ही, 80 साल या उससे अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन्स को कुछ चुनिंदा एफडी अवधियों पर वरिष्ठ नागरिकों के मुकाबले भी 0.10 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज दिया जाता है। इस व्यवस्था से बुजुर्ग नागरिकों की सुरक्षित बचत पर मिलने वाली कमाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।
जून में ब्याज दरों में संशोधन और भारतीय रिजर्व बैंक का असर
बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस साल जून के महीने में अपनी विभिन्न एफडी योजनाओं की ब्याज दरों में संशोधन लागू किया था। भारत में बैंकिंग सेवाएं देने वाले सभी व्यावसायिक बैंक देश के केंद्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा तय की जाने वाली नीतिगत रेपो दर (Repo Rate) को ध्यान में रखते हुए अपनी एफडी और कर्ज की ब्याज दरों में समय-समय पर बदलाव करते हैं। रिजर्व बैंक के फैसले सीधे तौर पर बैंकों की जमा योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज को प्रभावित करते हैं।



















