त्योहारी खरीदारी के चरम पर पहुंचते ही घरेलू सर्राफा बाजार में सोने के भाव में ताजा बढ़त दर्ज की गई है। धनतेरस से ठीक दो दिन पहले बुधवार को 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सहित सभी प्रमुख शुद्धता श्रेणियों में पीली धातु महंगी हो गई। खुदरा आभूषण बाजारों में त्योहारी उत्साह के बीच 100 ग्राम से लेकर 1 ग्राम तक की खरीदारी पर ग्राहकों को अब बढ़ी हुई दरें चुकानी पड़ रही हैं। इस तेजी का असर प्रमुख खुदरा ज्वेलर्स और देश भर के विभिन्न राज्यों के आभूषण शो-रूम्स में देखने को मिल रहा है।
24 कैरेट सोने की नई दरें
बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति ग्राम 27 रुपये से लेकर 100 ग्राम पर अधिकतम 2,700 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते बाजार में 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,39,910 रुपये और 8 ग्राम की कीमत 1,11,928 रुपये पर पहुंच गई। वहीं अन्य व्यापारिक स्तरों पर 24 कैरेट सोने का भाव 14,045 रुपये प्रति ग्राम और 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम तक भी देखा गया। शुद्ध सोने के सिक्कों और बार्स की मांग त्योहारी अवधि में तेज रहने के कारण इन दरों पर खरीदारों की सीधी नजर बनी हुई है।
22 कैरेट और 18 कैरेट आभूषणों के भाव
आमतौर पर आभूषण निर्माण में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमतों में भी जोरदार तेजी देखी गई। 22 कैरेट के भाव में 1 ग्राम पर 25 रुपये, 8 ग्राम पर 200 रुपये, 10 ग्राम पर 250 रुपये और 100 ग्राम पर 2,500 रुपये की बढ़त आई। इस संशोधन के बाद 4 नवंबर को 22 कैरेट सोना 12,875 रुपये प्रति 1 ग्राम, 1,03,000 रुपये प्रति 8 ग्राम, 1,28,750 रुपये प्रति 10 ग्राम और 1,28,750 रुपये प्रति 100 ग्राम के स्तर पर दर्ज हुआ। इसके अतिरिक्त कुछ प्रमुख बाजारों में 10 ग्राम की दर 1,28,250 रुपये और 8 ग्राम की दर 1,02,600 रुपये भी रही।
हल्के गहनों और आधुनिक डिजाइनों के लिए पसंद किए जाने वाले 18 कैरेट सोने में 1 ग्राम पर 20 रुपये से लेकर 100 ग्राम पर 2,000 रुपये तक की मजबूती देखी गई। इसके साथ ही 18 कैरेट सोना 10,534 रुपये प्रति 1 ग्राम और 1,05,340 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं 750 शुद्धता वाले सोने के भाव 10 ग्राम के लिए 1,04,930 रुपये और 8 ग्राम के लिए 83,944 रुपये दर्ज किए गए, जबकि प्रति ग्राम के आधार पर यह स्तर 10,318 रुपये रहा।
विभिन्न शुद्धता श्रेणियों के भाव
मानक शुद्धता के आधार पर सर्राफा बाजार में अलग-अलग श्रेणियों के स्पष्ट आंकड़े सामने आए हैं। 999 शुद्धता वाले सोने की कीमत 13,758 रुपये प्रति 1 ग्राम दर्ज की गई। वहीं 995 शुद्धता का भाव 13,703 रुपये प्रति ग्राम और आभूषणों के मानक 916 शुद्धता की दर 12,602 रुपये प्रति ग्राम रही। कम कैरेट वाले विकल्पों में 750 शुद्धता का भाव 10,318 रुपये प्रति ग्राम रहा, जबकि 585 शुद्धता वाला सोना 8,048 रुपये प्रति ग्राम पर उपलब्ध रहा। यह विभाजन खरीदारों को उनकी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी का आकलन करने में मदद करता है।
प्रमुख आभूषण ब्रांड्स और राज्यों में स्थिति
खुदरा क्षेत्र के बड़े नामों में शामिल मालाबार में 22 कैरेट सोना 12,825 रुपये प्रति 1 ग्राम और 1,28,250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। इसी स्टोर पर 24 कैरेट सोने की दर 13,991 रुपये प्रति 1 ग्राम और 1,39,910 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रही।
दूसरी ओर जोयालुक्कास के खुदरा बिक्री केंद्रों पर 22 कैरेट सोने का भाव 12,825 रुपये प्रति 1 ग्राम तथा 1,28,250 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। यह दरें आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों में समान रूप से लागू हैं। तनिष्क और आईबीजेए के स्तरों पर भी धनतेरस से ठीक दो दिन पहले 22 कैरेट के भाव में उछाल की पुष्टि हुई है।
मांग में सुधार और वैश्विक खपत परिदृश्य
भारतीय स्वर्ण बाजार ने सुस्त दूसरी तिमाही के बाद सुधार के स्पष्ट संकेत दिए हैं, जहां सभी क्षेत्रों में क्रमिक विकास दर्ज हुआ। आभूषण मांग में मौसमी उछाल के दम पर तीसरी तिमाही में कुल मांग पिछली तिमाही के मुकाबले 25 प्रतिशत बढ़कर 162 टन पर पहुंच गई। हालांकि, ऊंचे आधार प्रभाव और घरेलू स्तर पर सोने की बढ़ी हुई कीमतों के कारण सामर्थ्य पर बने दबाव के चलते यह मांग वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही की तुलना में 29 प्रतिशत कम रही। यह रुझान वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा रेखांकित किया गया है।
भारत वैश्विक आभूषण बाजार में अपना दबदबा बनाए हुए है और तीसरी तिमाही में वैश्विक आभूषण खपत का 32 प्रतिशत हिस्सा भारत के नाम रहा। वहीं वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों के दौरान वैश्विक खपत में देश की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत रही। आभूषण विक्रेताओं द्वारा स्टॉक की दोबारा भरपाई और दुकानों में बढ़ती ग्राहकों की आवाजाही चौथी तिमाही के त्योहारी और शादियों के व्यस्त सीजन में मांग मजबूत रहने का संकेत देती है। कीमतों में नरमी खरीदारी को सहारा दे सकती है, हालांकि कीमतों के ऊंचे स्तर के कारण मात्रात्मक मांग पर कुछ दबाव बना रह सकता है।



















