आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने निवेशकों के पूर्व-निर्धारित वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए तीन नई ओपन-एंडेड योजनाएं पेश की हैं। ये योजनाएं 5 साल, 10 साल और 15 साल की निश्चित मेच्योरिटी अवधि के साथ लाई गई हैं, जिनकी परिपक्वता वर्ष क्रमशः 2031, 2036 और 2041 तय की गई है। इस न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) में निवेश करने की शुरुआत 26 अगस्त से हो चुकी है और यह 9 सितंबर, 2026 तक बोली लगाने के लिए खुला रहेगा। यह स्कीम एक बहु-परिसंपत्ति (मल्टी-एसेट) पोर्टफोलियो को पूर्व-निर्धारित ग्लाइड पाथ रणनीति के साथ जोड़ती है ताकि निवेशकों को लक्ष्य पूरा होने पर स्थिर और बेहतर रिटर्न मिल सके।
ग्लाइड पाथ रणनीति और एसेट एलोकेशन का तंत्र
इन योजनाओं की मुख्य विशेषता इनका ग्लाइड पाथ आधारित एसेट एलोकेशन मॉडल है। शुरुआती वर्षों में, जब मेच्योरिटी की तारीख दूर होती है, तब फंड का बड़ा हिस्सा इक्विटी और इक्विटी से जुड़ी सिक्योरिटीज में आवंटित किया जाता है। इसका उद्देश्य लंबी अवधि में शेयर बाजार की ग्रोथ का अधिकतम लाभ उठाना है। जैसे-जैसे योजना अपनी मेच्योरिटी की तारीख के करीब पहुंचती है, जोखिम को नियंत्रित करने के लिए इक्विटी एक्सपोजर को धीरे-धीरे कम किया जाता है और डेट (ऋण) परिसंपत्तियों का अनुपात बढ़ाया जाता है। यह प्रक्रिया पोर्टफोलियो को सुरक्षित और स्थिर बनाकर लक्ष्य के वर्ष में बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करती है।
किन परिसंपत्तियों में लगाया जाएगा पैसा
इन तीनों योजनाओं का पोर्टफोलियो विविधता से भरपूर बनाया गया है। इसमें कई प्रमुख परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करने की सुविधा दी गई है
- इक्विटी और इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स: कंपनियों के शेयर और इक्विटी आर्बिट्राज एक्सपोजर, जो तय सीमा के भीतर रहेगा।
- डेट एवं मनी मार्केट साधन: सरकारी और कॉर्पोरेट बांड, ट्रेजरी बिल और अन्य अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक ऋण साधन।
- गोल्ड एवं सिल्वर ETF: सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स।
- कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs): सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स।
- InvITs की यूनिट्स: इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स में आवंटन।
एस नरेन की राय और लक्ष्य आधारित निवेश का महत्व
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के कार्यकारी निदेशक (ईडी) और मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) एस नरेन ने कहा कि ये लाइफसाइकिल फंड क्लोज्ड-एंड फंड्स के अनुभव और हाइब्रिड फंड्स के प्रबंधन की विशेषज्ञता को एक साथ लाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन के अलग-अलग चरणों में वित्तीय आवश्यकताएं बदलती रहती हैं। शुरुआती समय में एजुकेशन लोन चुकाना या यात्रा के लिए धन जुटाना प्राथमिकता हो सकती है, जबकि बाद के वर्षों में घर खरीदना, बच्चों की उच्च शिक्षा या रिटायरमेंट की योजना बनाना मुख्य लक्ष्य बन जाता है।
एस नरेन के अनुसार, केवल शेयरों के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों के सामने यह चुनौती हमेशा बनी रहती है कि लक्ष्य नजदीक आने पर वे कब जोखिम कम करें और एसेट आवंटन बदलें। इस फंड की ग्लाइड पाथ प्रणाली इस प्रक्रिया को स्वचालित बनाती है, जिससे निवेशकों को खुद यह निर्णय लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
शेयरों के चयन और पोर्टफोलियो प्रबंधन की रणनीति
फंड मैनेजर इक्विटी आवंटन के लिए व्यापक आर्थिक (मैक्रो-इकोनॉमिक) परिस्थितियों का टॉप-डाउन मूल्यांकन करेंगे। इसके तहत ऐसी कंपनियों की पहचान की जाती है जिनकी कमाई में निरंतरता हो, बाजार हिस्सेदारी बढ़ रही हो, बैलेंस शीट मजबूत हो और जिनका मूल्यांकन आकर्षक लगे। इसके अलावा कंपनियों के पास लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बढ़त (इकोनॉमिक मोट) होना अनिवार्य माना गया है। बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फंड के पास लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में लचीले ढंग से निवेश करने का अवसर रहेगा।



















