सर्दियों का मौसम गुलाब के पौधों के स्वास्थ्य और उनमें नई कलियां विकसित होने के लिए सबसे मुफीद समय माना जाता है। नर्सरी से तैयार ग्राफ्टेड किस्म का पौधा घर लाते समय गमले का सही आकार चुनना शुरुआती सफलता की पहली कुंजी है। इसके लिए 10×10 इंच आकार का गमला एकदम सटीक विकल्प साबित होता है। रोपाई के दौरान पौधे के ग्राफ्टिंग जोड़ वाले बिंदु को मिट्टी की सतह से लगभग दो इंच ऊपर रखना बेहद महत्वपूर्ण है। इस सावधानी से नए फुटाव को पर्याप्त जगह मिलती है और आगे चलकर शाखाओं में फूल खिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
शाखाओं की छंटाई और सूखी टहनियों की सफाई
गुलाब की झाड़ी को सघन और अधिक फूल देने लायक बनाने के लिए नियमित कटाई-छंटाई की आवश्यकता होती है। अक्टूबर के महीने में पौधे की लगभग 60 प्रतिशत तक हार्ड प्रूनिंग की जा सकती है, जिससे पुरानी लकड़ी की जगह नई ताकतवर टहनियां विकसित हो सकें। नियमित देखभाल के दौरान जैसे ही कोई फूल मुरझाने लगे, उसे तीन पत्तियों वाली गांठ के ठीक नीचे से काट देना चाहिए। पौधे पर मौजूद सूखी, रोगग्रस्त और कमजोर पतली टहनियों को काट कर हटा देने से पौधे की ऊर्जा व्यर्थ खर्च नहीं होती और नई मजबूत शाखाओं को तेजी से बढ़ने का स्थान मिलता है।
रसोई के कचरे से तैयार प्राकृतिक पोटैशियम टॉनिक
कलियों के निर्माण और चमकदार फूलों के लिए गुलाब की जड़ों को प्रचुर मात्रा में पोटैशियम तत्व की दरकार होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए पके केले के छिलकों को अच्छी तरह धूप में सुखाकर बारीक पाउडर बना लें। इस चूर्ण में आलू के छिलकों के बारीक कतरे हुए टुकड़े और इस्तेमाल की जा चुकी चायपत्ती अथवा कॉफी के अवशेष अच्छी तरह मिलाए जा सकते हैं। इस घरेलू खाद को डालने से पूर्व गमले की ऊपरी सतह की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें और उसे दो दिनों तक खुली धूप में सूखने के लिए छोड़ दें। इसके बाद तैयार जैविक मिश्रण को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर पौधे को भरपूर पानी दें।
वर्मीकम्पोस्ट, सरसों की खली और बोन मील से पोषण
मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रखने के लिए प्रत्येक तीन महीने के अंतराल पर गमले में लगभग आधा किलो वर्मीकम्पोस्ट मिलाना फायदेमंद होता है। ठंडे दिनों में सरसों की खली को पानी में सड़ाकर बनाई गई तरल खाद का छिड़काव या प्रयोग पौधे को तेजी से सक्रिय करता है। इसके अतिरिक्त, जड़ों को भीतर तक मजबूती प्रदान करने के लिए लगभग 100 ग्राम बोन मील मिट्टी की ऊपरी परत के ठीक नीचे दबाकर मिलाया जाना चाहिए, जिससे फास्फोरस का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित होता है और जड़ तंत्र का प्रसार बेहतर होता है।
जैविक ग्रोथ प्रमोटर और एलोवेरा के उपयोग से नई जान
घर में मौजूद ऐसे पुराने पौधे जो लगातार देखभाल के उपरांत भी कलियां नहीं बना पा रहे हैं, उनके लिए जैविक विकास वर्धक काफी मददगार होते हैं। ऐसे पौधों में सागरिका, PROM अथवा सीवीड एक्सट्रैक्ट जैसे जैविक घटकों का प्रयोग नई ऊर्जा फूंकता है। घर पर प्राकृतिक उपचार के रूप में ताजा एलोवेरा के गूदे या रस को पानी में काफी पतला करके गमले की मिट्टी में डाला जा सकता है। यह घोल जड़ क्षेत्र को पोषण देकर नई पत्तियों के आगमन और नई कलियों के बनने की प्रक्रिया को तीव्र गति देता है।
धूप, गुड़ाई और पत्तियों की नियमित देखभाल
गुलाब के पौधे पर लगातार और लंबे समय तक फूल प्राप्त करने के लिए उसे प्रतिदिन कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप वाली जगह पर रखना अनिवार्य है। उपयोग की जाने वाली विभिन्न खादों को हर 15 दिन के अंतराल पर बदल-बदल कर देना चाहिए ताकि मिट्टी को संतुलित पोषक तत्व मिल सकें। गमले की मिट्टी को कड़ा या पपड़ीदार न बनने दें और समय-समय पर गुड़ाई करते रहें ताकि जड़ों को सांस लेने के लिए पर्याप्त वायु संचार मिलता रहे। इसके साथ ही पौधे पर नजर आने वाली पीली, सड़ी अथवा रोगग्रस्त पत्तियों को लगातार छांटते रहने से पौधा पूरी सर्दी फूलों से लदा रहेगा।


















