आयकर विभाग से किसी भी तरह का नोटिस मिलने पर पहले करदाताओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। लंबी कतारों में खड़े होना, ढेरों कागजी दस्तावेज संभालना और मानसिक तनाव झेलना एक आम बात थी। लेकिन अब समय बदल चुका है। आयकर विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर बेहद आसान कर दिया है। अब करदाताओं को नोटिस का जवाब देने के लिए किसी भी कर कार्यालय में जाने की जरूरत नहीं है। वे घर बैठे ही आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से नोटिस देख सकते हैं, उसका जवाब दे सकते हैं और अपनी पूरी प्रक्रिया को ट्रैक कर सकते हैं।
करदाताओं के लिए एक बड़ी डिजिटल राहत
यह ऑनलाइन सेवा नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, पेशेवरों और टैक्स काटने वालों (टैक्स डिडक्टर्स) के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। पूरी प्रक्रिया को इंटरनेट पर उपलब्ध कराने से न केवल कागजी कामकाज में भारी कमी आई है, बल्कि करदाताओं के समय की भी बचत होती है। इस तकनीक की मदद से लोग तय समय-सीमा के भीतर अपने टैक्स से जुड़े मामलों का निपटारा कर सकते हैं, जिससे वे किसी भी तरह के जुर्माने या कानूनी कार्रवाई से बच जाते हैं।
क्या है ई-प्रोसीडिंग्स सेवा और यह कैसे काम करती है?
इस पूरी डिजिटल व्यवस्था के केंद्र में "ई-प्रोसीडिंग्स" नाम की सेवा है, जो आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध है। इस सेवा के जरिए पंजीकृत उपयोगकर्ता टैक्स अधिकारियों द्वारा भेजे गए किसी भी नोटिस को देख सकते हैं और उसका जवाब दे सकते हैं। चाहे वह मामला किसी बकाया टैक्स की मांग का हो, टैक्स रिफंड के समायोजन का हो, सुधार (रेक्टिफिकेशन) का मामला हो या फिर मूल्यांकन (असेसमेंट) की कार्यवाही हो, इन सभी का समाधान इसी एक जगह से किया जा सकता है। जैसे ही कोई करदाता अपना जवाब ऑनलाइन जमा करता है, पोर्टल तुरंत एक डिजिटल पावती (एक्नॉलेजमेंट) जारी करता है। यह पावती इस बात का पक्का सबूत होती है कि आपने अपना जवाब दर्ज करा दिया है। इसके बाद करदाता अपने मामले की प्रगति को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकते हैं।
इन धाराओं के तहत आने वाले नोटिसों का दे सकते हैं जवाब
ई-प्रोसीडिंग्स के जरिए करदाता कई तरह के महत्वपूर्ण नोटिसों का जवाब ऑनलाइन दे सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- धारा 139(9) के तहत त्रुटिपूर्ण रिटर्न (डिफेक्टिव रिटर्न) के संबंध में जारी नोटिस।
- धारा 245 के तहत रिफंड समायोजन को लेकर जारी की गई सूचनाएं।
- धारा 143(1)(a) के तहत पहली नजर में मिलने वाली विसंगतियों (प्राइमा फेसी एडजस्टमेंट) को लेकर जारी नोटिस।
- धारा 154 के तहत सुधार (रेक्टिफिकेशन) के लिए जारी नोटिस।
- इसके अलावा आकलन अधिकारी (असेसिंग ऑफिसर) या किसी अन्य आयकर प्राधिकारी द्वारा भेजे गए विभिन्न प्रकार के निर्देश और सूचनाएं।
नोटिस का ऑनलाइन जवाब देने की पूरी प्रक्रिया
यदि आपको आयकर विभाग से कोई नोटिस मिला है, तो आप नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपना जवाब दर्ज करा सकते हैं:
- सबसे पहले आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं और अपने पंजीकृत क्रेडेंशियल्स (यूज़र आईडी और पासवर्ड) का उपयोग करके लॉग इन करें।
- सफलतापूर्वक लॉग इन करने के बाद, मुख्य पेज (होम पेज) पर उपलब्ध डैशबोर्ड पर जाएं और वहां "पेंडिंग एक्शंस" के विकल्प पर क्लिक करें।
- पेंडिंग एक्शंस के अंतर्गत आपको "ई-प्रोसीडिंग्स" का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।
- इसके बाद आपके सामने स्क्रीन पर "सेल्फ" का विकल्प आएगा। अपने नाम पर जारी किए गए नोटिस देखने के लिए इस पर क्लिक करें। यदि आपने अपने मामले के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या अधिकृत प्रतिनिधि (ऑथराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव) को नियुक्त किया है, तो वे संबंधित विकल्प चुन सकते हैं।
- अपने नाम पर जारी नोटिस पर क्लिक करें और ध्यानपूर्वक पढ़ें कि विभाग ने आपसे किस तरह की जानकारी या स्पष्टीकरण मांगा है।
- कुछ नोटिस ऐसे होते हैं जिनमें केवल एक साधारण पुष्टि या स्पष्टीकरण की आवश्यकता होती है। वहीं, कुछ मामलों में आपको संशोधित गणना, सहायक दस्तावेज या आयकर रिटर्न में दर्ज की गई प्रविष्टियों पर विस्तृत विवरण देना पड़ सकता है। बिना पूरी तैयारी के जल्दबाजी में जवाब न दें, क्योंकि अधूरा जवाब मिलने पर विभाग आगे और सवाल पूछ सकता है।
- अपना जवाब अच्छे से तैयार करें और आवश्यक दस्तावेजों की डिजिटल फाइलें संभालकर रखें। इसके बाद पोर्टल पर इन दस्तावेजों को अपलोड करें।
- नोटिस की प्रकृति के आधार पर आपको कर गणना पत्रक (कंप्यूटेशन स्टेटमेंट), बैंक खाते का विवरण, निवेश के प्रमाण, फॉर्म 16, फॉर्म 26AS से जुड़े स्पष्टीकरण या अन्य वित्तीय दस्तावेज अपलोड करने पड़ सकते हैं। ध्यान रखें कि सभी दस्तावेज बिल्कुल स्पष्ट और सुपाठ्य होने चाहिए।
- सभी दस्तावेज अपलोड करने और अपना जवाब लिखने के बाद, पोर्टल पर दिए गए घोषणापत्र (डिक्लेरेशन) को स्वीकार करें और अपना जवाब सबमिट कर दें। जवाब सबमिट होते ही पोर्टल एक ट्रांजैक्शन आईडी और एक्नॉलेजमेंट नंबर जेनरेट करेगा। इसके साथ ही आपके पंजीकृत ईमेल आईडी पर भी एक पुष्टिकरण संदेश भेजा जाएगा। भविष्य के संदर्भ के लिए इस पावती को सुरक्षित रख लें।













