घरेलू सराफा बाजार में हालिया गिरावट के बाद पीली धातु की कीमतों ने जोरदार वापसी की है। 9 अक्टूबर को भारतीय बाजारों में सोने के भाव में मजबूत तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के खुदरा भाव में मामूली गिरावट देखी गई। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की घटती कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी ने बहुमूल्य धातुओं को निचले स्तरों से सहारा दिया है।
देशभर में 24, 22 और 18 कैरेट सोने के खुदरा भाव
भारतीय खुदरा बाजार में 9 अक्टूबर को 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम 1,140 रुपये का उछाल आया, जिसके बाद इसका भाव 1,50,710 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। आभूषणों में सर्वाधिक पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने के दाम में भी 1,050 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह 1,38,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसके अलावा, 18 कैरेट सोने की कीमत 850 रुपये चढ़कर 1,13,030 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
थोक तथा बड़े पैमाने पर खरीदारी के संदर्भ में, 24 कैरेट सोने का 100 ग्राम का भाव 11,400 रुपये बढ़कर 13,81,500 रुपये दर्ज किया गया। वहीं 22 कैरेट सोने के 100 ग्राम की कीमत में 10,500 रुपये का इजाफा देखा गया और यह 15,07,100 रुपये के स्तर पर पहुंच गई।
चांदी के खुदरा भाव में मामूली गिरावट
सोने में आई चमक के उलट चांदी के खुदरा दामों में हल्की नरमी देखने को मिली। भारत में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत 100 रुपये फिसलकर 2,34,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। इसके साथ ही, 100 ग्राम चांदी का खुदरा भाव 23,490 रुपये दर्ज किया गया।
प्रमुख महानगरों में सोने की दरें
देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में एक समान रुख दिखाई दिया। चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,50,710 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,38,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिका।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी यही स्थिति रही, जहां 22 कैरेट सोना 1,38,150 रुपये प्रति 10 ग्राम और 24 कैरेट शुद्ध सोना 1,50,710 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज हुआ। हैदराबाद के बाजारों में भी राष्ट्रीय स्तर के समान ही भाव रहे, जहां 22 कैरेट का भाव 1,38,150 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि 24 कैरेट सोने का भाव 1,50,7100 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
एमसीएक्स वायदा बाजार का रुख और तकनीकी स्तर
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 4 दिसंबर की परिपक्वता वाले सोने के वायदा अनुबंधों में 1.11 प्रतिशत की मजबूती आई और यह 1,51,277 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। वहीं चांदी के 4 दिसंबर अनुबंध में 1.46 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 2,24,470 रुपये पर जा पहुंचे।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट रिसर्च के तकनीकी आकलन के मुताबिक, दिसंबर डिलीवरी वाले एमसीएक्स गोल्ड को 148,500 रुपये के स्तर के पास मजबूत समर्थन मिलने की संभावना है और यह 152,000 रुपये के स्तर तक उछल सकता है। दूसरी तरफ, एमसीएक्स सिल्वर दिसंबर अनुबंध 220,000 रुपये से 228,000 रुपये के व्यापक दायरे में कारोबार कर सकता है। जब तक यह 228,000 रुपये के स्तर को पार नहीं करता, तब तक 230,000 रुपये की ओर मजबूत रैली संभव नहीं दिखती।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का कारोबार
वैश्विक बाजार में बुधवार को दो महीने के निचले स्तर को छूने के बाद हाजिर सोना 1.1 प्रतिशत सुधरकर 4,177.44 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा। इसी के साथ अमेरिकी सोना वायदा भी 1.1 प्रतिशत बढ़कर 4,202.00 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
सोने के इस सुधार के पीछे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी मुख्य वजह रही है, जो वर्तमान में 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके साथ ही, 30 साल के बॉन्ड की मजबूत नीलामी मांग के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 24 साल के उच्चतम स्तर से नीचे आ गई, जिससे यह संकेत मिला कि हालिया बिकवाली के बावजूद निवेशक दीर्घावधि सरकारी प्रतिभूतियों में दिलचस्पी बनाए हुए हैं।
केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति और विश्लेषकों का नजरिया
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा बाजार मौजूदा महीने में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की लगभग 82 प्रतिशत संभावना मान रहा है, जबकि दिसंबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावना 81 प्रतिशत के आसपास आंकी जा रही है।
रिद्धिसिद्धि बुलियंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड के अध्यक्ष और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी ने बाजार की स्थिति पर कहा कि 18 महीने के उच्चतम स्तर पर मौजूद डॉलर और फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती अटकलों के दबाव में सोना और चांदी अपने अहम समर्थन स्तर 4,100 डॉलर और 60 डॉलर से नीचे टूटे हैं।
पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, सीएमई फेडवॉच टूल मौजूदा महीने में कदम उठाए जाने की 18 प्रतिशत संभावना दिखा रहा है, जो दिसंबर के लिए बढ़कर 80 प्रतिशत हो जाती है। फेडरल रिजर्व की बैठक के ब्योरे से सामने आया है कि नीति निर्माता वजहों को लेकर बंटे हुए हैं, जिनमें से कुछ ऊर्जा कीमतों के झटकों पर ध्यान दे रहे हैं तो वहीं सख्त रुख वाला खेमा मांग प्रेरित महंगाई से चिंतित है।
उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने भी ऊंची ऊर्जा कीमतों, रिकॉर्ड कर्ज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई बूम से जुड़े जोखिमों को रेखांकित किया है। तकनीकी स्तरों के आधार पर सोना अब 4,000 डॉलर के स्तर की ओर देख रहा है, जबकि चांदी में बना हेड-एंड-शोल्डर्स ब्रेकडाउन इसके 57 डॉलर की ओर जाने का संकेत दे रहा है।



















