अमेरिकी वित्तीय बाजारों में मंगलवार को शुरू होने वाले मध्यावधि चुनाव से ऐन पहले निवेशकों के बीच अत्यधिक सतर्कता का माहौल देखने को मिल रहा है। चुनावी नतीजों से जुड़ी अनिश्चितता और तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में लगातार जारी बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की दिशा को बांट दिया है। इस कारोबारी सत्र में जहां पारंपरिक उद्योगों का प्रतिनिधित्व करने वाला सूचकांक हरे निशान में बंद हुआ, वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़ी कंपनियों में मुनाफावसूली ने व्यापक बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों का प्रदर्शन और सत्र का लेखा-जोखा
सोमवार के नियमित कारोबारी सत्र के दौरान डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 213.67 अंक या 0.41 प्रतिशत चढ़कर 51,983.98 के स्तर पर पहुंचने में कामयाब रहा। इसके विपरीत, टेक शेयरों के भारी दबाव के कारण नैस्डैक कंपोजिट में 272.63 अंक या 1.07 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई और यह 25,164.36 पर बंद हुआ। वहीं एसएंडपी 500 सूचकांक भी 38.67 अंक या 0.51 प्रतिशत टूटकर 7,541.40 के स्तर पर आ गया। यह बिकवाली मुख्य रूप से उच्च मूल्यांकन और AI बुनियादी ढांचे पर भारी पूंजीगत खर्च को लेकर उपजी चिंताओं के इर्द-गिर्द केंद्रित रही।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसैलवन राधाकृष्णन ने कहा कि अधिकांश अमेरिकी इक्विटी में खरीदारी देखी गई, लेकिन AI शेयरों की निरंतर बिकवाली ने नैस्डैक पर दबाव बढ़ा दिया। राधाकृष्णन ने रेखांकित किया कि वॉल स्ट्रीट की इस नरमी का असर एशियाई इक्विटी बाजारों में भी देखा गया, जहां आईटी कंपनियों ने क्षेत्रीय गिरावट का नेतृत्व किया।
वायदा कारोबार में बंटी चाल और चुनावी समीकरण
शुरुआती मंगलवार के वायदा बाजार में भी निवेशकों की मिलीजुली भावनाएं साफ तौर पर दिखाई दीं। डाउ जोन्स फ्यूचर्स 143 अंक या 0.27 प्रतिशत टूटकर 51,990 के आंकड़े पर कारोबार करता दिखा। दूसरी तरफ, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स ने 123.50 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की रिकवरी दर्ज करते हुए 28,251 का आंकड़ा छुआ। इसके साथ ही एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 3.50 अंकों की मामूली मजबूती आई और यह 7,578 के स्तर पर टिका रहा। व्यापारी समुदाय ऊर्जा की कीमतों में आई नरमी और वाशिंगटन के आगामी सत्ता संतुलन के बीच जोखिम का आकलन कर रहा है।
मतदान 3 नवंबर को होना है, और चुनावी सर्वेक्षणों के अनुसार डेमोक्रेट्स के पक्ष में बढ़त बनी हुई है। द कन्वर्सेशन के सर्वेक्षण मॉडल ने डेमोक्रेट्स को सीनेट पर नियंत्रण हासिल करने की 82 प्रतिशत संभावना दी है। इसी प्रकार नेट सिल्वर के चुनावी मॉडल में भी प्रतिनिधि सभा के लिए डेमोक्रेट्स को मजबूत दावेदार माना गया है। बीते हफ्ते के दौरान सीनेट की सीटों पर गतिशीलता विपक्षी दल के पक्ष में तेज हुई है, जहां सामान्य मतपत्रों पर डेमोक्रेट्स की बढ़त औसतन 8 से 9.4 अंक तक आंकी गई है। बाजार सहभागियों का मानना है कि इस प्रकार का सत्ता संतुलन राजकोषीय प्राथमिकताओं, व्यापारिक नीतियों और संघर्षों से जुड़े सैन्य व्यय को काफी हद तक प्रभावित करेगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की जीत को बाजार एक अप्रत्याशित झटके के रूप में देख सकता है।
अक्टूबर महीने में टेक कंपनियों की भारी पूंजी स्वाहा
रिपब्लिकन खेमे के लिए एक संभावित सकारात्मक पहलू यह रहा कि सितंबर 2026 में पेट्रोल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे मतदाताओं का रुख प्रभावित हो सकता है। हालांकि, शेयर बाजार पहले ही अक्टूबर के दौरान एक बड़ी गिरावट झेल चुका है। तकनीकी शेयरों में आए इस ठहराव ने मूल्यांकन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीते अक्टूबर 2026 में नैस्डैक 100 सूचकांक में 2,023.65 अंकों यानी 6.65 प्रतिशत का भारी गोता देखा गया था। नैस्डैक कंपोजिट भी इस अवधि में 1,424.06 अंक या 5.30 प्रतिशत फिसला। इस गिरावट के चलते टेक कंपनियों के बाजार पूंजीकरण से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ। जहां निवेशक AI के बुनियादी ढांचे पर हो रहे भारी पूंजीगत व्यय और उससे मिलने वाले दीर्घकालिक रिटर्न को लेकर संशय में रहे, वहीं पूरे महीने में एसएंडपी 500 में 1 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि डाउ जोन्स ने 1.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।
कारोबार समाप्ति के बाद घोषित नतीजे और आगामी रिपोर्ट
सोमवार को बाजार बंद होने के बाद जारी कॉर्पोरेट अपडेट्स ने भी धारणा को हिलाया। एप्पल के शेयरों में आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग के दौरान लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कंपनी की बिक्री वृद्धि धीमी रही और चौथी तिमाही के राजस्व अनुमान बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहे। इसी प्रकार पैलेंटिर का शेयर भी लगभग 3 प्रतिशत नीचे फिसल गया, भले ही उसके तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे अनुमान से बेहतर रहे थे। इसके उलट, एंथ्रोपिक ने अपने तिमाही राजस्व में बारह गुना उछाल दर्ज किया और आने वाले वर्षों में 895 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने की योजना की घोषणा की।
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, निवेशक अब मंगलवार को आने वाली अन्य प्रमुख कॉर्पोरेट आय रिपोर्टों पर नजर गड़ाए हुए हैं। इन कंपनियों में एएमडी, एसएमसीआई, फाइजर, शॉपिफाई और बुकिंग होल्डिंग्स जैसी बड़ी फर्में शामिल हैं। इन नतीजों से यह तय होगा कि क्या बिग टेक और चिप निर्माताओं में चल रहा सुधारात्मक दौर थमेगा या नहीं।
कच्चे तेल में नरमी और भू-राजनीतिक मोर्चे पर बातचीत
राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि मध्यावधि चुनाव ही वैश्विक बाजारों के लिए अगला बड़ा उत्प्रेरक साबित होगा, जिसका मुख्य ध्यान वित्तीय नीतियों, व्यापार और ईरान संघर्ष पर केंद्रित है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड के 105 डॉलर प्रति बैरल की ओर लौटने से बाजार को कुछ सहारा मिला है। कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान से तनाव घटने की उम्मीदें बंधी हैं। इसके साथ ही ओपेक+ ने दिसंबर के लिए उत्पादन लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं किया है।
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने बताया कि वैश्विक संकेत काफी बिखरे हुए हैं। डाउ जोन्स को कच्चे तेल की घटती कीमतों से राहत मिली, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक उच्च मूल्यांकन के दबाव में रहे। पोनमुडी ने उल्लेख किया कि डब्ल्यूटीआई क्रूड 96-97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जो तीन महीने से अधिक समय में इसकी सबसे बड़ी दैनिक गिरावट के बाद की स्थिति है।
पोनमुडी ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक तनाव में निरंतर कमी और ऊर्जा लागत में नरमी जारी रिकवरी को सहारा दे सकती है, लेकिन वार्ता विफल होने या तकनीकी शेयरों में कमजोरी गहराने से वैश्विक पूंजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
भारतीय बाजार और घरेलू निवेशकों के लिए संकेत
घरेलू बाजार के विश्लेषक अंतरराष्ट्रीय तेल मूल्यों और विदेशी आईटी शेयरों की चाल पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय कंपनियों और अर्थव्यवस्था को सीमांत स्तर पर राहत मिल सकती है, जिससे चालू खाते के घाटे पर दबाव घटता है। फिर भी, वैश्विक स्तर पर जोखिम उठाने की क्षमता काफी हद तक अमेरिकी चुनावी नतीजों और नीतिगत दिशा पर ही निर्भर करेगी।



















