घरेलू कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं को मजबूती देने की दिशा में एक नया कदम उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत संचालित इंडियाएआई मिशन ने मंगलवार को तीन स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल्स पेश किए। आधिकारिक तौर पर जारी किए गए इन मॉडलों के नाम ईकेए-1, धीर 2बी और धीर 5बी हैं। यह पहल देश के भीतर ही आधुनिक तकनीक और बड़े लैंग्वेज मॉडल तैयार करने के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है। इस अवसर पर आईटी सचिव एस कृष्णन, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, इंडियाएआई के प्रतिनिधि और इन तकनीकों को विकसित करने वाली दोनों कंपनियों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।
इंडियाएआई मिशन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की भूमिका
इन मॉडल्स का विकास इंडियाएआई इनोवेशन सेंटर फाउंडेशन मॉडल्स पिलर के अंतर्गत किया गया है। अधिकारियों ने इस रिलीज को राष्ट्रीय मिशन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव करार दिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करके स्थानीय जरूरतों के अनुकूल स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े लैंग्वेज मॉडल तैयार करना है। सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराए गए रियायती राष्ट्रीय एआई कंप्यूट और अनुप्रयुक्त अनुसंधान सहयोग की वजह से इन मॉडलों का निर्माण संभव हुआ। सरकार का मानना है कि साझा सार्वजनिक कंप्यूट अवसंरचना घरेलू तकनीकी नवाचार की रफ्तार को कई गुना तेज कर सकती है।
कार्यक्रम के दौरान आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि ऐसे स्वदेशी मॉडल एआई के क्षेत्र में भारत की तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विकास सरकारी कामकाज, उद्योग, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ाने के नए रास्ते खोलेगा। एस कृष्णन ने यह भी उल्लेख किया कि एआईकोश जैसे मंच इन उपकरणों तक पहुंच को व्यापक बनाएंगे। शोधकर्ता, छात्र, नवाचारकर्ता और आम नागरिक इन मंचों के माध्यम से इन मॉडलों का परीक्षण कर सकते हैं और इनके ऊपर अपने नए समाधान तैयार कर सकते हैं।
सोकेट लैब्स का ईकेए-1 मॉडल और उसकी विशेषताएं
फाउंडेशन मॉडल्स पिलर के तहत चयनित सोकेट लैब्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च ने भारतीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ईकेए-1 मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल 26.3 बिलियन पैरामीटर्स से लैस है और इसके प्रशिक्षण में लगभग 7.5 ट्रिलियन टोकन का उपयोग किया गया है। भाषाई विविधता के मामले में यह अंग्रेजी के साथ-साथ संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है। कंपनी ने इसे एक खुला, स्पार्स हाइब्रिड लैंग्वेज मॉडल बताया है, जिसे विशेष रूप से गणितीय गणनाओं, कोडिंग, तार्किक विश्लेषण और एजेंटिक कार्यों के निष्पादन के लिए डिजाइन किया गया है।
ईकेए-1 की सबसे अहम खूबियों में से एक इसका स्थानीय डिवाइस पर इंफरेंसिंग संभालने में सक्षम होना है। इसका सीधा मतलब यह है कि मोबाइल डेटा या वाई-फाई कनेक्शन उपलब्ध न होने पर भी इसके कुछ फीचर्स और कार्य सुचारू रूप से चलाए जा सकते हैं। सोकेट के सीईओ अभिषेक अपरवाल ने कहा कि यह मॉडल भारत की बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा की आवश्यकताओं के बिल्कुल अनुकूल है। अभिषेक अपरवाल के अनुसार यह देश की विशिष्ट क्षेत्रीय मांगों को पूरा करता है और भारत के तेजी से बदलते डिजिटल परिवेश को दर्शाता है।
जेंटेक का धीर 2बी और 5बी: सुरक्षित और ऑन-प्रेमिस समाधान
दूसरी तरफ, जेंटेक एआईटेक इनोवेशंस ने धीर 2बी और धीर 5बी नाम से दो ओपन-सोर्स मॉडल विकसित किए हैं। ये दोनों मॉडल अंग्रेजी के अलावा 10 प्रमुख भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं। इन्हें सुरक्षित, ऑन-प्रेमिस बहुभाषी सहायक के रूप में पेश किया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले वातावरण में दस्तावेजों पर आधारित कार्यों को अंजाम देना है। इसमें ऑटोमेशन, ज्ञान पुनर्प्राप्ति, आंतरिक रिकॉर्ड प्रबंधन और नागरिकों या उद्यमों से जुड़ी सेवाओं को संचालित करना शामिल है।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, इन मॉडलों को विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहद कमजोर होती है या फिर डेटा सुरक्षा की दृष्टि से नेटवर्क काफी संवेदनशील माना जाता है। इनके प्राथमिक उपयोग रक्षा, सरकारी विभागों, भारी उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों में चिह्नित किए गए हैं। जेंटेक के सीईओ प्रो. शशिकुमार ने कहा कि ये मॉडल जीपीयू और टीपीयू दोनों पर कुशलता से काम करते हैं। प्रो. शशिकुमार ने बताया कि इनका हल्का डिजाइन साधारण फोन में भी डिप्लॉयमेंट की अनुमति देता है, जिसके लिए किसी बाहरी क्लाउड कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं होती।
डेटा गोपनीयता और क्षेत्रीय पहुंच का लाभ
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, डिवाइस के भीतर ही प्रोसेसिंग की सुविधा से डेटा पूरी तरह स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रहता है, जिससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता और सुरक्षा को कोई खतरा नहीं होता। इसके अतिरिक्त, ऑफलाइन संचालन की क्षमता दूरदराज के उन इलाकों में आधुनिक डिजिटल सेवाओं की पहुंच को संभव बनाती है जहां नेटवर्क की बुनियादी संरचना अभी कमजोर है। सरकार ने इन तीनों मॉडलों को अपनी व्यापक सार्वजनिक अवसंरचना योजनाओं से जोड़ते हुए एआईकोश मंच के जरिए इनकी उपलब्धता का विस्तार करने की रूपरेखा पेश की है।



















